लिनक्स क्या होता है? लिनक्स क्यों विंडोज से बेहतर है?

लिनक्स क्या होता है (Linux in Hindi)

लिनक्स भी बाकि ऑपरेटिंग सिस्टम जैसे माइक्रोसॉफ्ट विंडोज, ऐप्पल मैक OS, iOS, गूगल एंड्रॉइड इत्यादि की तरह एक ओपन-सोर्स ऑपरेटिंग सिस्टम है।

ऑपरेटिंग सिस्टम एक सॉफ्टवेयर है जो कंप्यूटर हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर के बीच कम्युनिकेशन बनाता है। ये प्रोसेसर के ज़रिये इनपुट देता है और इसका आउटपुट दिखाने के लिए हार्डवेयर इस्तेमाल करते है। ये ऑपरेटिंग सिस्टम का बेसिक फंक्शन है। हालाँकि ये कई दूसरे इम्पोर्टेन्ट काम भी करता है।

90 के दशक के मध्य से Linux हमारे बिच में आया। इसे कलाई घड़ी से लेकर सुपर कंप्यूटर तक इस्तेमाल किया जा सकता है। ये हमारे फोन, लैपटॉप, कंप्यूटर, कारों और यहां तक कि रेफ्रिजरेटर में भी हर जगह है। ये डेवलपर्स और नार्मल कंप्यूटर यूजर के बीच बहुत पॉपुलर है।

Linux की सबसे अच्छी बात ये ही की इसे किसी भी कंप्यूटर या डिवाइस में आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है। हालाँकि इसकी इंस्टालेशन प्रोसेस थोड़ी से पेचीदा है।

लिनक्स का इतिहास

पहले के दिनों में कंप्यूटर घरों या कमरे जितने बड़े होते थे। तो आप अंदाजा लगा सकते हैं कि इन्हें ऑपरेट करना कितना मुश्किल होता था। इसके अलावा, हर कंप्यूटर का एक अलग ऑपरेटिंग सिस्टम होता था, जिससे उन पर काम करने के लिए अलग से सीखना होता है। हर एक सॉफ्टवेयर एक स्पेशल पर्पस के लिए डिजाइन किया जाता था और वो दूसरे कंप्यूटर पर काम नहीं कर पाता था। ये काफी महंगा होता था और आम लोग इसे खरीद नहीं सकते थे और न ही समझ सकते थे।

1969 में बेल लैब्स के डवलपर्स की एक टीम ने सभी कंप्यूटरों के लिए एक कॉमन सॉफ्टवेयर बनाने के लिए एक प्रोजेक्ट शुरू किया और इसे ‘Unix’ नाम दिया गया। ये सरल और दिखने में अच्छा था, assembly language के बजाय ‘C’ language का इस्तेमाल किया गया था और इसके कोड को फिर से इस्तेमाल किया जा सकता था।

जबकि इसके फिर से इस्तेमाल किया जा सकता था, इसके कोड का एक हिस्सा जिसे अब आमतौर पर ‘kernel’ कहा जाता है, का उपयोग ऑपरेटिंग सिस्टम और दूसरे कामो को डवलप करने के लिए किया जाता था और इसे अलग अलग सिस्टम पर इस्तेमाल किया जा सकता था। साथ ही इसका सोर्स कोड ओपन सोर्स था।

शुरू में, Unix केवल सरकार, विश्वविद्यालयों, या मेनफ्रेम और मिनीकंप्यूटर (PC एक माइक्रो कंप्यूटर है) के साथ बड़े फाइनेंसियल आर्गेनाइजेशन में इस्तेमाल किया जाता था।

अस्सी के दशक में, IBM, HP जैसी कई दूसरी बड़ी कंपनियों ने अपना खुद का Unix बनाना शुरू कर दिया था। इसका परिणाम ये रहा की यूनिक्स में गड़बड़ी आने लगी। फिर 1983 में, Richard Stallman ने GNU प्रोजेक्ट को इस टारगेट के साथ विकसित किया कि इसे Unix जैसे ऑपरेटिंग सिस्टम को मुफ्त में उपलब्ध कराया जा सके और सभी इसका इस्तेमाल कर सके। लेकिन उनका ये प्रोजेक्ट ज्यादा पॉपुलर नहीं हो पाया। कई दूसरी यूनिक्स जैसे ऑपरेटिंग सिस्टम अस्तित्व में आए लेकिन उनमें से कोई भी पॉपुलर नहीं हो पाए थे।

1991 में, फिनलैंड के Helsinki यूनिवर्सिटी में एक छात्र Linus Torvalds ने सोचा कि यूनिक्स का एक फ्री अकेडमिक वर्जन उपलब्ध कराया जाए और अपना कोड लिखना शुरू कर दिया। बाद में ये प्रोजेक्ट Linux Kernel बन गया। उन्होंने ये प्रोग्राम स्पेशली अपने कंप्यूटर के लिए लिखा था क्योंकि वो यूनिक्स 386 इंटेल कंप्यूटर का इस्तेमाल करना चाहते था लेकिन वो इसे खरीद पाने में असमर्थ था। उसने इसे GNU C compiler का इस्तेमाल करके MINIX पर किया। GNU C compiler अभी भी लिनक्स कोड में मुख्य रूप से इस्तेमाल किया जाता है लेकिन साथ में दूसरे कंपाइलर का भी इस्तेमाल किया जाता हैं।

इसे केवल मजे के लिए ही शुरू किया गया था। पहले इसे ‘Freaks’ नाम देना चाहा था लेकिन बाद में ये ‘Linux’ हो गया।

Linus Torvalds ने अपना खुद का लाइसेंस लेके Linux kernel को पब्लिश किया और बिज़नेस में इसका इस्तेमाल करने के लिए मन कर दिया था। 1992 में, GNU जनरल पब्लिक लाइसेंस को जारी किया, जो आम लोगो के लिए था।

आज, सुपर कंप्यूटर, स्मार्टफोन, डेस्कटॉप, वेब सर्वर, टैबलेट, लैपटॉप और होम एप्लायंसेज डिवाइस जैसे वाशिंग मशीन, DVD प्लेयर, राउटर, मोडम, कार, रेफ्रिजरेटर इत्यादि में लिनक्स OS का ही इस्तेमाल किया जाता हैं।

अगर सिंपल तरीके से बताऊ तो Linux OS को 1991 में Linus Torvalds द्वारा विकसित किया गया था, जो UNIX OS को बेहतर बनाने की सोच से सामने आया। Linus Torvalds ने Unix को बेहतर करने का सुझाव दिया लेकिन UNIX डिजाइनरों ने इस मानने से माना कर दिया गया। इसलिए, Linus Torvalds ने एक OS लॉन्च करने के बारे में सोचा, जिसे इस तरह से डिज़ाइन किया गया था कि कोई सा भी यूजर उसे अपने अनुसार मॉडिफाई कर सके।

आजकल, लिनक्स सबसे तेजी से बढ़ने वाला OS है। इसका उपयोग फोन से लेकर सुपर कंप्यूटर तक लगभग सभी मुख्य हार्डवेयर डिवाइस में किया जाता है।

लिनक्स का इस्तेमाल क्यों करें?

Linux सिस्टम के बारे में सबसे ज्यादा पूछे जाने वाले सवालो में से एक है। अगर हमारे पास विंडोज जैसा सिंपल ऑपरेटिंग सिस्टम है तो हम एक अलग और थोड़ा जटिल ऑपरेटिंग सिस्टम का इस्तेमाल क्यों करते हैं?

लिनक्स में कई अलग अलग फीचर हैं जो इसे पूरी तरह से अलग बनाती हैं और ये सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाने वाले ऑपरेटिंग सिस्टम में से एक हैं। अगर आप वायरस, मालवेयर, सिस्टम का धीरे चलना, सिस्टम का क्रैश होना, और भी इसी तरह की समस्या से छुटकारा पाना चाहते हैं तो लिनक्स एक दम सही ऑपरेटिंग सिस्टम है।

इसके अलावा, लिनक्स इस्तेमाल करने के ओर भी कई फायदे है और हमें इसके लिए पेमेंट भी नहीं करि होती है, क्युकी ये बिलकुल फ्री है। आइए नजर डालते हैं इसके कुछ खास फीचर्स पर:

1. फ्री और ओपन सोर्स ऑपरेटिंग सिस्टम हैं

ज्यादातर OS कमपाइलड फॉर्मेट में आते हैं जिसे एक प्रोग्राम चलता है जिसे कंपाइलर कहा जाता है जो सोर्स कोड को उस भाषा में बदलता है जो कंप्यूटर के समझ में आती है। इस कमपाइलड कोड को मॉडिफाई करना काफी कठिन काम है।

दूसरी ओर, ओपन-सोर्स पूरी तरह से अलग है। ओपन-सोर्स में सोर्स कोड कमपाइलड वर्जन के साथ शामिल होता है और जिनको इसकी जानकारी है वो इसे अपने अनुसार मॉडिफाई कर सकते है। ये हमें प्रोग्राम चलाने की आज़ादी देता है, हमारे इस्तेमाल के हिसाब से कोड बदलने की आज़ादी देता है, मॉडिफाई करके इसकी कॉपियों को फिर से डिस्ट्रीब्यूट करने की आज़ादी देता है।

शार्ट में, लिनक्स एक ऑपरेटिंग सिस्टम है जो “लोगों के लिए, लोगों द्वारा बनाया गया है”।

हम बिना किसी कीमत के लिनक्स का इस्तेमाल कर सकते हैं। हम इसे बिना किसी कीमत के कई मशीनों पर इनस्टॉल कर सकते हैं।

2. सुरक्षित है

लिनक्स अलग अलग सुरक्षा ऑप्शन को सपोर्ट करती है जो आपको वायरस, मालवेयर, सिस्टम का धीरे चलना, सिस्टम का क्रैश, सिस्टम का हैंग होना जैसी कई प्रॉब्लम से बचाता है।

इसके अलावा, ये आपके डेटा को सुरक्षित रखता। इसकी सुरक्षा ही मुख्य कारण है कि ये डेवलपर्स के लिए सबसे ज्यादा पसंदीदा है। ये पूरी तरह से सुरक्षित नहीं है, लेकिन ये दूसरे OS की तुलना में ज्यादा सुरक्षित है।

विंडोज में कई सरे वायरस और दूसरी फाइल अपने आप चालू हो जाती बिना एडमिन के परमिशन के लेकिन लिनक्स में हर एक एप्लिकेशन को चलाने के लिए एडमिन की परस्मिशन चाइये होती है। जब तक एडमिन सिस्टम का पासवर्ड नहीं डालेगा, तब तक कोई वायरस या प्रोग्राम एक्सीक्यूट नहीं हो पाएगा।

लिनक्स सिस्टम को किसी एंटीवायरस प्रोग्राम की आवश्यकता नहीं होती है।

3. डवलपर्स के लिए पसंदीदा ऑप्शन है

लिनक्स डवलपर्स के लिए सूटेबल है, क्योंकि यह लगभग सभी पॉपुलर प्रोग्रामिंग लैंग्वेज जैसे कि C/C++, Java, Python, Ruby, ओर भी कई दूसरी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज को समर्थन करती है। इसके अलावा, ये डवलपमेन्ट के लिए इस्तेमाल की जाने वाली कई एप्लीकेशन की सुविधा देता है।

डवलपर्स के लिए लिनक्स की टर्मिनल विंडोज कमांड लाइन से काफी बेहतर है, इसलिए, वे विंडोज कमांड लाइन के बजाए लिनक्स टर्मिनल को ज्यादा पसंद करते हैं।

4. फ्लेक्सिबल ऑपरेटिंग सिस्टम है

लिनक्स एक फ्लेक्सिबल OS है, क्योंकि इसका इस्तेमाल डेस्कटॉप/लैपटॉप, एम्बेडेड सिस्टम और सर्वर के लिए किया जा सकता है। इसे कलाई घड़ी से लेकर सुपर कंप्यूटर तक इस्तेमाल किया जा सकता है। ये हमारे फोन, लैपटॉप, PC, कारों और यहां तक कि रेफ्रिजरेटर में भी हर जगह है। इसके अलावा, यह कई तरह के customization हम कर सकते है।

Linux Distributions

इसे Linux Distro के नाम से भी जाना जाता है। कई एजेंसियों ने लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम को मॉडिफाई किया और अपना खुद का लिनक्स डिस्ट्रीब्यूशन बनाया। बाजार में कई लिनक्स डिस्ट्रीब्यूशन उपलब्ध हैं। ये यूजर को लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम का अलग अलग इंटरफ़ेस देता है। हम अपनी जरूरत के अनुसार कोई भी डिस्ट्रीब्यूशन चुन सकते हैं। कुछ लोकप्रिय डिस्ट्रोस Ubuntu, Fedora, Debian, Linux Mint, Arch Linux हैं इनके अलावा और भी कई लिनक्स डिस्ट्रीब्यूशन हैं।

बिगिनर्स के लिए, Ubuntu और Linux Mint उपयोगी माना जाता है और डवलपर के लिए, Debian और Fedora एक अच्छा ऑप्शन होगा। लगभग छह सौ लिनक्स डिस्ट्रीब्यूशन अलग अलग सुविधाएँ के साथ आते हैं। यहां, हम आज कुछ लोकप्रिय लिनक्स डिस्ट्रोस के बारे में जानेगे:

1. Ubuntu

ubuntu Linux
ubuntu Linux

ये 2004 में Canonical द्वारा लांच किया गया और जल्दी ही काफी पॉपुलर हो गया। कैननिकल चाहता था कि उबंटू को कमांड लाइन के बिना इस्तेमाल किया जाए ग्राफिकल लिनक्स डेस्कटॉप के ज़रिये। ये काफी ज्यादा फेमस लिनक्स है। उबंटू Debian का अगला वर्जन है और बिगिनर के लिए इसका इस्तेमाल करना काफी आसान है। इसमें पहले से ही काफी सारे एप्प इनस्टॉल आते है और आसानी से इस्तेमाल की जाने वाली रिपॉजिटरी लाइब्रेरी के साथ आता है।

पहले, उबंटू GNOME2 डेस्कटॉप एनवायरनमेंट का इस्तेमाल करता था लेकिन अब इसने अपना खुद का unity desktop environment बना लिया है। ये हर छह महीने में रिलीज होता है और अब टैबलेट और स्मार्टफोन पर के लिए उबंटू को बनाने में काम कर रहा है।

2. Linux Mint

Linux Mint
Linux Mint

लिनक्स मिंट उबंटू पर बेस्ड है और उबंटू के रिपॉजिटरी सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करता है इसलिए कुछ पैकेज दोनों में आम हैं।

पहले ये उबंटू का एक अल्टरनेटिव था क्योंकि media codecs और proprietary software मिंट में शामिल हैं लेकिन उबंटू में नहीं थे। लेकिन अब इसका इस्तेमाल लिनक्स मिंट के cinnamon और mate वर्जन में किया जाता है। लिनक्स मिंट भी 3 वर्जन में आता है और ये विंडोज की तरह ही दीखता है।

अगर आप विंडोज जैसा ही लिनक्स चाहते है तो लिनक्स मिंट बिलकुल सही ऑप्शन है।

3. Debian

Debian का 1993 में लांच किया गया था और इसके वर्जन उबंटू और मिंट की तुलना में बहुत धीरे-धीरे आते है। इसे सबसे स्टेबल लिनक्स डिस्टीब्यूटर में से एक माना जाता है।

उबंटू डेबियन पर बेस्ड है और डेबियन के कोर bits को ओर ज्यादा तेज़ी से बेहतर और इसे ज्यादा यूजर फ्रेंडली बनाने के लिए लांच किया गया था।

4. Red Hat Enterprise

Red Hat
Red Hat

Red Hat एक कमर्शियल लिनक्स डिस्ट्रीब्यूशन है। उनके प्रोडक्ट Red Hat Enterprise Linux (RHEL) और Fedora हैं जो फ्री में उपलब्ध हैं। रिलीज से पहले RHEL का अच्छी तरह से टेस्ट किया गया है और रिलीज के बाद सात साल तक सपोर्ट मिलता है, जबकि फेडोरा बिना किसी सपोर्ट के जल्दी अपडेट देता है।

5. Fedora

Fedora Linux
Fedora Linux

ये एक ऐसा प्रोजेक्ट है जो मुख्य रूप से मुफ्त सॉफ्टवेयर पर फोकस करता है और सॉफ्टवेयर का लेटेस्ट वर्जन देता है। ये अपना खुद का डेस्कटॉप एनवायरनमेंट नहीं बनाता है लेकिन ‘अपस्ट्रीम’ सॉफ़्टवेयर का इस्तेमाल करता है। डिफ़ॉल्ट रूप से, इसमें GNOME3 डेस्कटॉप एनवायरनमेंट होता है। ये कम स्टेबल है लेकिन लेटेस्ट कंटेंट देता है।

डिस्ट्रीब्यूशनक्यों इस्तेमाल करे
Ubuntuये Mac OS की तरह ही दिखती और काम करती है और इस्तेमाल करने भी में आसान है। जो लिनक्स में नए है उनके लिए ये सही है।
Linux Mintये दिखने में और काम करने में विंडोज़ की तरह ही है और नए लोगों के लिए बिलकुल सही है। जो लिनक्स अभी सिख रहे है या सीखना चाहते है उनके लिए ये एक दम सही है।
Debianयह स्टेबल तो है लेकिन नए यूजर के समझ में नहीं आएगी। ये प्रफेशनल और डवलपर के लिए बिलकुल सही है।
Fedoraअगर आप फ्री और लेटेस्ट सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो ये बिलकुल सही OS है।
Red Hat Enterpriseकमर्शियल या ऑफिस इस्तेमाल के लिए बनाई है।
CentOSअगर आप Red Hat का इस्तेमाल करना चाहते हैं लेकिन बिना किसी कॉपीराइट की प्रॉब्लम के तो ये बिलकुल सही OS है।
OpenSUSEये फेडोरा की तरह ही काम करती है लेकिन थोड़ा पुराना और ज्यादा स्टेबल है।
Arch Linuxये बिगिनर के लिए नहीं है क्योंकि हर एक पैकेज को खुद इनस्टॉल करना होता है।

लिनक्स का इस्तेमाल कैसे करें?

हम एक ग्राफ़िक यूजर इंटरफेस (GUI) के साथ-साथ टर्मिनल (कमांड लाइन इंटरफेस) से भी लिनक्स का इस्तेमाल कर सकते हैं। सभी लिनक्स में अलग अलग यूजर इंटरफेस होता है लेकिन लगभग सभी की कमांड लगभग एक ही होती और एक जैसा ही काम करती है। टर्मिनल से Linux चलाने के लिए, “CTRL+ALT+T” दबाएँ।

लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम का स्ट्रक्चर

ऑपरेटिंग सिस्टम कई सॉफ्टवेयर का कलेक्शन है, जिसमे हर एक सॉफ्टवेयर को स्पेशल काम के लिए बनाया गया है। लिनक्स OS में ये कॉम्पोनेन्ट हैं:

1. Kernel

लिनक्स kernel ऑपरेटिंग सिस्टम का मुख्य पार्ट है। ये डिवाइस (हार्डवेयर) और सॉफ्टवेयर को आपस में जोड़ कर रखता है। इसके अलावा, ये सिस्टम रिसोर्सेज को मैनेज करता है। जैसे की:

  • Device Management: एक सिस्टम में कई डिवाइस जुड़े होते हैं जैसे कि CPU, मेमोरी डिवाइस, साउंड कार्ड, ग्राफिक कार्ड इत्यादि। एक kernel डिवाइस ड्राइवर में सभी डिवाइस से रिलेटेड सभी डेटा को स्टोर करता है (इसके बिना kernel डिवाइस को कंट्रोल नहीं कर पाएगा)। इस तरह से kernel ये जान पाता है कि एक डिवाइस क्या कर सकता है और कैसे उसका सही तरीके से इस्तेमाल करना है। ये सभी डिवाइस को आपस में जोड़ कर भी रखता है। kernel के कुछ नियम हैं जो सभी डिवाइसो को मानना होता है।
  • Memory Management: दूसरा काम है जिसे kernel को मैनेज करना होता है और वो है मेमोरी मैनेजमेंट। kernel इस्तमाल की गई और इस्तेमाल नहीं की गई मेमोरी का ट्रैक करता रहता है और ध्यान रखता है की सभी प्रोसेस आपस में एक दूसरे के काम में दखल न दे।
  • Process Management: इस प्रोसेस में, kernel पर्याप्त समय देता है और CPU को जब उसे पहला प्रोसेस ख़तम कर लेता है तब उसे दूसरा प्रोसेस सँभालने के लिए दिया जाता है। ये सुरक्षा और ओनरशिप की जानकारी को भी संभालता है।

2. System Libraries

सिस्टम लाइब्रेरी स्पेशल प्रोग्राम हैं जो kernel के फीचर को एक्सेस करने में मदद करती हैं। किसी भी काम को करने के लिए kernel को ट्रिगर करना पड़ता है, और ये ट्रिगरिंग एप्लीकेशन के ज़रिये किया जाता है। प्रोग्रामर्स ने kernel के साथ कम्यूनिकेट करने के लिए स्टैण्डर्ड लाइब्रेरी का प्रोसीजर डवलप किया है। हर एक ऑपरेटिंग सिस्टम इन स्टैंडर्ड को सपोर्ट करता है, और फिर इन्हें उस ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए सिस्टम कॉल में ट्रांसफर कर दिया जाता है। Linux के लिए सबसे जानी मानी सिस्टम लाइब्रेरी Glibc (GNU C लाइब्रेरी) है।

3. System Tools

लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम में यूटिलिटी टूल्स का एक सेट होता है, जो आमतौर पर सिंपल कमांड होते हैं। ये एक सॉफ्टवेयर है जिसे GNU प्रोजेक्ट ने अपने ओपन सोर्स लाइसेंस के तहत लिखा और पब्लिश किया है ताकि सॉफ्टवेयर सभी के लिए फी में उपलब्ध हो सके।

इन कमांड की मदद से, आप अपनी फाइलों और डायरेक्टरी को एक्सेस, एडिट, और उसमे बदलाव कर सकते हैं, फाइलों एक जगह से दूसरी जगह पर मूव, या अपडेट कर सकते हैं।

4. Development Tools

ऊपर तीन कम्पोनेंट के साथ, आपका OS चल रहा है और काम कर रहा है। लेकिन अपने सिस्टम को अपडेट करने के लिए, आपके पास एडिशनल टूल और लाइब्रेरी हैं। ये एडिशनल टूल और लाइब्रेरी प्रोग्रामर के ज़रिये लिखे गए हैं और उसे toolchain कहाँ जाता हैं। Toolchain एक इम्पोर्टेन्ट डवलपमेंट टूल है जिसका इस्तेमाल डेवलपर्स के ज़रिये एप्लिकेशन बनाने के लिए किया जाता है।

Linux और Unix में क्या अंतर है?

आज लिनक्स की काफी डिमांड है। Linux का इस्तेमाल आप हर जगह देख सकते हैं। ये हमारे सर्वर, डेस्कटॉप, स्मार्टफोन मिल जाता है और यहां तक कि रेफ्रिजरेटर, वाशिंग मशीन जैसे कई डिवाइस में मिल जाएगा।

कई लोग को यूनिक्स और लिनक्स को एक ही लगते हैं, लेकिन ये सच नहीं है। कई ऑपरेटिंग सिस्टम यूनिक्स की तरह डवलप किए गए थे लेकिन उनमें से किसी को भी लिनक्स जितनी लोकप्रियता नहीं मिली।

लिनक्स यूनिक्स का ही क्लोन है। इसमें यूनिक्स के जैसी ही कई फीचर हैं, फिर भी दोनों में काफी अंतर हैं। लिनक्स और विंडोज से पहले, कंप्यूटर की दुनिया में यूनिक्स का ही राज था। यूनिक्स एक कॉपीराइट नाम है और IBM AIX, HP-UX और Sun Solaris ही केवल यूनिक्स ऑपरेटिंग सिस्टम हैं जो आज तक बने हुए हैं।

LinuxUnix
ये एक ओपन-सोर्स ऑपरेटिंग सिस्टम है जो सभी के लिए फ्री में उपलब्ध है।ये एक ऑपरेटिंग सिस्टम है जिसका इस्तेमाल केवल इसके कॉपीराइटर ही कर सकते हैं।
इसमें उबंटू, रेडहैट, फेडोरा, लिनक्स मिंट इत्यादि जैसे कई अलग-अलग डिस्ट्रो हैं।इसमें IBM AIX, HP-UX और Sun Solaris ही एक मात्र ऑपरेटिंग सिस्टम है।
आज के समय में Linux की काफी डिमांड है और कोई भी व्यक्ति लिनक्स का इस्तेमाल कर सकता है फिर चाहे वो होम यूजर, डवलपर या एक पड़ने वाला स्टूडेंट हो।इसे मुख्य रूप से सर्वर, वर्कस्टेशन और मेनफ्रेम के लिए बनाया गया था।
लिनक्स को फ्री में डिस्ट्रीब्यूट, डाउनलोड और री-डिस्ट्रीब्यूट किया जा सकता है।यूनिक्स ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए इसके कॉपीराइट वेंडर अलग-अलग प्राइस तय करते हैं और फ्री में भी नहीं मिलती है।
जैसा की ओपन सोर्स है, इसलिए दुनिया भर में डवलपर्स इसके कोड को शेयर करके डवलप करते है।यूनिक्स को AT&T Labs, अलग अलग कमर्शियल वेंडर और नॉन-प्रॉफिट आर्गेनाइजेशन के लिए विकसित किया है, इसलिए ये फ्री नहीं है और इसको इस्तेमाल करने का पैसा देना होता है।
लिनक्स kernel दुनिया के अलग अलग हिस्सों से डवलपर्स की कम्युनिटी के ज़रिये डवलप किया जाता है। हालांकि लिनक्स के फादर, Linus Torvalds सब तरह की देखरेख करते हैं।यूनिक्स के तीन डिस्ट्रीब्यूशन है जो की IBM AIX, HP-UX और Sun Solaris हैं। OSX ऑपरेटिंग सिस्टम बनाने के लिए Apple यूनिक्स का भी इस्तेमाल करता है।
लिनक्स कमांड बेस्ड है लेकिन कुछ डिस्ट्रो GUI बेस्ड लिनक्स भी देते हैं। Gnome और KDE ज्यादातर GUI का इस्तेमाल करते हैं।शुरुआत में ये कमांड बेस्ड OS था, लेकिन बाद में कॉमन डेस्कटॉप एनवायरनमेंट बनाया गया। ज्यादतर यूनिक्स डिस्ट्रीब्यूशन Gnome का इस्तेमाल करते हैं।
डिफ़ॉल्ट इंटरफ़ेस BASH (Born Again SHell) है। लेकिन कुछ डिस्ट्रो ने अपने खुद के इंटरफेस विकसित कर लिए हैं।ये मुख्य रूप से Bourne Shell का इस्तेमाल करता था। लेकिन दूसरे GUI के साथ भी कम्पेटिबल है।
ये यूनिक्स की तुलना में ज्यादा फाइल सिस्टम को सपोर्ट करता है।ये भी फाइल सिस्टम को सपोर्ट करता है लेकिन लिनक्स से कम।
लिनक्स यूनिक्स का ही क्लोन है, यूनिक्स की तरह ही काम करता है लेकिन इसमें Unix का कोई कोड नहीं है।यूनिक्स में AT&T Labs के ज़रिये डवलप किया गया एक तरह से अलग कोडिंग है।
लिनक्स केवल एक kernel है।यूनिक्स एक पूरा ऑपरेटिंग सिस्टम है।
इसके सुरक्षा काफी ज्यादा टाइट है। लिनक्स में अब तक लगभग 60 से100 वायरस ही बने हैं। लिनक्स वायरस और मैलवेयर की लिस्टयूनिक्स की सुरक्षा भी काफी ज्यादा टाइट है। इसमें अब तक लगभग 85-120 वायरस ही बने हैं।
जैसा कि लिनक्स ओपन-सोर्स है, तो जब भी कोई यूजर किसी भी तरह का प्रॉब्लम पोस्ट करता है, तो दुनिया भर के लिनक्स डवलपर्स उस पर काम करना शुरू कर देते हैं और इसलिए लिनक्स का तेज़ समाधान मिल जाता है।यूनिक्स में, यूजर को समस्या के समाधान के लिए कुछ समय इंतजार करना पड़ता है।

लिनक्स क्यों विंडोज से बेहतर है?

आइये जानते है की क्यों लिनक्स विंडोज से बेहतर है और लिनक्स के क्या फायदे है जो विंडोज में हमे नहीं मिलते:

1. ओपन सोर्स है

Windows सिस्टम का इस्तेमाल करने के लिए आपको उसे खरीदना होता है। हालाँकि, लिनक्स पूरी तरह से एक ओपन-सोर्स है और इसीलिए ये फ्री उपलब्ध हो जाता है।

2. सुरक्षित है

विंडोज OS पर कई अलग अलग प्रकार के हमले या हैक्स आसानी से किया जा सकता है। हालाँकि, लिनक्स को हैक करना या किसी तरह का हमला करना आसान नहीं है। लेकिन इसका ये मतलब भी नहीं है कि इसे हैक किया नहीं जा सकता, लेकिन ये काफी ज्यादा सुरक्षित है।

जब आप विंडोज़ इनस्टॉल करते हो, तो आपको अपने कंप्यूटर को हैकर्स, मैलवेयर और वायरस से बचाने के लिए एक एंटीवायरस प्रोग्राम डाउनलोड या खरीदना होता है। हालाँकि, Linux को ऐसे एंटीवायरस प्रोग्राम की जरूरत नहीं है। बेशक, आपके लिनक्स सिस्टम को खतरों से बचाने के लिए कुछ सॉफ़्टवेयर टूल अभी भी मौजूद हैं, लेकिन जब आपके पास Linux सिस्टम होता है तो यह अक्सर इन टूल की जरुरत नहीं होती है।

तो यहाँ पर आपके एंटीवायरस के पैसे बचते है।

3. किसी भी कंप्यूटर में इस्तेमाल किया जा सकता है

जैसे-जैसे हार्डवेयर डवलप होते है वैसे-वैसे ऑपरेटिंग सिस्टम या दूसरे सभी सॉफ्टवेयर को भी उसी के अनुसार बनाया जाता है। जिससे वो पुराने हार्डवेयर पर ठीक से काम नहीं कर पाते है। आप में से कई लोगो ने विंडोज में परेशानी झाली होंगी।

उदाहरण के लिए, अगर आप विंडोज 10 खरीदते हैं, तो आपको इसे थी से चलाने के लिए minimum hardware requirements को पूरा करना होता है और आप इसे किसी भी लो-एंड सिस्टम पर नहीं चला सकते। लो-एंड सिस्टम या तो क्रैश हो जाएगा या ठीक से काम नहीं करेगा।

लिनक्स के साथ ऐसा नहीं है आप किसी भी कंप्यूटर में आसानी से इसका इस्तेमाल कर सकते है अपने सबसे पुराने कंप्यूटर सिस्टम में भी। हालांकि, इसका मतलब ये नहीं है कि हर लिनक्स पुराने कंप्यूटर में काम करेगी अगर 256 MB की RAM होगा तो लिनक्स उसमे काम नहीं करेगी।

4. प्रोग्रामर या डवलपर के लिए ये एक दम सही है

लिनक्स लगभग सभी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज ​​(Python, C/C++, Java, Perl, Ruby, इत्यादि) को सपोर्ट करती है। इसके अलावा, ये प्रोग्रामिंग के लिए काफी ज्यादा और उपयोगी एप्लीकेशन उपलब्ध कराती है। इसी वजह से ये प्रोग्रामर्स इसे ज्यादा पसंद करते है।

5. सॉफ्टवेयर अपडेट

Microsoft सॉफ़्टवेयर अपडेट के लिए तब बताता है जब वो उसने कोई प्रॉब्लम सही कर दी हो या अगर कुछ नया फंक्शन उसने जोड़ा हो और इसी कारण से आपको सिस्टम अपडेट होने तक इंतजार करना पड़ता है जब तक की वो अपडेट नहीं हो जाता।

हालाँकि, लिनक्स के साथ ऐसा नहीं है, जब आप सॉफ्टवेयर अपडेट कर रहे होंगे तो सिस्टम हर छोटी बग को चेक करेगा और इससे आपका सिस्टम क्रैश नहीं होगा अगर आप LTS वर्जन का इस्तेमाल करते है।

यानी की जो समस्या आपको विंडोज में आती है वो लिनक्स में नहीं आएगी। यहाँ तक की ये आपको विंडोज की तरह बार बार सिस्टम अपडेट करने के लिए नोटिफिकेशन भी नहीं दिखाएगा और ना ही विंडोज की तरह अपने आप सिस्टम को अपडेट करना शुरू करेगा।

ये कोई भी काम बिना आपकी परमिशन के नहीं करेगा।

6. कस्टमइजेशन

विंडोज के बजाय लिनक्स का इस्तेमाल करने का एक बड़ा फायदा कस्टमइजेशन है। अगर आप अपने सिस्टम के लुक्स को बदलना चाहते हैं, तो लिनक्स आपके लिए बिल्कुल सही प्लेटफार्म है। विंडोज में आपको कस्टमइजेशन के नाम पर बस कलर और टास्कबार को सिफत करने का ही ऑप्टिन मिलेगा।

लिनक्स में थीम इंस्टॉल करने के अलावा, आपके पास ढ़ेरों सुंदर आइकन थीम भी हैं। इसके अलावा, आप डेस्कटॉप पर सिस्टम की जानकारी को अपने तरीके से दिखने के लिए Conky का इस्तेमाल कर सकते हैं। यहाँ तक कि आप लिनक्स में वॉलपेपर में भी काफी बदलाव कर सकते है।

7. अलग अलग डिस्ट्रीब्यूशन उपलब्ध है

विंडोज़ के कोई अलग डिस्ट्रो नहीं हैं। हां, आपके पास अलग-अलग प्लान और पैकेज हो सकते हैं जो लाइसेंस की शर्तों, एक्टिवेशन का पीरियड, पैकेज की गई सुविधाओं और कीमत में अलग हो सकते हैं।

इसके अलावा, आपको अलग अलग प्रकार के ढ़ेरों लिनक्स डिस्ट्रीब्यूशन मिलेंगे, जरुरत के हिसाब से। इसलिए, आप अपनी जरूरत के अनुसार किसी भी उपलब्ध लिनक्स डिस्ट्रो को इनस्टॉल कर सकते हैं।

उदाहरण के लिए, हैकर्स के लिए Kali लिनक्स डिस्ट्रो का इस्तेमाल सबसे ज्यादा करते हैं, प्रोग्रामर भी लिनक्स का इस्तेमाल सबसे ज्यादा करते हैं, बहुत ज्यादा पुराने कंप्यूटरों के लिए लिनक्स काफी सभी OS हैं। लिनक्स सभी के लिए परफेक्ट है।

8. फ्री में इस्तेमाल कर सकते है

लिनक्स सभी के लिए मुफ्त में उपलब्ध है! हालाँकि, विंडोज़ के के लिए उसे खरीदना होता है!

लिनक्स डिस्ट्रो (जैसे उबंटू, फेडोरा, लिनक्स मिंट, इत्यादि) के लिए आपको पैसे नहीं देने होते। ये पूरी तरह से मुफ़्त है क्यूंकि ये ओपन सोर्स है और कभी इनको इनकी ऑफिसियल वेबसाइट से डाउनलोड कर सकते है।

9. बेहतर कम्युनिटी सपोर्ट है

अगर Linux में कभी कोई प्रॉब्लम आती है तो उसे ठीक करने के लिए आपको अलग से किसी एक्सपर्ट की जरूरत नहीं होगी। आपको समाधान गूगल या दूसरे सर्च इंजन पर सर्च करने से मिल जाएगा या फिर हर लिनक्स की अपनी कम्युनिटी होती है वहाँ पर प्रॉब्लम को पोस्ट करना होगा, फिर उस लिनक्स के एक्सपर्ट और यूजर अपने आप आपको उसका सलूशन बता देंगे।

किसी भी लिनक्स के फ़ोरम पर प्रॉब्लम पोस्ट करने के कुछ ही मिनटों के अंदर, आपको अपनी प्रॉब्लम का सलूशन डिटेल में मिल जाएगा जिस के लिए आपको कोई भी पैसा देने की जरुआत नहीं है। बल्कि फोरम पर अपनी समस्या को सर्च भी कर सकते है अगर पहले किसी ने उस प्रॉब्लम के बारे में पोस्ट किया होगा तो आपका समय भी बच जाएगा और प्रॉब्लम का हल भी मिल जाएगा।

बहुत सारे एक्टिव लिनक्स यूजर हैं जो प्रॉब्लम का जवाब देने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं जो। ऐसे कम्युनिटी पर एक्टिव यूजर ज्यादा मिलेंगे बजाए विंडोज़ कम्युनिटी के।

10. विश्वसनीयता

विंडोज़, जैसा कि हम जानते हैं, काफी ज्यादा हैवी होती जा रही है। जब आप विंडोज सिस्टम क्रैश या धीरे चलने लगता हैं, तो आप थोड़ी देर बाद विंडोज को फिर से इंस्टॉल करते है या रीस्टार्ट करते।

अगर आप लिनक्स का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो आपको इसे बार बार इनस्टॉल करने की या रीस्टार्ट की जरुरत नहीं पड़ेगी। Linux आपके सिस्टम को लंबे समय तक अचे से चलता है।

इसके अलावा, विंडोज के साथ, आपको एक आदत अलग जाती जहां आप लगभग हर चीज के लिए सिस्टम को रिबूट करते रहते हैं।

  • अगर आपने अभी-अभी सॉफ़्टवेयर इनस्टॉल किया है, तो रीबूट करें!
  • अगर आपने हाल ही में सॉफ़्टवेयर की अनइनस्टॉल किया है, तो रीबूट करें!
  • अगर आपने अभी-अभी Windows अपडेट इनस्टॉल किया है, तो रीबूट करें!
  • अगर सिस्टम धीमा चल रहा है, तो रिबूट करें!

हालांकि, लिनक्स में, आपको ऊपर बताई गई सिचुएशन किसी में भी सिस्टम को रिबूट नहीं करना पड़ेगा। आप आराम से अपना काम जारी रख सकते हैं, और Linux में आपको किसी भी तरह परेशान नहीं होगी।

एक ओर फैक्ट जो लिनक्स को विश्वसनीय बनाता है, वो है वेब सर्वर। आप देख सकते हैं कि Google और Facebook जैसे ज्यादार बड़ी इंटरनेट कंपनीया भी Linux सर्वर पर ही चल रही हैं। यहां तक ​​कि लगभग सभी सुपर कंप्यूटर लिनक्स पर चलते हैं।

लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि लिनक्स में कभी कोई समस्या नहीं आती है। अगर आप अपने कंप्यूटर के लिए किसी भी लिनक्स डिस्ट्रीब्यूशन को आजमाने जाहते हैं, तो आप लिनक्स मिंट या उबुन्टु का इस्तेमाल कर सकते है।

लेकिन लिनक्स को इनस्टॉल करने का प्रोसेस विंडोज से थोड़ा अलग है। इसलिए आपको पहले लिनक्स को इनस्टॉल कैसे करना या ये सीखना होगा।

क्या आपको भी लगता है कि लिनक्स विंडोज से बेहतर है?

अब जब आप विंडोज के बजाय लिनक्स का इस्तेमाल करने के फायदे जानते हैं, तो आप क्या सोचते हैं?

अगर आप अभी भी विंडोज़ को अपने प्राइमरी OS के रूप में इस्तामल करते है, तो क्या आप इसे लिनक्स में बदलने के बारे में सोच रहे हैं? अगर आपने पहले ही स्विच कर लिया है, और लिनक्स का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो आपको उसमे क्या फायदे दिखाई दिए?

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Dharmendra Author on Web Janakari

मेरा नाम धर्मेंद्र मीणा है, मुझे तकनीक (कंप्यूटर, लैपटॉप, स्मार्टफोन्स, सॉफ्टवेयर, इंटरनेट, इत्यादि) से सम्बन्धी नया सीखा अच्छा लगता है। जो भी में सीखता हु वो मुझे दुसरो के साथ शेयर करना अच्छा लगता है। इस ब्लॉग को शुरू करने का मेरा मकसद जानकारी को ज्यादा से ज्यादा लोगो तक हिंदी में पहुंचना है।

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