क्लाउड स्टोरेज क्या होता है?

क्लाउड स्टोरेज हिंदी में - Cloud Storage in Hindi

आजकल हम सारा काम या डाटा क्लाउड स्टोरेज पर ही करते है। हम इसे रोजाना इस्तेमाल करते है लेकिन फिर भी इससे अनजान है।

जब हम अपना डाटा स्मार्टफोन, कंप्यूटर, हार्ड डिस्क, पेन ड्राइव इत्यादि फिजिकल डिवाइस में स्टोर करते हैं, तो उसे हम डिजिटल मीडियम कहते है और जब हम उन सभी डेटा को ऑनलाइन स्टोर करते हैं दूसरी कंपनियों के सर्वर पर तो उसे हम क्लाउड स्टोरेज कहते हैं।

हो सकता है की आप इसे शायद ऑनलाइन बैकअप, क्लाउड बैकअप, ऑनलाइन डेटा स्टोरेज, फाइल होस्टिंग सर्विस, इत्यादि के नाम से जानते हो।

उदहारण के लिए गूगल ड्राइव (ये गूगल की तरफ से मुफ्त है), वन ड्राइव (ये माइक्रोसॉफ्ट की तरफ से मुफ्त है), फ्लिकर, फोटोबकेट, इत्यादि क्लाउड कंप्यूटिंग सर्विस है।

हम सभी रोजाना सोशल मीडिया (जैसे की फ़्लिकर, इंस्टाग्राम, यूट्यूब, फेसबुक, ट्विटर इत्यादि), ईमेल क्लाइंट (जैसी की जीमेल, हॉटमेल, याहू, इत्यादि), बैंकिंग सेक्टर और सभी सर्विस का इस्तेमाल ऑनलाइन करते है और ये सभी क्लाउड कंप्यूटिंग के माध्यम से ही चलती है और इन सभी का सारा डाटा क्लाउड स्टोरेज पर ही स्टोर होता है।

अब सारा डाटा दूसरी कंपनियों के सर्वर पर स्टोर होता है तो उन्हें संभालना और होस्ट करना भी इन कंपनी का ही काम होता है। इनमे से कुछ सर्विसेज फ्री होती है तो कुछ के लिए हमे पैसे दे कर सब्सक्रिप्शन खरीदना होता है।

क्लाउड स्टोरेज और क्लाउड कंप्यूटिंग में क्या अंतर है?

क्लाउड स्टोरेज में हम अपना डेटा या डाक्यूमेंट को दूसरी कंपनियों के सर्वर पर ऑनलाइन स्टोर करते है। भविष्य में हम कभी भी किसी भी फाइल को ऑनलाइन डाउनलोड या अपलोड करने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं, और कोई भी आपकी परमिशन के बिना आपके डेटा को देख या इस्तेमाल नहीं कर सकता।

आप क्लाउड स्टोरेज सर्विस को वेब ब्राउज़र या इन कंपनियों की एप्लीकेशन के से ही इस्तेमाल कर सकते हैं।

क्लाउड कंप्यूटिंग में हम ऑनलाइन सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करते है। कहने का मतलब ये है की हम जितने भी टूल ऑनलाइन इस्तेमाल करते है वो सभी क्लाउड कंप्यूटिंग का ही एक हिस्सा है। जैसे की ऑनलाइन फोटो या वीडियो एडिटिंग, ऑनलाइन डॉक्यूमेंट क्रिएट करना, इत्यादि क्लाउड कंप्यूटिंग कहलाती है।

आप क्लाउड कंप्यूटिंग को वेब ब्राउज़र या इसकी एप्लिकेशन के माध्यम से भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इसमें ऑनलाइन सॉफ़्टवेयर या उसके फीचर को अपडेट करते रहना होता है।उदाहरण के लिए फेसबुक, जीमेल, ऑनलाइन बैंकिंग एप्लीकेशन इत्यादि।

क्लाउड स्टोरेज कैसे काम करता है?

क्लाउड स्टोरेज में कई डेटा सर्वर (डाटा सेंटर) शामिल होता है जिसके जरिए यूजर इंटरनेट से जुड़ा होता है। ये डाटा सेंटर पूरी दुनिया में कही पर भी हो सकते है, जिसकी जानकारी केवल सर्विस प्रोवाइडर को ही होती है। इसका इस्तेमाल हम वेब ब्राउज़र के जरिये वेब ब्राउज़र के माध्यम से कर सकते है।

यूजर (हम) इंटरनेट पर डाटा को सर्वर पर फाइलो को मैन्युअल या आटोमेटिक अपलोड कर सकते है। फिर ये सर्विस प्रोवाइडर (क्लाउड स्टोरेज प्रोवाइडर) उस फाइल को कई अलग अलग सर्वरों पर अपलोड कर देते है। ताकि अगर एक सर्वर या किसी एक डाटा सेंटर में कोई प्रॉब्लम आ जाए तो आपका डाटा दूसरे सर्वर पर सुरक्षित रहे।

अगर कभी कोई सर्वर ख़राब हो भी गया तो ये कंपनियां आपको अपने आप ही दूसरे सर्वर से कनेक्ट कर देती है, ताकि यूजर का कोई भी काम रुके नहीं। डाटा स्टोर होने के बाद आप उसे वेब ब्राउज़र या एप्लीकेशन के जरिए इस्तेमाल कर सकते है।

इसे इस्तेमाल करने के लिए आपको user ID और password की जरुरत होती है। यानी की जिस कंपनी के सर्वर पर आप अपना डाटा ऑनलाइन स्टोर कर रहे है आपको उस कंपनी की वेबसाइट पर अपना अकाउंट क्रिएट करना होगा, तभी आप अपना डाटा ऑनलाइन स्टोर कर सकते है।

क्लाउड स्टोरेज आमतौर पर सभी साइज की फ़ाइलो सपोर्ट करता है, इसलिए आप आसानी से अपने सभी इम्पोर्टेन्ट कंटेंट जैसे डॉक्यूमेंट, वीडियो, फोटो, गाने, फिल्में और भी कई फाइल अपलोड कर सकते हैं।

क्लाउड स्टोरेज का इस्तेमाल कैसे करे?

डेटा को ऑनलाइन स्टोर करने के लिए कई सारी कम्पनियाँ हैं। आपको इनमें से किसी एक या सभी पर अकाउंट बनाना होगा (रजिस्टर करना होगा), ठीक उसी तरह जैसे आप जीमेल, फेसबुक या दूसरी किसी वेबसाइट पर बनाते है।

अकाउंट बनाने के बाद, आपको उस क्लाउड स्टोरेज वेबसाइट पर आपके अकाउंट में login ID और password से लॉग इन करना होगा। तब आपके पास उस वेबसाइट का एक्सेस होगा जहां आप अपना डाटा स्टोर करना चाहते हैं।

इन साइट का इस्तेमाल आप फ्री और पैसे दे कर दोनों ही तरह से कर सकते है। अगर फ्री अकाउंट का इस्तेमाल करते है तो आप एक लिमिट तक ही डाटा को स्टोर कर सकते हो।

फ्री अकाउंट में कितना डाटा स्टोर कर सकते है, ये सभी वेबसाइट में अलग अलग लिमिट होती है। इसके अलावा फ्री अकाउंट में और भी कई सारी दूसरी लिमिट भी होती है।

किसी में 2GB, 5GB, 10GB, 15GB, 100GB, इत्यादि तक स्टोर कर सकते है। ये स्टोरेज साइज प्लान के हिसाब से अलग अलग हो सकती है। अगर आपको और ज्यादा स्टोरेज चाहिए तो आपको इन कम्पनीयो का प्लान खरीदना होगा।

जैसे Netflix, Amazon Prime, या दूसरी किसी सर्विस का सब्सक्रिप्शन प्लान खरीदते है महीने या साल के हिसाब से, ठीक उसी तरह से इन सभी वेबसाइटो में भी सब्सक्रिप्शन प्लान होता है जिसे आप अपनी जरुरत के हिसाब से खरीद कर इस्तेमाल कर सकते है।

क्या क्लाउड स्टोरेज सुरक्षित है?

हमें कैसे पता चलेगा कि क्लाउड स्टोरेज पर हमारा डेटा वास्तव में सुरक्षित है? 

हमारी सुरक्षा और भरोसे के लिए वे क्या उपाय करते हैं?

जब आप इंटरनेट पर कोई फ़ाइल अपलोड करते हैं, तो वो फ़ाइल एक सर्वर पर स्टोर होती है। जिसे आप कभी भी डाउनलोड कर सकते है। इस पुरे प्रोसेस को क्लाउड स्टोरेज का नाम दिया गया है।

आपके डेटा को सुरक्षित रखने के लिए, ये कंपनीयां क्लाउड सिस्टम ऑथेंटिकेशन प्रोसेस और डाटा एन्क्रिप्शन का इस्तेमाल करती है ताकि डाटा को चोरी होने से बचाया जा सके और कोई दूसरा व्यक्ति आपके अकाउंट एक्सेस ना कर सके बिना आपकी परमिशन के।

ज्यादातर क्लाउड-स्टोरेज कंपनीयां यूजर के अकाउंट को सुरक्षित रखने के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन और एन्क्रिप्शन का इस्तेमाल करती है, ताकि अगर किसी को पासवर्ड पता भी चल जाए तो आपके अकाउंट को लोगइन करने के लिए उसे एक और कोड चाहिए होगा, जो की आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर, ईमेल या कनेक्टेड डिवाइस पर ही भेजा जाता है। जिससे सिक्योरिटी कोड और पासवर्ड दोनों की ही जरुरत होती है लोगइन करने के लिए।

ऑनलाइन डाटा अलग अलग सर्वर पर स्टोर रहता है तो अगर कोई भी प्रॉब्लम आती है तो आप इनके सपोर्ट टीम से कांटेक्ट कर सकते है।

क्लाउड स्टोरेज के प्रकार

ये 3 प्रकार के होते है पब्लिकप्राइवेट और हाइब्रिड क्लाउड स्टोरेज। आइए जानते हैं की तीनो में क्या अंतर है:

क्लाउड स्टोरेज के प्रकार - Types of Cloud Storage

1. पब्लिक क्लाउड स्टोरेज:

आपने Amazon Web Services (AWS), IBM Cloud, Google Cloud और Microsoft Azure के बारे में सुना होगा। ये सभी पब्लिक क्लाउड प्रोवाइडर के उदाहरण हैं।

इनके पास खुद के क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर होते है और ये खुद ही उन्हें मेन्टेन करते है जैसे की हार्डवेयर, सॉफ़्टवेयर और बाकि सब ओर इसे इंटरनेट पर क्लाउड सर्विस के रूप में डिस्ट्रीब्यूट भी करते है।

इनके सर्वर हैवी लोड को संभाल सकते है और साथ ही यूजर को भी सर्विस सस्ते में मिल जाती है।

इनके सर्वर काफी भरोसेमंद होते है और इन सभी कंपनियों के पास इनकी खुद की टीम होती है जो समय समय पर इनके सर्वर और बाकि हार्डवेयर को मॉनिटर करती रहती है।

2. प्राइवेट क्लाउड स्टोरेज:

प्राइवेट क्लाउड का इस्तेमाल केवल ऑर्गेनाइजेशन के अंदर के लोगो के लिए होता है। बड़ी कंपनियों (सरकारी एजेंसियाँ, फ़ाइनेंशियल इंस्टीटूशन्स या हेल्थ ऑर्गनिज़तिओन्स) के पास महत्वपूर्ण डेटा होता है जिन्हें काफी ज्यादा सुरक्षा की जरुरत होती है, इसलिए ये खुद की क्लाउड स्टोरेज का इस्तेमाल करते है।

प्राइवेट क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर या तो खुद के होते है या थर्ड पार्टी से किराय पर लिया होता है। थर्ड पार्टी जैसी की Amazon Web Services (AWS), IBM Cloud, Google Cloud और Microsoft Azure।

इनके सर्वर हैवी लोड को संभाल सकते है और इनकी सर्विसेज काम में लेने के लिए यूजर को जितनी जरुरत होती है उतना ही पैसा देना होता है।

इस तरह के सर्वर काफी भरोसेमंद होते है और सुरक्षा भी काफी बजबूत होती है। इसे कम्पनिया अपने हिसाब से कस्टमाइजेशन कर सकती है।

3. हाइब्रिड क्लाउड स्टोरेज:

हाइब्रिड शब्द का मतलब होता है किसी दो या उससे ज्यादा का मिक्सचर।

हाइब्रिड क्लाउड, पब्लिक और प्राइवेट क्लाउड को एक यूनिक प्रकार के क्लाउड स्टोरेज में कन्वर्ट करता है जो दोनों के ही फीचर देता है।

अगर संक्षिप्त में कहु तो ये पब्लिक और प्राइवेट क्लाउड का मिश्रण है और इसमें आपको दोनों की ही सुविधा मिल जाएगी।

इसमें डेटा और एप्लिकेशन पब्लिक और प्राइवेट क्लाउड के बीच आवश्यकता के अनुसार ट्रांसफर हो सकते हैं।

ज्यादातर फर्म अपने काम के कुछ कामो जैसे वेब मेल के लिए पब्लिक क्लाउड का उपयोग करते हैं, लेकिन सुरक्षित डेटा लॉग को स्टोर करने के लिए प्राइवेट क्लाउड की जरूरत होती है।

हाइब्रिड क्लाउड यूनिक सलूशन बनाने के लिए पब्लिक और प्राइवेट क्लाउड दोनों को ही जोड़ता है।

इसे कंट्रोल करना ज्यादा आसान हो जाता है, खर्चा कम होता है और कमाई अधिक होती है, अपनी जरुरत के हिसाब से फेरबदल किया जा सकते हैं।

क्लाउड स्टोरेज और एक्सटरनल हार्ड ड्राइव दोनों में क्या अंतर है और किसे इस्तेमाल करना सही होगा?

क्लाउड स्टोरेज और एक्सटरनल हार्ड ड्राइव दोनों में अंतर - Difference Between Cloud Storage and External Hard Drive

क्या आपको क्लाउड डेटा बैकअप पर भरोसा करना चाहिए?

हार्ड डिस्क फ़ैल होने से लेकर मैलवेयर हमलों के बारे में चिंता करने तक, आपके डिजिटल डेटा का बैकअप लेना बहुत जरुरी है।

पहले के समय में अपने डेटा को एक्सटरनल हार्ड ड्राइव पर कॉपी करना कम से कम समय लेने वाला और डेटा बैकअप के लिए सबसे कम खर्च वाला तरीका था।

क्लाउड स्टोरेज सर्विस की शुरुआत के साथ पिछले कुछ सालो में ऑनलाइन डाटा स्टोरेज चरण बढ़ गया है।

कंपनी के सर्वर पर अपना डेटा अपलोड करना अक्सर फिजिकल हार्ड ड्राइव रखने की तुलना में सस्ता और अधिक सुरक्षित होता है। साथ ही कही भी आसानी से एक्सेस भी कर सकते है।

कई क्लाउड स्टोरेज प्लेटफ़ॉर्म मजबूत बैकअप और सिंक सिस्टम के साथ आते हैं जो यह सुनिश्चित करते है की आपके सिस्टम में सभी फाइलो का बैकअप हो चूका है।

तो क्या हमे एक्सटरनल हार्ड डिस्क का इस्तेमाल ना करके, अपने डेटा बैकअप के लिए क्लाउड स्टोरेज पर स्विच करना चाहिए?

आइए देखेंते है कि क्लाउड स्टोरेज और हार्ड डिस्क दोनों में से डाटा का बैकअप के लिए कौन बेहतर है।

1. Universal Access:

फ़ाइल बैकअप सेटअप ऐसा होना चाहिए जिसे आप कही से भी और किसी भी डिवाइस के जरिये आसानी से कर सके। जब बात एक्सेस करने की हो तो क्लाउड स्टोरेज ही सही ऑप्शन है।

क्योंकि क्लाउड से फ़ाइलों को ट्रांसफर करने के लिए, आपको बस एक इंटरनेट कनेक्शन चाहिए होता है।

आप कहीं से भी अपनी फ़ोटो को ऑनलाइन ट्रांसफर कर सकते हैं, यहां तक ​​कि वाई-फाई के बिना भी अगर आपके पास एक बेहतरीन मोबाइल डेटा प्लान है।

आपको ऑनलाइन डाटा को एक ऑनलाइन अकाउंट से दूसरे ऑनलाइन अकाउंट ट्रांसफर करने के अपने कंप्यूटर या अकाउंट को लॉगिन करके नहीं रखना होता है। एक बार फाइल ट्रांफर प्रोसेस शुरू हो जाए फिर उसके बात आप अकाउंट को या कंप्यूटर को बंद कर सकते है बाकि सारा प्रोसेस ऑनलाइन अपने आप हो जाएगा।

अब, अपने डिवाइस से एक्सटरनल हार्ड ड्राइव पर डाटा ट्रांसफर करने की कोशिश करें।

इसके लिए कम से कम, आपको अपने फोन को अपने कंप्यूटर और अपने कंप्यूटर को अपनी एक्सटरनल हार्ड डिस्क से कनेक्ट करना होगा। इसमें बहुत सारे तार होते हैं और इसमें बैकअप के लिए आपको एक जगह पर रुकना होगा जब तक की फाइल ट्रांसफर ना हो जाए।

हार्ड ड्राइव में आप आसानी से चलते-फिरते अपने डाटा का बैकप नहीं कर सकते।

2. Security:

क्लाउड स्टोरेज के साथ सिक्योरिटी बहुत बड़ी समस्या हुआ करती थी, कुछ क्लाउड सर्विस प्रोवाइडरस यूजर को डेटा हैक होने से नहीं बचा पाते थे। जिसकी वजह से यूजर उनकी सर्विस इस्तेमाल करना बंद कर देता था।

ज़ाहिर सी बात है अगर आप किसी के यहाँ पर अपना डाटा स्टोर करते है और वो उसे चोरी होने से नहीं बचा सकता तो हर कोई उस कंपनी की सर्विस इस्तेमाल करना बंद कर देगा।

लेकिन कुछ ही समय में क्लाउड सर्विस प्रोवाइडरस ने अपनी सिक्योरिटी को पहले से मजबूत कर लिया है। कई क्लाउड सर्विस प्रोवाइडर अब अपने डेटा को सुरक्षित रखने के लिए 256-bit AES encryption का उपयोग करते हैं।

इनमें से कुछ सर्विस zero-knowledge encryption के द्वारा ओर भी आगे बढ़ी हैं जिसका मतलब है कि आपके पास केवल अपनी एन्क्रिप्शन कीय होनी चाहिए।

अगर हैकर को आपका डेटा अगर मिल भी जाए तब भी वो बिना एन्क्रिप्शन कीय के उसे अनलॉक नहीं कर पाएंगे (कहने का मतलब है की उसे समझ में नहीं आएगा की वो का चिज है)।

इस मामले में एक्सटरनल हार्ड डिस्क पर डेटा ज्यादा सुरक्षित रहेगा। एक्सटरनल हार्ड डिस्क जब तक यह आपके कंप्यूटर से कनेक्ट नहीं होगी हैकर आपकी हार्ड डिस्क को एक्सेस या हैक नहीं कर सकता।

हालाँकि, क्लाउड स्टोरेज की तुलना में हार्ड डिस्क की सुरक्षा बहुत कम होती हैं।

ज्यादातर एडवांस्ड हार्ड डिस्क ड्राइव में उनकी वारंटी पीरियड के समाप्त होने के बाद से ही समस्या आनी शुरू हो जाती है। जब ऐसा होता है, तो आपके डेटा को रिकवर करना महँगा या असंभव सा हो जाता है।

क्योंकि हार्ड डिस्क को आप सही तो करवा लेंगे लेकिन फिर उस डाटा को रिकवर करने के लिए आपसे भारी कीमत मांगी जाएगी।

वही क्लाउड स्टोरेज में आपके पास सर्विस प्रोवाइडर का सपोर्ट होता है। क्लाउड स्टोरेज में कोई भी समस्या आने पर आप सर्विस प्रोवाइडर (वेबसाइट के मालिक या उनकी टीम) को बोल सकते है, तो वो आपका डाटा रिकवर कर देंगे।

3. Sync Technology:

क्लाउड स्टोरेज का एक सबसे बड़ा फायदा यह है कि आप अपनी फ़ाइलों का हर समय बैकअप रख सकते हैं।

सिंक टेक्नोलॉजी आपके डिवाइस के बैकग्राउंड में चलती रहती है और अगर आपके डिवाइस में कोई भी नई या मॉडिफाइड फाइल है तो वो अपने आप आपके अकाउंट पर अपलोड हो जाती है।

अगर आप बैकअप लेना भूल भी जाते है तब भी आपकी फाइल ऑटो अपलोड हो जाती है। ये मोबाइल डिवाइस के लिए उपलब्ध है।

आप हार्ड डिस्क ड्राइव के लिए आटोमेटिक बैकअप सॉफ़्टवेयर का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन उसके लिए, आपकी हार्ड डिस्क को हर समय अपने कंप्यूटर या लैपटॉप से कनेक्ट करके रखना होगा।

4. Cost Per Quality:

कई लोगों का टारगेट केवल सबसे सस्ता बैकअप सलूशन ढूंढ़ना होता है। इसके लिए हार्ड ड्राइव सबसे अच्छा ऑप्शन मान सकते हैं क्योंकि Rs. 4000 – 5000 तक आपको 1TB (टेराबाइट) तक की बेहतर हार्ड डिस्क मिल जाती है।

जबकि, क्लाउड स्टोरेज के लिए अक्सर मंथली या इयरली सब्सक्रिप्शन की जरुरत होती है।

अब जरा सोच कर देखे की दोनों में पैसो के अंतर के अलाव और क्या मिल रहा है ओर क्या नहीं।

अगर एक्सटरनल हार्ड ड्राइव फ़ैल हो जाती है तो जब तक वारंटी है तब तक तो आप उसे ठीक करा लेंगे।

अगर वारंटी पीरियड के बाद कोई समस्या आती है तब उसे सही कराने के लिए आपको काफी ज्यादा पैसे देने होते है, जो की करीब करीब Rs. 2000 – 4000 तक या उससे ज्यादा भी हो सकती है।

लेकिन उसके बाद भी इसकी कोई गारंटी नहीं है की आपका डाटा रिकवर हो पाएगा या नहीं और गर रिकवर हो भी रहा हो तो कितना डाटा रिकवर होगा।

दूसरी ओर क्लाउड स्टोरेज के साथ, ऐसी कोई समस्या नहीं होती है। ज्यादातर कंपनिया के डाटा सेंटर दुनिया भर के कई अलग अलग श्रो में होते है। जिससे वो अलग अलग सर्वरों पर आपकी फ़ाइलों की कॉपी स्टोर कर देते हैं और अब कभी एक जगह के सर्वर में पप्रॉब्लम आती है तो वो आपको आपकी फाइल का एक्सेस दूसरे सर्वर से दे देते है।

साथ ही, यदि आप गलती से किसी फ़ाइल को हटा देते हैं, तो अपने डेटा को बचाने के लिए आपको फ़ाइल वर्जन और एडवांस्ड रिकवर ऑप्शन भी मिलते हैं। साथ ही फाइल डिलीट होने पर Trash/Delete फोल्डर में होती है जिससे आप उसे कभी भी रिस्टोर कर सकते है।

अगर आपके पास 200MB या उससे ज्यादा बड़ी कोई फाइल है तो में आपको यही सलाह दूंगा की ऐसी फाइलओ को एक्सटरनल हार्ड डिस्क में ही स्टोर करके रखे।

क्युकी इंडिया में हमारे पास इंटरनेट इतना नहीं होता की बड़ी फाइलओ को भी ऑनलाइन स्टोर करके रख सके। जितना आप फाइल को अपलोड और डाउनलोड करेंगे उतना ही आपका डाटा ख़तम होगा।

अगर फाइल्स या डाटा KB (kilobites) में या 200MB से कम है तो उस डाटा को चाहे तो ऑनलाइन स्टोर कर सकते है।

क्लाउड स्टोरेज के फायदे और नुकसान

क्लाउड स्टोरेज के फायदे

  • आप अपनी काम की सभी फाइलों को ऑनलाइन स्टोर कर सकते हैं और किसी भी फिजिकल डिवाइस को साथ ले जाने की जरुरत नहीं होती है और डिवाइस के कर्रप्ट या खोने या टूटने की चिंता भी नहीं करनी होगी।
  • अगर फाइल क्लाउड स्टोरेज पर है तो कभी भी, किसी भी समय, किसी भी डिवाइस जैसे लैपटॉप, डेस्कटॉप, मोबाइल या टैबलेट से इंटरनेट कनेक्शन के जरिये बड़ी ही आसानी से एक्सेस किया जा सकता है।
  • किसी भी तरह के हार्डवेयर या स्टोरेज डिवाइस को खरीदने की जरती नहीं होती है। आप अपनी जरुरत के अनुसार स्टोरेज स्पेस को बढ़ा या घटा सकते हो।
  • जितने स्टोरेज की आपको आवश्यकता है उतना ही पेमेंट करना होता है।
  • क्लाउड स्टोरेज सिस्टम डेटा को को सुरक्षित रखने के लिए एक्सेस करने के लिए यूजरनेम और पासवर्ड, डेटा एन्क्रिप्शन और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन जैसी ऑथेंटिकेशन प्रोसेस का उपयोग करते हैं।
  • इनकी मोबाइल और डेस्कटॉप एप्लिकेशन भी होती है, जिनकी मदद से आसानी से फाइलें अपलोड और डाउनलोड की जा सकती हैं।
  • लगभग सभी क्लाउड स्टोरेज में ऑटो सिंक ऑप्शन होता है जिसके मदद से अगर आपने फाइल में कुछ भी नया बदलाव किया होगा या कोई नई फ़ाइल होगी तो वो अपने आप ही सिंक (sync) होकर आपके क्लाउड बैकअप में अपलोड हो जाएगी। जिससे आपको बार बार अपलोड नहीं करना होगा।
  • किसी भी तरह का डाटा अपलोड कर सकते है और शेयर कर सकते है किसी के भी साथ। जैसे की फिल्मे, वीडियो, गाने, डाक्यूमेंट्स, या कोई दूसरा डाटा।

क्लाउड स्टोरेज के नुकसान

  • क्लाउड बैकअप इंटरनेट कनेक्शन पर निर्भर करता है। अगर इंटरनेट धीरे चल रहा है तो आपको स्टोरेज साइट को एक्सेस करने में दिक्कत आ सकती है।
  • अगर आप किसी ऐसी जगह पर है जहा इंटरनेट नहीं है तो आप फ़ाइलों को एक्सेस नहीं कर पाएंगे।
  • प्राइवेट या बिज़नेस डाटा ऑनलाइन स्टोर करने से डाटा के हैक होने का खतरा बना रहता है (जैसे कि रैंसमवेयर वायरस)। इंटरनेट पूरी तरह से सुरक्षित नहीं है, इसी वजह से हैकर द्वारा डाटा के चोरी होने का डर बना रहता है।
  • बड़ी फ़ाइलों या धीमी इंटरनेट कनेक्शन के कारण फ़ाइलों को अपलोड करने और रिस्टोर करने में बहुत समय लगता है।
  • फ्री स्टोरेज अकाउंट में कुछ लिमिटेशन होती है उन्हें हटाने के लिए या फुल एक्सेस करने के लिए इनका सब्सक्रिप्शन प्लान खरीदना पड़ता है जो की मंथली या इयरली होता है।
  • हार्ड डिस्क, पेनड्राइव, या किसी भी दूसरे डिवाइस के लिए आपको बस एक बार ही पेमेंट करनी होती है। जबकि इसमें हर महीने या हर साल पेमेंट करनी होती है।

इन सभी क्लाउड स्टोरेज वेबसाइट में जो मुझे सबसे ज्याद पसंद है वो ये की हम फाइल या फोल्डर को किसी के भी साथ ऑनलाइन शेयर कर सकते है और उन्हें उसका एक्सेस भी दे सकते है।

जिसके जरिये हमारे दोस्त, क्लासमेट, या कोई भी फाइल को देख या पढ़ सकता है। किसी भी तरह का डाटा या फाइल अपलोड और डाउनलोड कर सकते है।

लेकिन कुछ वेबसाइट ऐसी भी है जो केवल कुछ फिक्स फ़ॉर्मेट की फाइल को अपलोड करने देती है जैसे की इमेज, वीडियो फाइल, गाने, क्लाउड टोरेंट (जहाँ केवल टोरेंट फाइल ही अपलोड और डाउनलोड की जा सकती है), PDF इत्यादि।

हालाँकि, सभी क्लाउड स्टोरेज प्रोवाइडर ने ये बताया होता है की उनकी वेबसाइट पर किस तरह की फाइल आप अपलोड कर सकते है। उसका फॉर्मेट भी बताया होता है, वो कौन से फाइल फॉर्मेट को सपोर्ट करते है, ताकि आप फाइल उसी के हिसाब से अपलोड कर सके।

इन वेबसाइट पर फाइल को कई तरह से अपलोड किया जा सकता है। जैसे की कुछ वेबसाइट में केवल ब्राउज़र के जरिये ही अपलोड और डाउनलोड करने की सुविधा होती है।

कुछ वेबसाइट के खुद की एप्लीकेशन होती है, तो कुछ FTP के जरिये भी अपलोड और डाउनलोड करने का ऑप्शन देती है।

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Dharmendra Author on Web Janakari

मेरा नाम धर्मेंद्र मीणा है, मुझे तकनीक (कंप्यूटर, लैपटॉप, स्मार्टफोन्स, सॉफ्टवेयर, इंटरनेट, इत्यादि) से सम्बन्धी नया सीखा अच्छा लगता है। जो भी में सीखता हु वो मुझे दुसरो के साथ शेयर करना अच्छा लगता है। इस ब्लॉग को शुरू करने का मेरा मकसद जानकारी को ज्यादा से ज्यादा लोगो तक हिंदी में पहुंचना है।

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