हार्ड डिस्क क्या होती है? HDD, SSD और NVMe हार्ड ड्राइव में क्या अंतर है?

हार्ड डिस्क क्या है

हार्ड डिस्क ड्राइव को शार्ट में HDD भी कहते है, इसे हार्ड ड्राइव, हार्ड डिस्क, मैग्नेटिक हार्ड ड्राइव, मैकेनिकल हार्ड ड्राइव, फिक्स्ड ड्राइव, फिक्स्ड डिस्क और फिक्स्ड डिस्क ड्राइव के नाम से भी जाना जाता है। ये एक इलेक्ट्रोमैकेनिकल डेटा स्टोरेज डिवाइस है जो डिजिटल डाटा को स्टोर करता है और जरुरत पड़ने पर फिर से उस डाटा को हमें इस्तेमाल करने देता है।

आपकी जितनी भी फाइल कंप्यूटर में होती है वो सभी हार्ड डिस्क में ही स्टोर की जाती है, जैसे की ऑपरेटिंग सिस्टम की फाइल, सॉफ्टवेयर फाइल और फोल्डर, हार्डवेयर फाइल्स, ओर भी दूसरी कई फाइल या फोल्डर जिन्हे आप सेव करते है, वो सभी हार्ड डिस्क में ही स्टोर होते है।

हार्ड ड्राइव को कभी-कभी “C ड्राइव” के रूप में रीफर किया जाता है क्योंकि माइक्रोसॉफ्ट विंडोज, डिफ़ॉल्ट रूप से, कंप्यूटर में प्राइमरी हार्ड ड्राइव पर प्राइमरी पार्टीशन के लिए “C” ड्राइव लेटर को रीफर करती है।

हालांकि कुछ कंप्यूटरों में एक से ज्यादा हार्ड ड्राइव भी होती जिसे अलग अलग लेटर (जैसे, C, D, और E) में दिखाया जाता है।

चाहे किसी भी नाम से बोला जाए, प्राइमरी हार्ड ड्राइव (मुख्य हार्ड डिस्क) में आमतौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले ऑपरेटिंग सिस्टम का रूट फ़ोल्डर ही सेट होता है, जो ज्यादातर “C” ड्राइव होती है।

अगर सिंपल शब्दों में कहुँ, तो हम जो भी स्टोर करते है जैसे की गाने, मूवीज, डाक्यूमेंट्स, PDF फाइल, वीडियो, फोटो, इत्यादि आपके कंप्यूटर की हार्ड डिस्क में ही स्टोर होते है। यहाँ तक की इंटरनेट से जो आप डाउनलोड करते है वो भी आपकी हार्ड डिस्क ड्राइव में ही डाउनलोड होता है उस फाइल को आप काम में ले पते है।

ये कंप्यूटर का एक इम्पोर्टेन्ट हिस्सा है, अगर ये कंप्यूटर में न हो तो वो चालू ही नहीं होगा, तब आपका कंप्यूटर एक एरर दिखा देगा।

पहली हार्ड ड्राइव IBM के Reynold B. Johnson द्वारा डवलप की गई थी और 4 सितंबर, 1956 को IBM 350 डिस्क स्टोरेज यूनिट के नाम से लांच की थी, जिसका वजन करीब 350 किलो था।

IBM 350 RAMAC - सबसे पहली हार्ड डिस्क
IBM 350 RAMAC, जिसमे केवल 5Mb तक का डाटा ही स्टोर होता था। सबसे पहली हार्ड डिस्क।

हार्ड डिस्क फिजिकल डिस्क्रिप्शन

हार्ड डिस्क आमतौर पर एक पेपरबैक बुक के आकार की होती है, लेकिन फिर भी बहुत भारी होती है।

हार्ड डिस्क के किनारों में 3.5-इंच का छेद होता ताकि आसान से इसे कंप्यूटर या लैपटॉप में लगाया जा सके। हालाँकि, 2.5 इंच की छोटी हार्ड डिस्क और 5.25 इंच की बड़ी हार्ड डिस्क भी लगाई जाती है। लैपटॉप में अक्सर 2.5-इंच की छोटी हार्ड डिस्क या SSD का इस्तेमाल किया जाता हैं।

हार्ड डिस्क के दूसरे तरफ में केबल के लिए पोर्ट होते है जो हार्ड डिस्क को मदरबोर्ड से जोड़ते है। इसमें इस्तेमाल की जाने वाली केबल SATA या PATA होती है जो कि हार्ड डिस्क के प्रकार पर निर्भर करती है, वैसे तो ये केबल ज्यादातर हार्ड डिस्क के साथ ही आती है। अगर ये केबल खराब हो जाए या टूट जाए या दूसरी कोई प्रॉब्लम अति है तो मार्किट से नई केबल भी ले सकते है।

इसे चलाने के लिए जो पावर लगती है तो वो पावर केबल भी इसके साथ में ही आती है जिसे मदरबोर्ड में लगाते है और हार्ड डिस्क को पावर भी मदरबोर्ड से ही मिलती है।

ज्यादातर हार्ड डिस्क में बैक एंड पर जम्पर सेटिंग्स भी होती हैं जो ये बताता है की एक से ज्यादा ड्राइव होने पर मदरबोर्ड उसे कैसे पहचानेगा। ये सेटिंग्स हर हार्ड ड्राइव में अलग-अलग होती हैं, इसकी जानकारी के लिए आप अपने हार्ड ड्राइव निर्माता (Manufacturer) से संपर्क कर सकते।

हार्ड डिस्क कैसे काम करती है?

आपने विज्ञानं में पढ़ा ही होगा की अगर किसी मैगनेट से लोहे को घिसते है तो वो लोहा भी एक मैगनेट बन जाता है। तो कहने का मतलब ये है की मैग्नेटिस्म का इस्तेमाल जानकारी को स्टोर करने के लिए किया जाता है। हार्ड डिस्क में भी इनफार्मेशन या डाटा इस मैग्नेटिस्म के जरिए ही स्टोर होता है।

कंप्यूटर की हार्ड ड्राइव में, एक बड़ी चमकदार, गोलाकार “चुंबकीय प्लेट” होती है, जिसे प्लेटर (ये देखने में एक CD/DVD की जैसी ही दिखती है) कहा जाता है, जो अरबों छोटे एरिया में बटा हुआ होता है, जिसे हम सेक्टर कहते है।

Hard Disk Internal Parts In Hindi
एक नार्मल हार्ड डिस्क खोलने पर अंदर से ऐसी दिखती है।

हर एक सेक्टर इंडिपेंडली मैग्नेटाइज्ड या डिमैग्नेटाइज्ड किया जा सकता है। हमरा डाटा भी इन सेक्टर में ही स्टोर होता है। कंप्यूटर में सभी डाटा 0 और 1 की फॉर्म में स्टोर होता है।

मैग्नेटिस्म का इस्तेमाल कंप्यूटर स्टोरेज में किया जाता है क्योंकि ये जब बंद होता है तब भी जानकारी/डाटा को स्टोर करके रख सकता है।

प्लेटर हार्ड ड्राइव का इम्पोर्टेन्ट पार्ट होता है। ये कांच, सिरेमिक या एल्यूमीनियम जैसी ठोस मटेरियल से बने डिस्क होती हैं, जो मेटल की एक पतली लेयर के साथ कोटेड होती हैं जिसे डाटा को स्टोर करने के लिए मैग्नेटाइज्ड या डिमैग्नेटाइज्ड किया जा सकता है।

एक छोटी हार्ड ड्राइव में आमतौर पर केवल एक प्लेटर होता है, लेकिन इसमें हर एक साइड में मेग्नेटिक कोटिंग होती है। बड़ी ड्राइव में कई सारे प्लैटर्स होते है। ये प्लैटर्स 10,000 revolutions per minute (RPM) तक घूमते हैं ताकि पढ़ने-लिखने वाले हेड्स उनमें से किसी भी हिस्से तक आसानी से और जल्दी पहुंच सकें।

हर एक प्लेटर के लिए दो रीड-राइट हेड होते हैं, एक टॉप के हिस्से को पढ़ने के लिए और दूसरा नीचे के हिस्से को पढ़ने के लिए। इसलिए अगर किसी हार्ड ड्राइव जिसमें पांच प्लेटर्स हो तो उसे दस अलग-अलग रीड-राइट हेड की जरुरत होगी। इसलिए ज्यादा कैपेसिटी या ज्यादा डाटा स्टोर करने वाली हार्ड डिस्क अक्सर मोटी साइज की ही होती है और उतनी ही भरी भी होगी।

रीड-राइट हेड एक इलेक्ट्रिकल कंट्रोल आर्म पर लगे होते हैं जो ड्राइव के सेंटर से बाहर किनारे तक निकला होता हैं और फिर से वापस आ जाता हैं। किसी भी तरह की कोई टूट-फूट या डैमेज न हो उसके लिए हेड और प्लेट की बिच में एक दम बारीक़ गैप होता है। ये गैप एक बाल से भी बारीक़ होता है।

इसीलिए डाटा के हेड में लेज़र लगी होती है जिसके जरिए रीड और राइट किया जाता है। जिससे कि ये डिस्क खराब न हो। क्यूंकि हमरा हाथ लगने से या डिस्क में धूल जाने से वो ख़राब हो सकती है।

हार्ड डिस्क के प्रकार

दूसरे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की तरह ही हार्ड डिस्क ड्राइव भी समय के साथ विकसित हुई है। हार्ड ड्राइव कि क्षमता, आकार, इंटरनल स्ट्रक्चर, परफॉरमेंस, इंटरफ़ेस और डेटा स्टोर करने के तरीकों के काफी बदलाव हुआ है। इन्ही में से एक फ्लॉपी डिस्क भी है। चलिए इन बदलाव को और अच्छे से समझते है:

  • Parallel Advanced Technology Attachment (PATA)
  • Serial ATA (SATA)
  • Small Computer System Interface (SCSI)
  • Solid State Drives (SSD)
  • Non-Volatile Memory Express (NVMe)

1.Parallel Advanced Technology Attachment (PATA)

PATA हार्ड डिस्क हिंदी में
PATA हार्ड डिस्क कुछ इस तरह की दिखती है।

ये विकसित किए जाने वाले सबसे पहले प्रकार की हार्ड डिस्क ड्राइव थी। इसमें कंप्यूटर से जुड़ने के लिए Parallel ATA स्टैण्डर्ड इंटरफेस का इस्तेमाल किया था।

इस प्रकार कि ड्राइव को अक्सर हम इंटीग्रेटेड ड्राइव इलेक्ट्रॉनिक्स (IDE) और एन्हांस्ड इंटीग्रेटेड ड्राइव इलेक्ट्रॉनिक्स (EIDE) ड्राइव के नाम से भी जानते हैं।

PATA ड्राइव Western Digital (WD) और Compaq द्वारा 1986 में पेश कि गए थी। उन्होंने हार्ड ड्राइव को कंप्यूटर से जोड़ने के लिए एक कॉमन ड्राइव इंटरफ़ेस तकनीक बनाई थी।

इसमें डेटा ट्रांसफर करने की स्पीड 133MB/s तक जा सकती है और एक हार्ड ड्राइव से ज्यादा से ज्यादा 2 डिवाइस ही कनेक्ट किए जा सकते थे। ज्यादातर मदरबोर्ड में दो हार्ड डिस्क को कनेक्ट करने का ऑप्शन होता है, इस प्रकार कुल 4 EIDE डिवाइस को इंटरनली जोड़ा जा सकता था।

एक साथ डेटा को ट्रांसफर करने के लिए 40 या 80 तार की रिबन जैसी केबल का इस्तेमाल करते हैं। ये ड्राइव मैग्नेटिज्म के जरिए डेटा को स्टोर करते हैं। अगर एक भी वायर टूट जाए तो डाटा ट्रासंफर नहीं हो पाएगा।

2. Serial ATA Storage Drives (SATA)

SATA Hard Drive
SATA हार्ड डिस्क कुछ इस तरह की दिखती है।

इन हार्ड ड्राइव ने डेस्कटॉप और लैपटॉप कंप्यूटर में PATA ड्राइव की जगह ले ली है। दोनों के बीच मुख्य अंतर फिजिकल इंटरफेस का है।

सन 2000 में SATA को लांच किया गया था। इसमें कम केबल और कम खरचे में काम हो जाता है (40 या 80 के बजाय सात कंडक्टर लगते है), हाई सिग्नलिंग रेट जरिए डेटा ट्रांसफर स्पीड काफी तेज हो जाती है, और डाटा का I/O भी काफी फ़ास्ट होता है।

हालाँकि SATA और PATA दोनों का ही कंप्यूटर से कनेक्ट करने का तरीका एक जैसा ही है। इसमें SATA हार्ड डिस्क ड्राइव के कुछ फायदे हैं जैसे की SATA की स्टोरेज और डाटा ट्रांफर क्षमताएं PATA के मुकाबले काफी ज्यादा हैं और कीमतों में भी कम है।

हार्ड डिस्क ड्राइव को खरीदते समय, आपको इसकी स्टोरेज क्षमता और आपको कितना स्टोरेज चाहिए, ये ध्यान रखना होता है।

  • SATA ड्राइव सीरियल सिग्नलिंग तकनीक का इस्तेमाल करके PATA ड्राइव की तुलना में तेजी से डेटा ट्रांसफर करती है।
  • SATA केबल्स PATA केबल्स की तुलना में पतली और ज्यादा फ्लेक्सिबल होती हैं।
  • SATA के पास 1 मीटर की लम्बी केबल के साथ 7-पिन डेटा कनेक्शन होता है।
  • ये डिस्क बैंडविड्थ शेयर नहीं करती हैं क्योंकि कंप्यूटर मदरबोर्ड पर एक SATA कंट्रोलर चिप केवल एक डिस्क ड्राइव को ही देता है।
  • SATA कम बिजली की खपत करता हैं। PATA के लिए 5V की पावर की जरुरत पड़ती थी जबकि SATA में केवल 250 mV की जरूरत होती है।

3. Small Computer System Interface (SCSI)

ये काफी हद तक IDE हार्ड ड्राइव से मिलती-जुलती हैं लेकिन ये कंप्यूटर से जुड़ने के लिए छोटे कंप्यूटर सिस्टम इंटरफेस का उपयोग करते हैं।

SCSI कंप्यूटर और पेरीफरल डिवाइस के बीच डेटा को ट्रांसफर और फिजिकली जोड़ने के लिए एक स्टैण्डर्ड सेट है। ये स्टैण्डर्ड कमांड, प्रोटोकॉल, इलेक्ट्रिकल, ऑप्टिकल और लॉजिकल इंटरफेस को डिफाइन करते हैं।

SCSI ड्राइव इंटरनली या एक्सटर्नली जुड़े होते है। SCSI में जुड़े डिवाइस को काम ख़त्म होने पर बंद करना होता है। निचे इसके कुछ फायदे बताए गए हैं:

  • ये पहली वाली से भी ज्यादा तेज हैं।
  • ये काफी लम्बे समय तक चलती हैं।
  • इसे 24/7 ऑपरेट करने के लिए इस्तेमाल कर सकते है।
  • बड़ी मात्रा में डेटा स्टोर करने और ट्रांसफर करने के लिए काफी अच्छी है।

4. Solid State Drives (SSD)

Solid State Drive (SSD) - हार्ड डिस्क हिंदी में
SSD कुछ इस तरह की दिखती है।

ये हार्ड ड्राइव तकनीक में लेटेस्ट हैं। ये दूसरी सभी ड्राइव से पूरी तरह से अलग हैं, क्यूंकि इसमें किसी भी तरह का मूविंग पार्ट नहीं होता है। यानि की इसमें कोई भी रीड और राइट हेड या प्लेटर जैसी डिस्क नहीं होती है।

ये डेटा को स्टोर करने के लिए मैग्नेटिस्म का इस्तेमाल भी नहीं करती हैं। इसके बजाय, ये ड्राइव फ्लैश मेमोरी तकनीक का इस्तेमाल करती हैं। ये डेटा को परमानेंट स्टोर करने के लिए इंटीग्रेटेड सर्किट (IC) या सेमीकंडक्टर का इस्तेमाल करती हैं। ये डाटा को जब तक स्टोर करके रखती है जब तक आप उसे डिलीट ना करे।

फ्लैश बेस्ड SSD, फ्लैश मेमोरी 1980 में तोशिबा में Fujio Masuoka द्वारा बनाया गया था। पहली कमर्शियल फ्लैश बेस्ड SSD 1991 में सैनडिस्क द्वारा शिप किया गया था। ये PCMCIA कॉन्फ़िगरेशन के साथ में 20MB की SSD थी। हालाँकि अब ये काफी ज्यादा विकसित हो चुकी है।

5. Non-Volatile Memory Express (NVMe) Drive

NVMe - हार्ड डिस्क हिंदी में
NVMe कुछ इस तरह की दिखती है। Front
NVMe - हार्ड डिस्क हिंदी में
NVMe कुछ इस तरह की दिखती है। Back

नॉन-वोलेटाइल मेमोरी एक्सप्रेस (NVMe) 2013 में पेश किया गया जो एक स्टोरेज इंटरफ़ेस है। “नॉन-वोलेटाइल” का मतलब है कि जब कंप्यूटर रीबूट होता है या लाइट चली जाती है तब भी डेटा सुरक्षित रहता है।

इसमें “एक्सप्रेस” शब्द का मतलब है कि डेटा आपके कंप्यूटर के मदरबोर्ड पर PCI एक्सप्रेस (PCIe) इंटरफेस के जरिए ट्रेवल या ट्रांसफर हो रहा है।

ये अटैच की हुई डिस्क ड्राइव को मदरबोर्ड के साथ ज्यादा ओर डायरेक्ट कनेक्शन देता है या कनेक्ट करता है, ताकि डेटा को सीरियल एडवांस्ड टेक्नोलॉजी अटैचमेंट (SATA) कंट्रोलर से हो कर न जाना पड़े।

NVMe ड्राइव SATA, SSD और बाकि सभी ड्राइव की तुलना में बहुत ज्यादा तेज हैं। PCIe 3.0 जो कि PCI एक्सप्रेस स्टैण्डर्ड की लेटेस्ट जनरेशन है, हर एक लेन पर ज्यादा से ज्यादा 985 megabytes per second (Mbps) की स्पीड से डाटा ट्रांसफर होता है।

NVMe ड्राइव 4 PCIe lanes का इस्तेमाल करने में सक्षम हैं, जिसका मतलब है की थेओरिटिकल स्पीड 3.9 Gbps (3,940 Mbps) तक हो सकती है। NVMe ड्राइव कई अलग-अलग फॉर्म फैक्टर में आते हैं। m.2 स्टिक इनमें से सबसे कॉमन है।

ये 22 mm चौड़ा और 30, 42, 60, 80 या 100 mm लंबा हो सकता है। ये स्टिक्स जितनी पतली होती हैं इसीलिए मदरबोर्ड पर आसानी से लग जाती। ये छोटे कंप्यूटर और लैपटॉप के लिए एक दम सही है।

PCIe 3.0 फॉर्म फैक्टर GPU के जैसा ही है और ये आपके मदरबोर्ड पर किसी भी PCIe 3.0 स्लॉट में लग करता है। ये फुल साइज के ATX केस और मदरबोर्ड के लिए एक दम ठीक है। हालाँकि, ये सभी कंप्यूटर और लपटॉप पर लग पाना संभव नहीं है।

हालाँकि सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाने वाली हार्ड डिस्क SATA है जिसे हम HDD के नाम से भी जानते है उसके बाद दूसरी ज्यादा इस्तेमाल की जाने वाली SSD है तीसरे नंबर पर NVMe (जो बहुत ही कम इस्तेमाल की जाती है)।

HDD हमें काफी सस्ती मिल जाती है वही अगर SSD की बात करे तो वो HDD के मुकाबले थोड़ी महँगी आती है और NVMe अभी ज्यादा पॉपुलर नहीं है लेकिन ये SSD से ज्यादा फ़ास्ट और बेहतर है। लेकिन ये सभी लैपटॉप के लिए उब्लब्ध नहीं है और काफी ज्यादा महंगी होती है।

इंटरनल और एक्सटर्नल हार्ड डिस्क ड्राइव में क्या अंतर है?

इंटरनल हार्ड डिस्क: जैसा की नाम से ही पता चलता है की इंटरनल हार्ड डिस्क वो होती है जो कंप्यूटर या लैपटॉप के अंदर लगती है। ये CPU में लगी होती है। ये PATA, SATA, SCSI, SSD, और NVMe टाइप की होती है। अब जबकि ये कंप्यूटर के अंदर लगी होती है तो इसे खोलना और लेके जाना आसान नहीं होता है।

इंटरनल हार्ड डिस्क इस्तेमाल करने के फायदे:

  • इंटरनल हार्ड ड्राइव में डेटा ज्यादा कैपेसिटी में स्टोर होता है।
  • इंटरनल हार्ड ड्राइव हमेशा आपके कंप्यूटर से जुडी होती हैं। इसलिए, बैकअप लेना आसान हो जाता है, क्युकी बैकअप के लिए बार बार ड्राइव को लगाना नहीं पड़ता है।
  • चाहे लैपटॉप हो या डेस्कटॉप कंप्यूटर, इंटरनल ड्राइव दोनों में ही जरुरी होती है क्युकी बिना इंटरनल हार्ड ड्राइव के कोई भी कंप्यूटर नहीं चलेगा और ना हीं USB या एक्सटर्नल हार्ड ड्राइव काम करेगी।

हलांकि इंटरनल हार्ड डिस्क की कुछ कमियां भी है, जैसे की पोर्टेबल नहीं होती है और उन्हें फिक्स रखना होता है कंप्यूटर के अंदर, जब की एक्सटर्नल ड्राइव को कही भी लेकर जा सकते है। अगर इसे अपग्रेड करते है तो हर बार इनस्टॉल करना पड़ता है।

एक्सटर्नल हार्ड डिस्क: एक्सटर्नल हार्ड डिस्क वो होती है जो कंप्यूटर/लैपटॉप के बाहर लगती है जैसा की नाम से ही पता चलता है। एक्सटर्नल ड्राइव को हम आमतौर पर USB केबल के जरिए इस्तेमाल करते है और जिस पोर्ट में पेनड्राइव लगती है उसी पोर्ट में एक्सटर्नल ड्राइव USB केबल के जरिये लगाई जाती है।

ये दो ही टाइप की होती है HDD और SSD। अब जबकि ये कंप्यूटर के बाहर इस्तेमला होती है तो जहीर सी बात है की ये पोर्टेबल ड्राइव है और इसे आप खोल कर कही भी ले कर जा सकते है।

एक्सटर्नल हार्ड डिस्क इस्तेमाल करने के फायदे:

  • एक्सटर्नल हार्ड ड्राइव पोर्टेबल होती हैं। जिन लोगो को हर बार डाटा को एक जगह से दूसरी जगह पर ले कर जाना होता है ये उनके लिए बिल्कुल सही है, एक्सटर्नल हार्ड डिस्क को आसानी से एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा सकता है।
  • एक्सटर्नल हार्ड ड्राइव को किसी भी कंप्यूटरों से आसानी से जोड़ा जा सकता है।
  • एक्सटर्नल हार्ड ड्राइव को किसी भी तरह की इंस्टॉलेशन की जरुरत नहीं होती है।
  • एक्सटर्नल हार्ड ड्राइव कभी भी आसानी से कंप्यूटर या लैपटॉप से जोड़ या हटा सकते है।

हालाँकि एक्सटर्नल और इंटरनल ड्राइव दोनो लगभग एक सी ही होती है, लेकिन फिर भी दोनों के अपने फायदे है। आप चाहे डेस्कटॉप ले या लैपटॉप फिर भी आपको कंप्यूटर चलाने के लिए कम से कम एक इंटरनल हार्ड डिस्क तो चाइये ही होगी। 

अगर आपको अक्सर डाटा एक जगह से दूसरी जगह लेके जाना होता है तो आप एक्सटर्नल हार्ड ड्राइव का इस्तेमाल कर सकते है या अगर मुमकिन हो तो क्लाउड स्टोरेज का इस्तेमाल भी कर सकते है।

HDD, SSD और NVMe में क्या अंतर है?

HDD, SSD और NVMe हार्ड डिस्क में क्या अंतर है?

HDD (जिसे SATA के नाम से भी जाना जाता है), SSD और NVMe (ये सबसे नई प्रकार की ड्राइव है) ये 3 ड्राइव है जो आज के डोर दौर में इस्तेमाल की जाती है। आइए जानते है तीनो में क्या अंतर है और कौन सी हार्ड ड्राइव हमे अपने कंप्यूटर में इस्तेमाल करनी चाहिए:

HDDSSDNVMe
इसमें प्लेटर और हेड का इस्तेमाल करके डाटा को रीड और राइट किया जाता है।इसमें किसी भी तरह का कोई मूविंग पार्ट्स नहीं होते है। उसके बजाए IC और सेमीकंडक्टर का इस्तेमाल किया जाता है।इसमें किसी भी तरह का कोई मूविंग पार्ट्स नहीं होते है। उसके बजाए IC और सेमीकंडक्टर का इस्तेमाल किया जाता है।
इसकी रीड और राइट करने की स्पीड लगभग 130 MB/s तक होती है।इसकी रीड और राइट करने की स्पीड लगभग 500 MB/s – 2000 MB/s (2GB/s) तक होती है।इसकी रीड और राइट करने की स्पीड लगभग 3,500 MB/s – 32,000 MB/s (3.5 GB/s – 32 GB/s) तक होती है।
ये 1-2 सेकंड में ही डाटा को रीड और राइट कर सकती है। हालाँकि रीड और राइट करने की स्पीड आपके डिवाइस पर भी डिपेंड करेगी।ये 0.1 सेकंड में ही डाटा को रीड और राइट कर सकती है साथ ही ये HDD से काफी ज्यादा फ़ास्ट है।ये HDD और SSD के मुकाबले काफी ज्यादा तेज काम करती है। ये SSD से 6 गुना ज्यादा फ़ास्ट है। ये सबसे ज्यादा फ़ास्ट ड्राइव है।
ये काफी सस्ते में मिल जाती है।ये HDD के मुकाबले थोड़ी महँगी होती है।ये HDD और SSD से ज्यादा महँगी होती है। इसे आम लोग इस्तेमाल नहीं करते है।
अगर आपको 500GB – 12TB तक का डाटा स्टोर करना है तो HDD उसके लिए बिकुल सही ड्राइव है।अगर आपको 250GB – 4TB तक का डाटा स्टोर करना है तो SSD उसके लिए बिकुल सही ड्राइव है।अगर आपको 250GB – 2TB तक का डाटा स्टोर करना है तो NVMe उसके लिए बिकुल सही ड्राइव है।
कम पैसों में ज्यादा डाटा स्टोर करने के लिए ये एक बिलकुल सही ड्राइव है।2TB से 4TB तक का डाटा स्टोर करने और फ़ास्ट परफॉरमेंस के लिए ड्राइव बिलकुल सही है।फ़ास्ट परफॉरमेंस के साथ हाई-एंड वर्कस्टेशन या हाई एन्ड गेमिंग PC बिल्ड करने के लिए ड्राइव बिलकुल सही है।
ये लैपटॉप और डेस्कटॉप दोनों के लिए ही उपलब्ध है। साथ ही इसकी लाइफ बहुत की कम होती है।ये लैपटॉप और डेस्कटॉप दोनों के लिए ही उपलब्ध है। साथ ही इसकी लाइफ काफी लम्बी (10 साल से जयदा) होती है।ये केवल डेस्कटॉप PC के लिए ही उपलब्ध है। साथ ही इसकी लाइफ काफी लम्बी होती है।
ये डेस्कटॉप और नॉर्मल काम करने के लिए बिलकुल सही है।ये लैपटॉप और गेमिंग सिस्टम करने के लिए बिलकुल सही है।इसका इस्तेमाल सर्वर में ज्यादा किया जाता है।

1. HDD (Hard Disk Drive):

सबसे पहले बताना चाहता हूँ की SATA एक प्रकार की केबल होती है जिसका इस्तेमाल HDD ड्राइव में किया जाता है। इसीलिए अगर कही पर भी आपको SATA या HDD नाम दिखाए दे तो कंफ्यूज न हो, क्यूंकि दोनों एक ही ही। 

ये बहुत ही कॉमन हार्ड ड्राइव होती हैं, क्यूंकि ज्यादातर इसका इस्तेमाल कंप्यूटर और लैपटॉप में किया जाता है। HDD स्पिनिंग डिस्क (प्लेटर) के ऊपर लगे रीड/राइट हेड की मदद से डाटा को पढ़ता और उसे अपडेट करता है।

HDD स्पिनिंग डिस्क के टॉप पर पढ़ने/लिखने वाले हेड का इस्तेमाल करते हैं। ये अंदर से एक छोटा चमकदार विनाइल रिकॉर्ड प्लेयर जैसा दिखता है। ये ड्राइव बड़ी, भारी होती है और इसमें कई तरह की समस्याए होती हैं।

HDD की सबसे ज्यादा परेशान करने वाली प्रॉब्लम में से एक ये है कि वे समय के साथ “ख़राब” हो जाती हैं। ये डिस्क में डेटा के एक साथ झुण्ड में आने से ऐसा होता है जो sequence से ड्राइव पर नहीं लिख पता है।

जब नई ड्राइव पर बड़ी फाइलें राइट की जाती हैं, तो वे स्टोरेज डिवाइस में अच्छी तरह फिट हो जाती हैं। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता है, और अलग-अलग आकार की बहुत सारी फाइलें डिस्क पर लिखी और डिलीट की जाती हैं, तब वे सभी एक साथ अच्छी तरह से फिट नहीं होती हैं।

HDD उन सभी फ़ाइलों को एक्सेस कर सकती हैं जो सभी एक ही स्थान पर नहीं लिखी गई हैं (अलग अलग है)। हालाँकि, इसमें बस थोड़ा समय लगता है क्योंकि ड्राइव को थोड़ी देर के लिए घूमना पड़ता है। इसलिए HDD को समय-समय पर “डीफ्रैगमेंटेड” या “डी-फ्रैगेड” करने की जरुरत होती है ताकि ड्राइव सही से काम करती रहे।

2. SSD (Solid State Drive):

SSD डाटा को फ्लैश ड्राइव में स्टोर करती हैं जहां इसे आसानी से एक्सेस किया जा सकता है। पेनड्राइव में डाटा को स्टोर करने के लिए जिस तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है ये भी उस ही तकनीक का इस्तेमाल करती है जो डिवाइस के बंद होने पर डाटा को डिलीट नहीं होने देता है।

हार्ड डिस्क स्टोरेज अब और भी छोटे डिवाइस पर फ़िट होने के वजह से काफी तेज हो गई है। यही कारण है कि हाल के वर्षों में लैपटॉप इतने छोटे और हल्के हो गए हैं। ये HDD की तुलना में काफी छोटी, हलकी और फ़ास्ट होती है।

इसमें किसी भी तरह का मूविंग पार्ट नहीं होता है बल्कि डाटा स्टोर करने के लिए ये इंटीग्रेटेड सर्किट (IC) या सेमीकंडक्टर का इस्तेमाल करती है।

3. NVMe (Non-Volatile Memory Express):

नॉन-वोलेटाइल मेमोरी एक्सप्रेस (NVMe) भी एक प्रकार की SSD ही है जो एक मदरबोर्ड पर PCI एक्सप्रेस (PCIe) स्लॉट से जुडी होती है। ये स्लॉट खासतौर पर ग्राफिक्स कार्ड के लिए डिज़ाइन किए गए होते है, इसलिए ये सॉलिड स्टेट ड्राइव से भी ज्यादा फ़ास्ट होते हैं।

NVMe ड्राइव की स्पीड 3.5 Gb/s से 32 Gb/s तक हो सकती है। ये उन लोगो के लिए काम की है जो हाई ग्राफ़िक्स या एडिटिंग का काम करते है, जैसे गेमिंग या हाई-रिज़ॉल्यूशन, वीडियो एडिटिंग, इत्यादि। इस तरह की ड्राइव का इस्तेमाल कई बार सर्वर में भी किया जाता है।

NVMe जितनी ज्यादा फ़ास्ट है उतनी ही कुछ कमियां भी हैं। अभी में ये केवल डेस्कटॉप PC के लिए ही उपलब्ध हैं और बहुत महंगी आती हैं। साथ ही, इसका इस्तेमाल एक सेकेंडरी ड्राइव के रूप में ही करना होगा तभी आप इसकी पूरी क्षमता का इस्तेमाल कर पाए।

ज्यादातर BIOS अभी NVMe ड्राइव के जरिए बूटिंग को सपोर्ट नहीं करते हैं। इसलिए इसे प्राइमरी ड्राइव नहीं बनायी जा सकता है। हालाँकि, इसमें ऑपरेटिंग सिस्टम को इनस्टॉल करके बूट करना मुमकिन है, लेकिन इसके लिए आपके पूरा मदरबोर्ड को ही बदलना होगा।

हमें कंप्यूटर या लैपटॉप में कौन सी हार्ड डिस्क काम में लेनी चाहिए?

आपको हार्ड डिस्क ड्राइव चुनते समय कुछ बाते सोचनी होगी जैसे की तकनीक, क्षमता, बजट और किस काम के लिए चाहिए। नीचे कुछ दिशानिर्देश दिए गए हैं जो ये चुनने में आपकी मदद कर सकते हैं, जिसके अनुसार आप अपने अगला कंप्यूटर या लैपटॉप लेने की प्लानिंग कर सकते हैं।

SATA/HDD ड्राइव का इस्तेमाल कब करना चाहिए:

  • अगर आपको जायदा डाटा स्टोर करना पड़ता है।
  • अगर आप कम पैसे में हार्ड डिस्क चाहते है।
  • अगर सिंपल डाटा या फाइल स्टोर करने के लिए ही हार्ड डिस्क की जरुरत है।
  • अगर डेस्कटॉप के लिए हार्ड डिस्क चाहिए।

SSD ड्राइव का इस्तेमाल कब करना चाहिए:

  • अगर लटोप लेते है तो सॉलिड स्टेट ड्राइव सही रहेगी।
  • 2TB तक या 4TB तक के स्टोरेज में फ़ास्ट सलूशन या हार्ड डिस्क चाहते हो।
  • अगर बजट प्रॉब्लम नहीं है और पैसा ज्यादा लगा सकते हो।

NVMe ड्राइव का इस्तेमाल कब करना चाहिए:

  • अगर आप हाई-एंड वर्कस्टेशन या हाई एन्ड गेमिंग PC चाहते हो।
  • अगर बजट की कमी नहीं है और ज्यादा पैसा खर्चा कर सकते हो।
  • अगर आप एक सर्वर सेटअप कर रहे हो जिसका काम ज्यादातर डाटा या एप्लीकेशन को स्टोर करके उसे होस्ट करना हो।

SSHD ड्राइव क्या होती है?

अब आप सोच रहे होंगे की ये SSHD क्या है और बाकि सभी ड्राइव से कैसे अलग है। SSHD (Solid State Hybrid Drive) एक हाइब्रिड ड्राइव है जिसमे SSD और HDD दोनों ड्राइव को मिला कर बनाया गया है और Seagate सबसे पहले कंपनी है जिसने इसे बनाया है।

जैसा की SSD फ़ास्ट होने के साथ ही 2TB से 4TB तक का ही डाटा स्टोर कर पाती है। इससे ज्यादा कैपेसिटी की SSD अभी तक नहीं बनी है। वही HDD में आप डाटा 12TB तक स्टोर कर सकते हो। क्युकी एक नॉर्मल व्यक्ति को इससे ज्यादा की जरूरत नहीं होती है

इसी को ध्यान में रखते हुए Seagate कंपनी ने SSHD ड्राइव को बनाया है और इसे मार्किट में ज्यादा टाइम नहीं हुआ है। हालाँकि इसकी कीमत भी लगभग SSD जितनी ही है।

SSHD की कीमत Amazon या Flipkart या किसी भी दूसरी ecommerce साइट पर मिल जाएगी। अगर आप इसे खरीदना चाहते हो तो गूगल पर सर्च करे वह पर आप अलग अलग प्राइस में मिल जाएगी तो आप आने हिसाब से चुन सकते है, आपके लिए जो सही है।

कौन सी कंपनी की हार्ड डिस्क खरीदनी चाहिए?

काफी सारी कंपनी है जो हार्ड डिस्क बनती लेकिन किस पर भरोसा करे कौन सी कंपनी की ड्राइव ख़रीदे? ये सवाल हर उस सकस के मन में होता है जो हार्ड ड्राइव के बारे में जानता है।

अगर आप नया कंप्यूटर या लैपटॉप लेने की सोच रहे है तो निचे दी हुई लिस्ट में से किसी भी कंपनी की ड्राइव का इस्तेमाल कर सकते है। हालाँकि काफी साडी कंपनी है जो हार्ड डिस्क बनाती और बेचती है लेकिन मैंने केवल उन्ही कंपनी का जीकर किया है जो भरोसेमंद है और भारत में काफी लम्बे समय से व्यापार कर रही है।

हालाँकि इनके अलवा और भी कई कंपनी है जो हार्ड ड्राइव बेचती है। नीच हार्ड डिस्क ड्राइव बेचने वाली कुछ भरोसेमंद कंपनी की लिस्ट है:

  1. Western Digital (WD)
  2. Seagate
  3. Toshiba
  4. Lenovo
  5. Samsung
  6. Hewlett-Packard (HP)

अंत में बस यही कहूंगा की अगर कम पैसो में हार्ड डिस्क चाहते हो तो HDD एक दम सही है। HDD में लैपटॉप में अक्सर प्रॉब्लम आती है लेकिन डेस्कटॉप कंप्यूटर में ये काफी लम्बे समय तक चल जाती है। अगर ज्यादा डाटा को स्टोर करना चाहते है तब भी HDD ही सही ऑप्शन होगा।

अगर आपके पास काफी पैसे है तो में यही कहूंगा की SSD या SSHD ड्राइव का इस्तेमाल करे। ये लम्बे समय तक डाटा को सुरक्षित रखती है और ड्राइव के क्रैश होने या डाटा के कर्रप्ट कोई समस्या नहीं होती है। जब तक की कोई वायरस या मैलवेयर आपके कंप्यूटर में ना घुस जाए।

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Dharmendra Author on Web Janakari

मेरा नाम धर्मेंद्र मीणा है, मुझे तकनीक (कंप्यूटर, लैपटॉप, स्मार्टफोन्स, सॉफ्टवेयर, इंटरनेट, इत्यादि) से सम्बन्धी नया सीखा अच्छा लगता है। जो भी में सीखता हु वो मुझे दुसरो के साथ शेयर करना अच्छा लगता है। इस ब्लॉग को शुरू करने का मेरा मकसद जानकारी को ज्यादा से ज्यादा लोगो तक हिंदी में पहुंचना है।

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