बॉट अटैक क्या है?

बॉट अटैक क्या होता है (Bot Attack in HIndi)

बॉट और बॉटनेट अटैक के बारे में बहुत ही कम लोग जानते होंगे, क्यूंकि ये डायरेक्ट वेबसाइट या किसी नेटवर्क पर किया जाता है। इसमें भी अच्छे बॉट और बुरे बॉट होते है, लेकिन बॉटनेट ऐसा नहीं होता केवल अटैक करने के लिए ही होते है।

बॉट क्या होता है?

इसे अलग अलग नामो से जाना जाता है जैसे की इंटरनेट बॉट, वेब रोबोट, रोबोट या बॉट। ये एक सॉफ्टवेयर एप्लिकेशन होती है जो इंटरनेट पर आटोमेटिक काम करने के लिए प्रोग्राम किया जाता है।

ये अपने इंस्ट्रक्शन के अनुसार चलते हैं, इन्हे चलाने के लिए इंसान की जरुरत नहीं होती है। आमतौर पर बॉट को बार बार किए जाने वाले काम के लिए बनाया जाता हैं, ओर वे किसी भी काम को एक इंसान की तुलना में बहुत तेजी से कर सकते हैं।

बॉट अच्छे और बुरे दो तरह के होते है। अच्छे बॉट्स का काम होता है जैसे कि डाटा को क्रॉल करके सर्च इंजन पर इंडेक्स करना, कॉपीराइट को डिटेक्ट करके उसकी सुचना देना, कस्टमर सर्विस में सहयता करना, इत्यादि। उदहारण के लिए चैटबॉट, वेब क्रॉलर, सोशल बॉट, इत्यादि।

बुरे बॉट्स मालिसियस अटैक या टास्क करते है, जैसे कि बिना कारण के विज्ञापन को आपके कंप्यूटर में दिखाना और उनपर क्लिक करना, स्पैम करना, वायरस फैलाना इत्यादि। बॉट आमतौर पर एक नेटवर्क पर काम करते हैं।

बॉट अटैक क्या होता है?

बॉट एक सॉफ्टवेयर होता है जो किसी वेबसाइट या कंप्यूटर में घुस कर उनसे कोई भी काम जबरजस्ती, बिना उसके मलकी को पता चले और बिना मालिक की परमिशन के करवा लेता है। यानि की अब वो कंप्यूटर एक बॉट बन चूका है और उसके जरिये किया गया हमला बॉट अटैक कहलाएगा।

बॉट हमले की शुरुआत सिंपल स्पैमिंग ऑपरेशन से ही हुई थी और अब ये मुश्किल और बड़े लेवल पर हो रहे है। एक बार जब किसी कंप्यूटर में बॉट मैलवेयर लग जाए तो हैकर उस कंप्यूटर को आसानी से कंट्रोल कर सकता है।

बॉटनेट अटैक क्या होता है?

बॉट मैलवेयर से इन्फेक्टेड डिवाइस का एक ग्रुप जो इंटरनेट के माध्यम से आपस में एक दूसरे से जुड़े होते है, जिसे हैकर कंट्रोल करता है। इन सभी डिवाइस को एक ही काम को बार बार करने के लिए टारगेट या प्रोराम किया जाता है, तब ये सभी डिवाइस मिल कर काम करते है। जब सभी बॉट एक साथ किसी वेबसाइट या नेटवर्क पर हमला करते है तो उसे ही बॉटनेट अटैक कहाँ जाता है। 

यानि की जब कई बॉट मिल कर हमला करते है तो उसे ही बॉटनेट अटैक कहा जाता है। साइबर क्रिमिनल बॉटनेट हमलों का इस्तेमाल क्रेडेंशियल लीक, अनऑथॉराइज्ड एक्सेस, डेटा चोरी और DDoS अटैक जैसी मालिसियस गतिविधियां में करते है।

हमलावर बॉट को कैसे बनाते हैं?

इंडिविजुअल साइबर क्रिमिनल से लेकर बड़ा हैकिंग आर्गेनाइजेशन तक, बॉट हमले आटोमेटिक होते हैं। एडवांस्ड हमलावर सिक्योरिटी को बाईपास करने के लिए डिज़ाइन किए गए आटोमेटिक हमले के लिए कस्टम कोड लिखते हैं।

नए साइबर क्रिमिनल बॉट को बनने के लिए ओपन-सोर्स डवलपर टूल का इस्तेमाल करते हैं, जिन्हे बॉटकिट के नाम से जाना जाता है। बॉटकिट ज्यादातर मुफ्त में ऑनलाइन मिल जाता हैं और डार्क वेब पर भी बेचे जाते हैं। बॉटकिट बेचनेवाले बॉट हमलों को एक्सीक्यूट करने के लिए पेड सर्विस भी देते हैं, जिसमें ऐसे सॉफ्टवेयर शामिल है जो DDoS हमलों के लिए बॉटनेट बनाते है।

बॉटकिट एक किट है जिसमें सभी तरह के कोड मिल जाते है जिससे आप एक बॉट तैयार कर सकते हो और अपनी जरूरत के हिसाब से उन कोड को बदल भी सकते हो।

मालिसियस बॉट एक्टिविटी क्या है?

अगर कोई भी बॉट आटोमेटिक कोई काम करता है जो उस वेबसाइट के मालिक नहीं चाहता, साइट की टर्मस ऑफ़ सर्विस, या बॉट Robots.txt के नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसे मालिसियस बॉट कहा जाता है।

आइडेंटिटी की चोरी या अकाउंट को टेकओवर करना जैसे साइबर क्राइम करने वाले सभी बॉट “बुरे” बॉट में आते हैं। ये सभी इल्लीगल एक्टिविटी के तहत आते है अगर कोई बॉट किसी भी नियमो को नहीं तोड़ता है तो मालिसियस बॉट नहीं कहलाता है।

इसके अलावा, ज्यादातर बॉट ट्रैफ़िक वेब सर्वर के रिसोर्सेज पर असर डाल सकता है, वेबसाइट या एप्लिकेशन सर्विस को यूजर के लिए धीमा या उस रोक सकता है। कभी-कभी ये DoS या DDoS अटैक के रूप में भी हो सकता है।

मालिसियस बॉट एक्टिविटी में शामिल हैं:

इन हमलों को करने के लिए और हमले के सोर्स को बदलने के लिए, खराब बॉट को बॉटनेट में बदल दिया जाता है। जिसका मतलब है कि डिवाइस मालिकों की जानकारी के बिना बॉट की कॉपी को कई अलग अलग डिवाइस पर चलाना।

क्योंकि हर एक डिवाइस का अपना IP एड्रेस होता है, बॉटनेट ट्रैफ़िक कई अलग-अलग IP एड्रेस से आता है, जिससे मालिसियस बॉट ट्रैफ़िक के सोर्स को पहचानना और उसे ब्लॉक करना मुश्किल हो जाता है।

बॉट अटैक में हमलावर किस प्रकार के डेटा को टारगेट करते हैं?

बॉट एक टूल है जिसका इस्तेमाल इम्पोर्टेन्ट डेटा को चुराने या बदलने के लिए हमलों में किया जाता है। आम बॉट हमले के बारे में नीचे बताया गया हैं:

1. Web Content Scraping:

वेब स्क्रैपिंग में बॉट ऑटोमेटिक दूसरी वेबसाइटों से डेटा कलेक्ट और कॉपी करते हैं। जब वे कंटेंट को स्कैन करते हैं तो वे खुद को अहानिकर (नुकसान न पहुंचने वाले) सर्च इंजन क्रॉलर बताते हैं, लेकिन ये बॉट वेबसाइट के मालिक की जानकारी और परमिशन के बिना कंटेंट को चुरा लेते हैं।

Google या बिंग यूजर के लिए सर्च इंजन रिजल्ट ओर बेहतर बनाने के इरादे से कंटेंट को इंडेक्स करने के लिए बॉट क्रॉलर का इस्तेमाल करते हैं।

2. Account Takeover

अक्सर यूजर के क्रेडेंशियल्स चुरा करके उन्हें डार्क वेब पर बेच दिया जाता हैं। फिर, हमलावर अकाउंट को टेकओवर (जिसे क्रेडेंशियल स्टफिंग अटैक भी कहा जाता है) करने के लिए बॉट का इस्तेमाल करते हैं, जिसका मतलब है कि वे साइटों के यूजरनाम और पासवर्ड का तेजी से चेक कर रहे हैं।

वैलिड यूजर क्रेडेंशियल मिल जाने के बाद, उस वेबसाइट अकाउंट पर कब्जा कर लेते हैं और यूजर के अकाउंट को लॉक कर देते हैं। हमलावर धोखाधड़ी करने के लिए उस अकाउंट की सभी जानकारी को ले लेते है, और फिर अपनी जरुरत के अनुसार उसका इस्तेमाल करते है।

अब वो आपका ईमेल अकाउंट हो सकता या आपका बैंक अकाउंट या किसी दूसरी वेबसाइट का अकाउंट जानकारी हो सकती है।

3. Form Submission Abuse

वेबसाइट फॉर्म को बड़े लेवल पर जावास्क्रिप्ट सिक्योरिटी कमियों के कारण बॉट हमलों के लिए टारगेट किया जाता हैं। ये हैकर्स के लिए सर्वर साइड की जानकारी तक पहुंचने या मैलवेयर से यूजर को इन्फेक्ट करके सिस्टम या सर्वर को एक्सेस कर सकते है। इसके अलावा, वे SQLi, स्कैनिंग, या अनवांटेड कंटेंट को पोस्ट करके फॉर्म का इस्तेमाल करते है।

बॉट के प्रकार

इंटरनेट पर कई प्रकार के बॉट हैं, वैलिड और मालिसियस दोनों तरह के। नीचे कुछ कॉमन उदाहरण दिए गए हैं।

1. स्पाइडर बॉट्स

स्पाइडर बॉट को वेब स्पाइडर या क्रॉलर के नाम से भी जाना जाता है। ये वेब कंटेंट को रिट्रीव करने और इंडेक्स करने के उद्देश्य से हाइपरलिंक को फॉलो करते हैं। स्पाइडर HTML और दूसरे सोर्सेज, जैसे CSS, जावास्क्रिप्ट और फोटो को डाउनलोड करते हैं, और साइट कंटेंट को प्रोसेस करने के लिए उनका इस्तेमाल करते हैं।

अगर आपकी वेबसाइट पर बड़ी संख्या में वेब पेज हैं, तो आप अपने वेब सर्वर के रूट डायरेक्टरी में एक robots.txt फ़ाइल रख सकते हैं, और बॉट्स को इंस्ट्रक्शन दे सकते हैं कि वे आपकी साइट के किन हिस्सों या पेज को क्रॉल कर सकते हैं और कितनी बार करना है।

2. स्क्रेपर बॉट्स

स्क्रैपर्स एक तरह के बॉट होते हैं जो वेबसाइटों से डेटा को ऑफ़लाइन सेव और उन्हें दोबारा इस्तेमाल करने के उद्देश्य से डाटा को डाउनलोड या सेव करते है। 

ये पुरे कंटेंट को वेब पेज से कॉपी कर लेते है या फिर कोई एक स्पेसिफिक पॉइंट को उस डाटा में से कॉपी करते है जैसे की इ-कॉमर्स साइट से प्रोडक्ट नाम और प्राइस को कॉपी करना।

वैसे तो स्क्रैपिंग वैलिड है और वेबसाइट के मालिकों द्वारा इसकी परमिशन भी दी जा सकती है। लेकिन कई बार बॉट ऑपरेटर वेबसाइट के संवेदनशील या कॉपीराइट कंटेंट को चुराने के लिए भी स्क्रैपिंग इस्तेमाल करते हैं।

3. स्पैम बॉट्स

स्पैमबॉट एक इंटरनेट एप्लिकेशन है जिसे स्पैम मेलिंग लिस्ट के लिए ईमेल एड्रेस कलेक्ट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। एक स्पैम बॉट वेबसाइटों, सोशल मीडिया, बिज़नेस और आर्गेनाइजेशन से ईमेल एड्रेस के स्पेसिफिक फॉर्मेट का फायदा उठाता है।

हमलावरों के पास ईमेल एड्रेस की एक बड़ी लिस्ट होने के बाद, वे उनका इस्तेमाल न केवल स्पैम ईमेल भेजने के लिए करते हैं, बल्कि दूसरे गलत कामो के लिए भी करते हैं:

  • क्रेडेंशियल क्रैकिंग – अकाउंट में अनऑथॉरिज़ड एक्सेस पाने के लिए नार्मल पासवर्ड वाले ईमेल इस्तेमाल करना।
  • फ़ॉर्म स्पैम – आटोमेटिक स्पैम को इन्सर्ट करना, जैसे विज्ञापन या मैलवेयर लिंक को लोकप्रिय वेबसाइटों के फ़ॉर्म में डालना, आमतौर पर कमेंट या फ़ीडबैक फ़ॉर्म में।

इन सब के अलावा स्पैमबॉट्स सर्वर बैंडविड्थ को भी रोक सकते हैं।

4. सोशल मीडिया बॉट्स

बॉट सोशल मीडिया नेटवर्क को ऑपरेट करते हैं और आटोमेटिक मैसेज जनरेट करते है, यूजर फॉलोवर को बढ़ाने के लिए नकली अकाउंट के रूप में भी इस्तेमाल किए जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि 9-15% ट्विटर अकाउंट सोशल बॉट हैं।

सोशल बॉट्स का इस्तेमाल लोगों के ग्रुप में ताकझांक करने और स्पेसिफिक आईडिया को बढ़ावा देने के लिए भी किया जा सकता है। उनकी गतिविधि को कंट्रोल करने के लिए अभी तक कोई सख्त कानून या नियमन नहीं है।

सोशल बॉट नकली अकाउंट बना सकते हैं (हालांकि ये अब ओर अधिक कठिन होता जा रहा है क्योंकि सोशल नेटवर्क ओर मुश्किल होते जा रहे हैं), बॉट ऑपरेटर के मैसेज और नकली फॉलोवर / लाइक्स को बढ़ा सकते है। सोशल बॉट की पहचान करना और उन्हें कम करना मुश्किल है, क्योंकि वे वास्तविक यूजर के समान ही हरकत करते हैं।

5. डाउनलोड बॉट्स

डाउनलोड बॉट आटोमेटिक प्रोग्राम हैं जिनका इस्तेमाल सॉफ़्टवेयर या मोबाइल ऐप को आटोमेटिक डाउनलोड करने के लिए किया जा सकता है। उनका इस्तेमाल डाउनलोड स्टेटिस्टिक्स को कंट्रोल करने के लिए किया जा सकता है, उदाहरण के लिए पॉपुलर ऐप स्टोर पर ओर डाउनलोड करने और नए ऐप्स को चार्ट के टॉप पर लाने में मदद करने के लिए।

इनका उपयोग डाउनलोड साइटों पर हमला करने के लिए भी किया जा सकता है, एप्लिकेशन-लेयर डेनियल ऑफ सर्विस (DoS) हमले के हिस्से के रूप में नकली डाउनलोड बना कर।

6. टिकटिंग बॉट्स

टिकटिंग बॉट का काम बल्क में टिकट खरीदने का एक आटोमेटिक तरीका है, जिसका उद्देश्य उन टिकटों को प्रॉफिट के लिए फिरसे उचे दामों में बेचना है। यह गतिविधि कई देशों में इनवैलिड है।

टिकटिंग बॉट को पकड़ पाना बहुत मुश्किल होता हैं, जो एक इंसान की तरह ही हरकत करते हैं। इसमें आटोमेटिक बॉट्स द्वारा खरीदे गए टिकटों लगभग 40-60% के बीच होता है।

वेब एनालिटिक्स में बॉट ट्रैफिक का पता कैसे लगाएं?

वेबसाइट पर आने वाले बॉट ट्रैफ़िक का पता लगाने के लिए, आप अपने वेब एनेलिटिक्स की मैन्युअल जांच में कुछ पैरामीटर का इस्तेमाल कर सकते हैं:

  • ट्रैफ़िक ट्रेंड: अगर ट्रैफ़िक असामान्य तरिके से बढ़ रहा है तो ये बॉट के साइट पर आने के संकेत हो सकते है। अगर ट्रैफिक हर कुछ घंटों के दौरान बदल रहा है, तो ये मुमकी है की बॉट अटैक हुआ हो उस वेबसाइट पर।
  • बाउंस रेट: असामान्य तरिके से अगर ट्रैफिक में उतार या चढ़ाव दिख रहा है तो बुरे बॉट्स का संकेत हो सकता है। उदाहरण के लिए, जो बॉट साइट पर एक स्पेसिफिक पेज पर आते हैं और फिर IP स्विच करते हैं, उनमे 100% बाउंस दिखाई देगा।
  • सर्वर की परफॉरमेंस: सर्वर की परफॉरमेंस धीमी होना भी बॉट्स का संकेत हो सकता है।
  • Suspicious IP/Geo-location: किसी अनजान IP एड्रेस या उस एरिया से एक्टिविटी बढ़ती है जिसको आपने टारगेट नहीं किया है तो ये भी बॉट का संकेत हो सकता है।
  • एक ही IP से बार बार आना: एक ही IP से बड़ी संख्या में बार बार विजिट करना। आमतौर पर मनुष्य कुछ ही पेजो का देखते है, सभी नहीं, जबकि बॉट अक्सर सभी पेजो की रिक्यूएस्ट करता हैं।
  • लैंग्वेज सोर्स: दूसरी भाषाओं के हिट नहीं होने चाहिए।उदाहरण के लिए, अगर अपने हिंदी ब्लॉग बनाया है सभी हिंदी बोलने और पड़ने वाले ही उस वेबसाइट पर आने चाहिए न की इंग्लिश या बंगाली या ऐसे जिनको हिंदी समझ में ही नहीं आति। अगर ऐसा होता है तो ये बॉट्स का संकेत हो सकता है।

ऊपर बताए सभी बॉट गतिविधि होने के केवल मोटे संकेत हैं। सावधान रहें कि मालिसियस बॉट आपके वेब एनेलिटिक्स में एक असल यूजर की हरकत कर सकते हैं।

बॉट ट्रैफिक को कैसे रोकें?

कुछ बॉट्स को ब्लॉक करने और बुरे बॉट्स के संपर्क को कम करने के लिए आप कुछ सरल उपाय कर सकते हैं:

  • robots.txt को अपनी वेबसाइट के कोर में फिक्स करके रखें कि किस तरह के बॉट्स को आपकी वेबसाइट को एक्सेस करने की अनुमति है। ध्यान रखें, यह केवल वैलिड बॉट के क्रॉल पैटर्न को मैनेज करने के लिए है और मालिसियस बॉट एक्टिविटी को नहीं पाएगा रोकेगा।
  • साइन-अप, कमेंट, या फॉर्म डाउनलोड करने पर कैप्चा इस्तेमाल करे। कई पब्लिशर और प्रीमियम वेबसाइट डाउनलोड या स्पैम बॉट्स को रोकने के लिए कैप्चा लगाते हैं।
  • आपको बॉट ट्रैफ़िक के बारे में सूचित करने के लिए जावास्क्रिप्ट अलर्ट सेट कर सकते है। जावास्क्रिप्ट के होने से बजर के रूप में आपको अलर्ट कर दिया जाएगा और जब भी किसी बॉट या इसी तरह की हरकत वेबसाइट पर होगी तो आपको सतर्क हो जाएंगे।

बॉट्स डिटेक्शन से कैसे बचते हैं?

पिछले एक दशक में बॉट तकनीक काफी विकसित हुई है। बॉट्स एक स्क्रिप्ट थे जो वेबसाइट पर डेटा को फिर से पाने या कोई एक्शन लेने के लिए इस्तेमाल होते थे। ये कुकीज़ को एक्सेप्ट नहीं करतीं है और जावास्क्रिप्ट को पार्स नहीं करतीं, जिससे उनका पता लगाना बहुत आसान हो जाता है।

समय के साथ बॉट अधिक कठिन होते गए। अब वे कुकीज़ को एक्सेप्ट कर लेते है और जावास्क्रिप्ट को पार्स कर लेते है, लेकिन उन्हें अभी भी काफी आसानी से पहचाना जा सकता था क्योंकि उन्होंने मानव यूजर की तुलना में कम डायनामिक वेबसाइट एलिमेंट का इस्तेमाल किया था।

अगला विकास PhantomJS जैसे हेडलेस ब्राउज़रों का उपयोग था – ये वेबसाइट कंटेंट को पूरी तरह से प्रोसेस कर सकता था। हालांकि ये ब्राउज़र बेसिक बॉट्स की तुलना में अधिक जटिल होता था, फिर भी हेडलेस ब्राउज़र वे सभी काम नहीं कर सकता था जो वास्तविक यूजर कर सकता हैं।

सबसे एडवांस्ड प्रकार के बॉट क्रोम ब्राउज़र बेस्ड होते हैं और वास्तविक यूजर से लगभग समान होता हैं। ये बॉट मानव गतिविधि के जैसे ही होते है जैसे की ऑन-पेज एलिमेंट पर क्लिक करना। इसी कारण से ये पता कर पाना मुश्किल हो जाता है की जो विजिटर आया है वो एक बॉट है या फिर रियल ह्यूमन।

एडवांस्ड बॉट को कैसे पहचाने और रोके?

जैसे-जैसे बॉट्स विकसित हुए, वैसे ही उन्हें मिटिगेशन की तकनीकें भी विकसित हुईं है। खराब बॉट्स का पता लगाने और उन्हें कम करने के लिए वर्तमान में तीन तकनीकी तरिके हैं:

  • स्टैटिक तरीके: स्टैटिक एनालिसिस टूल बुरे बॉट्स से रिलेटेड वेब रिक्यूएस्ट और हेडर जानकारी की पहचान कर सकते हैं और अगर जरुरी हो तो इसे ब्लॉक भी कर सकते हैं।
  • चैलेंज बेस्ड तरीके: आप अपनी वेबसाइट में ये जांचने की क्षमता जोड़ सकते हैं कि ट्रैफ़िक बॉट्स से आ रहा है या इंसानी यूजर से। चैलेंज बेस्ड बॉट डिटेक्टर कुकीज़ का इस्तेमाल करके, जावास्क्रिप्ट चलाने और कैप्चा एलिमेंट के साथ कम्यूनिकेट करने के लिए हर एक विजिटर की जांच कर सकते हैं। इस प्रकार के एलिमेंट को प्रोसेस करने का मतलब है की बॉट से ट्रैफ़िक आ रहा है।
  • व्यवहारिक तरीके: व्यवहारिक बॉट मिटिगेशन को वेबसाइट का मैकेनिज्म हर एक विजिटर की एक्टिविटी पर नजर रखता है कि क्या यह ह्यूमन विजिटर ही है या कोई बॉट है।

तीनो तरीको को मिलाकर, आप सभी प्रकार के बॉट्स को रोक सकते हैं, और आसानी से उन्हें नार्मल ट्रैफिक से अलग कर सकते हैं। आप इन तरीको का इंडीपेंडैंटली इस्तेमाल कर सकते हैं या आप बॉट मिटिगेशन सर्विस का इस्तेमाल भी कर सकते हैं।

बॉट मिटिगेशन सर्विस आटोमेटिक टूल हैं जो बॉट्स की पहचान करने के लिए ऊपर बताए गए तरीको का इस्तेमाल करते हैं। इन सर्विस का इस्तेमाल API ट्रैफ़िक की निगरानी करने और यह पता लगाने के लिए किया जा सकता है कि ये वैलिड मशीन ट्रैफ़िक है या बुरे बॉट्स से आ रहा हैं।

एडवांस्ड बॉट मिटिगेशन सर्विस पूरे IP एड्रेस के बजाय हर एक रिक्यूएस्ट करने वाले क्लाइंट या मशीन के लिए रेट लिमिट तय करती हैं, जिससे बुरे बॉट्स से क्रॉलिंग को सिमित कर सकते है। एक बार एक बॉट की पहचान हो जाने के बाद, ये सर्विस पूरे नेटवर्क को सुचना दे देती हैं, ताकि वही बॉट फिर आपकी वेबसाइट या API को एक्सेस न कर सके है।

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Dharmendra Author on Web Janakari

मेरा नाम धर्मेंद्र मीणा है, मुझे तकनीक (कंप्यूटर, लैपटॉप, स्मार्टफोन्स, सॉफ्टवेयर, इंटरनेट, इत्यादि) से सम्बन्धी नया सीखा अच्छा लगता है। जो भी में सीखता हु वो मुझे दुसरो के साथ शेयर करना अच्छा लगता है। इस ब्लॉग को शुरू करने का मेरा मकसद जानकारी को ज्यादा से ज्यादा लोगो तक हिंदी में पहुंचना है।

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