प्रॉक्सी सर्वर क्या होता है और कैसे काम करता है?

प्रॉक्सी सर्वर हिंदी में (Proxy Server in Hindi)

प्रॉक्सी सर्वर या प्रॉक्सी साइट दोनों एक ही है कोई प्रॉक्सी सर्वर कहता है तो कोई प्रॉक्सी साइट।

इंटरनेट पर बहुत सारी अजीबो गरीब चीजे है और उनमे से हमे रोजाना कुछ न कुछ मिल ही जाता है। जो कभी काम का होता है तो कभी नहीं होता।

लेकिन जब भी हम किसी गलत वेबसाइट पर चले जाते है तो हमारा IP एड्रेस उस वेबसाइट को पता चल जाता है और अगर वो साइट सुरक्षित नहीं है तो आप पर निगरानी रख सकती।

आपके कंप्यूटर की कोई सी भी प्राइवेट फाइल को देख या उसे चुरा सकती है या फिर आपके कंप्यूटर में किसी भी तरह का वायरस दाल सकती है।

आप अपना काम कर रहे होंगे और आपको पता भी नहीं चलेगा की कब आपकी फाइल चोरी हो गई या वायरस आगया। ऐसी कई सारी वेबसाइट है जो देखने में तो सिंपल और आकर्सक दिखती है। लेकिन कई बार जब हम उस वेबसाइट को खोलते है और बड़ी आराम से अपना काम कर लेते है।

उस समय तो हमारा काम हो जाता है। लेकिन बाद उन साइट के जो ट्रैकर और कूकीज जो हमारे सिस्टम में आ जाती जिसका हमे पता भी नहीं होता है।

क्या अपने कभी सोचा है की इनसे बचने के लिए हमे क्या करना होगा? या फिर कैसे अपने आप को इस वेबसाइट पर जाने से रोके? 

घबराइए मत अगर आपको नहीं पता की जिस वेबसाइट को इस्तेमाल आप कर रहे है वो सुरक्षित है या नहीं। तो प्रॉक्सी सर्वर या VPN (वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क) का इस्तेमाल कर सकते है।

आइए आज के इस आर्टिकल में हम प्रॉक्सी सर्वर के बारे में जानते है कि कैसे प्रॉक्सी सर्वर हमे इस तरह की वेबसाइट से बचता है।

प्रॉक्सी सर्वर क्या होता है?

प्रॉक्सी का मतलब होता है किसी ओर का प्रतिनिधित्व (represent) करना। प्रॉक्सी सर्वर एक सर्वर एप्लिकेशन, टूल या एक सिस्टम हो सकता है। ये आपके और इंटरनेट के बिच में एक एजेंट या मध्यस्थ (intermediary) का काम करता है।

जब कोई कंप्यूटर इंटरनेट से जुड़ता है, तो वह एक IP एड्रेस का उपयोग करता है। प्रॉक्सी सर्वर भी इंटरनेट पर एक कंप्यूटर ही होता है जिसका अपना एक IP एड्रेस होता है।

प्रॉक्सी सर्वर आपके IP एड्रेस को अपने IP एड्रेस के पीछे छुपा लेता है जिससे आपकी असल लोकेशन का पता लगाना लगभग असंभव सा हो जाता है।

आइए इसे और अच्छे से समझते है।

प्रॉक्सी सर्वर कैसे काम करता है?

प्रत्येक कंप्यूटर जो इंटरनेट से जुड़ा होता है, उन सभी कंप्यूटरों में एक यूनिक IP एड्रेस होता है। यह IP एड्रेस आपके कंप्यूटर का एड्रेस होता है। जिस तरह कूरियर कंपनी या पोस्ट ऑफिस को पता होता है कि आपके पार्सल को आपके एड्रेस पर कैसे पहुंचाया जाए। उसी तरह से सही कंप्यूटर तक सही डेटा उसके IP एड्रेस द्वारा ही पहुंचाया जा सकता है।

प्रॉक्सी सर्वर के बिना (Without Proxy Server)
इस चित्र में प्रॉक्सी सर्वर का इस्तेमाल नहीं किया है। इस चित्र में क्लाइंट डायरेक्ट मुख्य सर्वर से जुड़ रहा है।

जैसा कि ऊपर के चित्र में बताया गया है कि जब भी हम किसी सर्वर को रिक्यूएस्ट करते है तो उससे डायरेक्ट कनेक्ट हो जाते है। जब हम किसी फाइल के लिए सर्वर को रिक्यूएस्ट करते है तो वो सर्वर उस फाइल को सर्च करता है और फिर उस क्लाइंट (हम) को जवाब में वो फाइल भेज देता है। सर्वर के बारे में और अधिक जानने के लिए आप हमारा आर्टिकल पढ़ सकते है, सर्वर क्या है और कैसे काम करता है

प्रॉक्सी सर्वर भी एक कंप्यूटर ही होता है जो इंटरनेट से जुड़ा होता है और जिसका खुद का IP एड्रेस होता है, जिसे आपका कंप्यूटर जनता है। 

प्रॉक्सी सर्वर के साथ (With Proxy Server)
इस चित्र में प्रॉक्सी सर्वर का इस्तेमाल किया गया है। इस चित्र में क्लाइंट पहले प्रॉक्सी सर्वर पे जाता है और फिर मुख्य सर्वर से जुड़ रहा है।

दूसरे चित्र के अनुसार, जब भी कोई क्लाइंट या इंटरनेट यूजर रिक्यूएस्ट भेजता है, तो वह पहले प्रॉक्सी सर्वर पर जाती है, फिर प्रॉक्सी सर्वर से वेबसाइट के सर्वर पर और वेबसाइट सर्वर भी क्लाइंट को डायरेक्ट डेटा नहीं भेजता है। उसी तरह, वेबसाइट सर्वर पहले डेटा को प्रॉक्सी सर्वर को भेजेगा, फिर प्रॉक्सी सर्वर उस डेटा (वेब ​​पेज या फ़ाइल) को क्लाइंट (हमें) के ब्राउज़र पर भेजता है। डेटा उसी क्रम में जाता है जिस क्रम में मिला था।

उदारहरण के लिए, अगर आप फेसबुक पे कोई फोटो को देखना चाहते है। तो उसके अपने ब्राउज़र पर www.facebook.com वेबसाइट को खोलेगा और उस पर फोटो को देखने के लिए फेसबुक के सर्वर को रिक्यूएस्ट भेजेंगा और फेसबुक सर्वर उसी क्रम में उस फोटो को ढूंढ कर वापिस भेज देगा आपके ब्राउज़र पर।

अब अगर फेसबुक आपके देश, शर, स्कूल, कॉलेज या ऑफिस में ब्लॉक है तो फिर आप प्रॉक्सी सर्वर का इस्तेमाल कर सकते है। सबसे पहले आप प्रॉक्सी सर्वर को अपने ब्राउज़र पर खोलेंगे फिर उस पर www.facebook.com को खोलेंगे फिर वो प्रॉक्सी सर्वर आपकी रिक्यूएस्ट को फेसबुक सर्वर पर भेजेगा उसके बाद फेसबुक सर्वर आपकी रिक्यूएस्ट को ढूंढ कर प्रॉक्सी सर्वर पर भेज देगा और प्रॉक्सी सर्वर उसे हमारे ब्राउज़र पर दिखा देगा।

इस तरह से आपको जो भी देखना होता है उस वेबसाइट का सर्वर आपको दिखा देता है, आपकी की गई रिक्यूएस्ट के अनुसार। तो ये था पूरा प्रोसेस आशा करता हु की आपको ये समझ में आगया होगा।

अब आप सोच रहे होंगे की प्रॉक्सी सर्वर से हमे क्या फायदा? आखिर हम इसका इस्तेमाल क्यों करे? ये भला हमारे किस काम का? तो आइए इस बारे में भी जान लेते है।

प्रॉक्सी सर्वर का इस्तेमाल कब और क्यों करना चाहिए?

  • ब्लॉक की गई वेबसाइटों का इस्तेमाल करने के लिए: कई बार स्कूल, कॉलेज, ISP और सरकारों द्वारा कुछ कंटेंट या वेबसाइटों को ब्लॉक कर दिया जाता है जिन्हे प्रॉक्सी सर्वर (प्रॉक्सी साइट) की मदद से हम अनलॉक करके देख और काम में ले सकते है।
  • IP एड्रेस को छुपाने के लिए: यह क्लाइंट और सर्वर (वेबसाइट) के बीच एक मध्यस्थ (intermediary) का काम करती है। इसलिए, ISP, सरकार और वेबसाइट को हमारे असल IP एड्रेस का पता नहीं चल पाता है, क्युकि प्रॉक्सी साइट हमारे असल IP एड्रेस को छुपा कर अपना IP एड्रेस दिखती है, जिससे अगर कोई हमे ट्रैक भी करता है तो उसे हमारी नकली IP एड्रेस ही दिखती है जो की प्रॉक्सी साइट का होता है।
  • कैशिंग: प्रॉक्सी आपके द्वारा देखे गए सभी वेब पेजों का कैश बना कर रखती हैं। अगर आप उसी पृष्ठ को फिर से देखने की रिक्यूएस्ट करते है, तो प्रॉक्सी सर्वर इसका कैश वर्शन दिखाता है। जिससे वो पेज तेजी से लोड होता है और प्रॉक्सी को बार बार सर्वर पर रिक्यूएस्ट नहीं करनी पड़ती उस कंटेंट के लिए।
  • गुमनाम हो कर सर्फ करने के लिए: IP एड्रेस छुपने से आप बिना किसी को अपनी पहचा बताए आसानी से इंटरनेट पर सर्फिंग कर सकते है। जैसा की ऊपर बतया है की ये आपकी असल IP एड्रेस को छुपा देता है और अपना IP दिखता है।
  • हैक होने से बचने के लिए: कभी-कभी हम गलती से कुछ गलत या अविश्वसनीय वेबसाइटों में प्रवेश कर जाते हैं। जिससे उस वेबसाइट का होंनेर या हैकर हमारे सिस्टम को ट्रैक या फिर हैक कर लेते हैं उसके बाद हैकर गलत या अवैध उद्देश्य के लिए हमारे सिस्टम का उपयोग कर सकता है। जिससे हमारी पर्सनल जानकारी लीक हो सकती हैं। प्रॉक्सी सर्वर हमारी इन्ही सब जानकारी को सुरक्षित और छिपाकर रखता है।
  • हमें मलिसियस हमले से बचाता है: जैसा कि कोई भी हमारे IP एड्रेस को नहीं जान पता है, इसीलिए हमारे सिस्टम में कोई मलिसियस (Malicious) हम्ला करना आसान नहीं होता है। इसीलिए हम वायरस, मलिसियस, keylogger, आदि से सुरक्षित रहते हैं।
  • कंटेनट फ़िल्टरिंग: आप किसी ब्लॉक वेबसाइट को अनलॉक करने के लिए प्रॉक्सी का उपयोग कर सकते हैं और यदि आप किसी कंपनी में हैं, तो आप अपने नेटवर्क में काम करने वाले लोगों के लिए कुछ वेबसाइटों की सीमा निर्धारित कर सकते हैं। जिससे उस कंपनी में केवल वो वेबसाइट काम में ली जा सकती है जिनकी अनुमति दी हुई है, बाकी को ब्लॉक किया जा सकता है।

प्रॉक्सी सर्वर कैसे हमारे डाटा और कंप्यूटर प्राइवेसी को सुरक्षित रखता है?

प्रॉक्सी साइट के कई सारे सर्वर अलग अलग देश में होते है जैसे की संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन, सिंगापुर, लंदन, लॉस एंजिल्स, आदि। कई बार एक ही देश में अलग अलग सिटी के हिसाब से भी होते है।

जब आप कोई वेबसाइट किसी प्रॉक्सी साइट के जरिये खोलते है। तो होता ये है कि, आप उस प्रॉक्सी साइट का सर्वर इस्तेमाल कर के वेबसाइट को ओपन करते हो। जब प्रॉक्सी सर्वर का इस्तेमाल करके फेसबुक, डार्क वेब, इत्यादि जैसी कोई वेबसाइट  खोलते हो तब आपको उस प्रॉक्सी के किसी एक सर्वर से जुड़ जाते हो जो किसी दूसरे देश में होता है।

जिससे आपके ISP, सरकार, या कोई भी जो आपको ट्रैक करना चाहता है उसे यही लगेगा की आप दूसरे देख की किसी वेबसाइट पर कोई काम कर रहे है।

लेकिन आप उस सर्वर का इस्तेमाल करके फेसबुक, यूट्यूब, या ऐसी कोई सी भी वेबसाइट जो आपके देश या ऑफिस में ब्लॉक की हुई होती है उसका इस्तेमाल कर सकते है। इससे आपके एडमिन, ISP, या फिर सरकार को पता भी नहीं चलेगा की आप क्या कर रहे है।

आपको बस किसी भी एक प्रॉक्सी वेबसाइट को ओपन करना है और दी हुई सर्च बार में उस वेबसाइट का URL टाइप करके एंटर करना है। उसके बाद फिर आप उस ब्लॉक वेबसाइट के कंटेंट को आसानी से इस्तेमाल कर सकते है।

जब आप प्रॉक्सी साइट के जरिये सर्फ कर रहे होते हो तो आपका असल IP एड्रेस नहीं जाता बल्कि उस प्रॉक्सी का IP एड्रेस सामने आता जिससे अगर कोई ट्रैक भी करेगा उसको लगेगा की कोई सिंगापूर (यानि की किसी दूसरे देश से) से उसकी वेबसाइट पर आया है। एडमिन, ISP, या फिर सरकार अगर ट्रैक करने की कोशिस करेंगे तो उन्हें भी लगेगा की आप सिंगापूर की किसी वेबसाइट पर कोई काम कर रहे हो। 

हालाँकि, आप जानते ही हो की आजकल किसी भी तरह कि सिक्युरिटी को ब्रेक करना कोई बड़ी बात नहीं है। उसी तरह से प्रॉक्सी को भी ब्रेक करके ये पता लगाया जा सकता है की आपकी असल IP क्या है और आप कहा से ऑपरेट कर रहे हो।

प्रॉक्सी सर्वर के प्रकार

वैसे तो कई अलग-अलग प्रकार की प्रॉक्सी है लेकिन मैंने कुछ सामन्य प्रॉक्सी के बारे में यहाँ पर बताया है।

  1. Transparent Proxy: ये प्रॉक्सी का सबसे सरल प्रकार है। ये खुद की पहचान प्रॉक्सी सर्वर के रूप में कराती है और आपकी सभी जानकारी को आपके असल IP एड्रेस के साथ मुख्य वेबसाइट को शेयर करती हैं। इस तरह की प्रॉक्सी किसी भी प्रकार की सुरक्षा प्रदान नहीं करती है। इसका इस्तेमाल ज्यादातर स्कूल, कॉलेज या कम्पनियो में किया जाता है कंटेंट को फ़िल्टर करने के लिए।
  1. Anonymous Proxy: ये आमतौर पर ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाली प्रॉक्सी है। ये आपके IP एड्रेस को वेबसाइट के साथ शेयर नहीं करती, हालांकि ये खुद की पहचान प्रॉक्सी सर्वर के रूप में कराती है। यह आपकी ब्राउज़िंग गतिविधि को प्राइवेट रखता है। ये आपको टार्गेटेड विज्ञापन से भी बचता है।
  1. High Anonymity Proxy: ये प्रॉक्सी सबसे सुरक्षित होती हैं क्योंकि ये आपके IP एड्रेस और पर्सनल डेटा को शेयर नहीं करते है और रिक्यूएस्ट करते समय वे खुद को प्रॉक्सी के रूप में पहचान नहीं कराते हैं। वे रिक्यूएस्ट के लिए उपयोग किए जाने वाले IP एड्रेस को भी बार बार बदलते रहते हैं। यही कारण है कि High Anonymity Proxy आपको ऑनलाइन सबसे ज्यादा प्राइवेसी देते है। TOR ब्राउज़र इस प्रकार के प्रॉक्सी का उपयोग करता है। क्योंकि IP एड्रेस बार बार बदलता रहता है, इसलिए यह सर्वर के लिए पता लगाना कठिन होता है कि ट्रैफ़िक कहाँ से आ रहा है। अगर आप ट्रैक नहीं होना चाहते हैं, तो यह सबसे अच्छा ऑप्शन है।
  1. Distorting Proxy: ये भी anonymous proxy के जैसा ही होता है और उस ही की तरह काम करता है, दोनों में बस इतना सा अंतर होता है की ये जानबूझकर गलत IP एड्रेस शेयर करता है वेबसाइट के साथ। हालाँकि, ये अपनी पहचान प्रॉक्सी के रूप में ही करता है। अगर आप अपनी लोकेशन को छुपाना चाहते है तो ये उसके लिए ये एक दम सही है।
  1. Reverse Proxy: ये सभी प्रॉक्सीयों से उल्टा होता है यहां पर क्लाइंट को यह पता नहीं होता की वह प्रॉक्सी से कम्यूनिकेट कर रहा है उसे लगता है कि वह डायरेक्ट मुख्य सर्वर से कम्यूनिकेट कर रहा है जबकि सभी रिक्यूएस्ट और रेस्पॉन्स प्रॉक्सी से हो कर गुजर रहे होते हैं। इसका उपयोग बड़ी-बड़ी कंपनियों जैसे की Google इत्यादि द्वारा अपने सर्वर की सुरक्षा को बढ़ाने के लिए, लोड को कम करने, और गति बढ़ाने के लिए किया जाता है।
  1. Forward Proxy: ये क्लाइंट कि रिक्यूएस्ट को टारगेट सर्वर पर भेजता है, जिससे दोनों के बीच कम्युनिकेशन हो सके। यहाँ पर क्लाइंट प्रॉक्सी सर्वर को बताता है कि उसे कौन सा रिसोर्स चाहिए और फिर इस रिक्यूएस्ट को प्रॉक्सी टारगेट सर्वर तक पंहुचा देती है जहा पर रिसोर्स होता है।
  1. CGI Proxy: CGI प्रॉक्सी सर्वर वेबसाइटों को ओर अधिक एक्सेसिबल बनाने के लिए विकसित किया गया है। यह वेब फ़ॉर्म का इस्तेमाल करके URL के टारगेट रिक्यूएस्ट को स्वीकार करता है और उसे प्रोसेस करने के बाद परिणाम को वेब ब्राउज़र पर दिखा देता है। इनकी प्राइवेसी पालिसी के कारण यह कम लोकप्रिय है जैसे कि VPN, लेकिन इसे अभी भी बहुत सारे लोग काम में लेते हैं।
  1. Suffix Proxy: ये मूल रूप से URL को प्रॉक्सी का नाम देता है। इस प्रकार की प्रॉक्सी किसी भी हाई लेवल की anonymity को सुरक्षित नहीं करती है। इसका उपयोग वेब फिल्टर को बाईपास करने के लिए किया जाता है। इसका उपयोग करना आसान है और इसे आसानी से लागू किया जा सकता है लेकिन इसमें मौजूद अधिक वेब फिल्टर के कारण इसका उपयोग कम किया जाता है।
  1. I2P Anonymous Proxy: यह कई अलग अलग लेवल पर सभी कम्युनिकेशन को छिपाने के लिए एन्क्रिप्शन का उपयोग करता है। यह एन्क्रिप्टेड डेटा अलग अलग जगहों पर मौजूद अलग अलग नेटवर्क राउटरों के माध्यम से प्रसारित किया जाता है और इस प्रकार I2P पूरी तरह से डिस्ट्रिब्यूटेड प्रॉक्सी है। यह सॉफ्टवेयर मुफ्त है और उपयोग करने के लिए खुला सोर्स (open source) है।
  1. DNS Proxy: DNS प्रॉक्सी DNS प्रश्नों के रूप में रिक्यूएस्ट को लेती हैं और उन्हें डोमेन सर्वर पर फॉरवर्ड करती हैं जहां इसे कैश किया जाता है, रिक्यूएस्ट के अलावा फ्लो को भी पुनर्निर्देशित (redirect) किया जाता है।
  1. Data Center Proxy: ये residential proxies का उल्टा हैं। डेटा सेंटर प्रॉक्सी में कंप्यूटर जनरेटेड IP एड्रेस होते है जो की किसी भी डिवाइस से नहीं जुड़े होते हैं। ये बिलकुल उसी तरह से होते है जैसे की क्लाउड में प्रॉक्सी। इस तरह की प्रॉक्सी का एक फायदा है उनकी गति। आमतौर पर क्लाउड सर्विस प्रोवाइडर के पास इनक्रिडिबल इंटरनेट कनेक्शन होता हैं जो आपको गति प्रदान करते हैं। हालांकि वे सभी एक ही IP एड्रेस को शेयर कर रहे होते है, एक सर्वर सैकड़ों डेटा सेंटर प्रॉक्सी की होस्टिंग करता है।

तो ये थे कुछ सामान्य प्रॉक्सी सर्वर।

प्रॉक्सी सर्वर के फायदे और नुकसान

प्रॉक्सी सर्वर के फायदे:

  • ब्लॉक कंटेंट को एक्सेस और डाउनलोड कर सकते है। जैसे कि सर्कार, ISP या फिर स्कूल/कॉलेज/ऑफिस में एडमिन की तरफ से ब्लॉक की हुई वेबसाइट को इस्तेमाल कर सकते है।
  • इंटरनेट सर्फिंग करते समय अपना IP एड्रेस को छुपता सकते है और गुमनाम रूप से किसी भी वेबसाइट को सर्फ कर सकते है।
  • IP एड्रेस छुपा होने से हमे कोई भी आसानी से ट्रैक नहीं कर सकता। इससे हम ट्रैक होने और हैक होने से बच सकते है।
  • जब हम प्रॉक्सी सर्वर का इस्तेमाल करते है तो हमारी ऑनलाइन सुरक्षा को और मजबूत होती है।
  • प्रॉक्सी सर्वर हमे एक्स्ट्रा प्रोटेक्शन देता है जिससे हमारे कंप्यूटर में मैलवेयर, फ़िशिंग लिंक और वायरस आने से बच जाता है।
  • प्रॉक्सी सर्वर का इस्तेमाल कभी भी कही से भी किया जा सकता है। इसके लिए आपको कुछ भी इस्टॉल करने की जरुरत नहीं है। किसी भी ब्राउज़र पर इसका इस्तेमाल कर सकते है।
  • प्रॉक्सी वेबसाइट ज्यादातर मुफ्त होती है। हालांकि भुगतान कर के इस्तेमाल करने वाली भी काफी वेबसाइटें हैं जिसमे आपको कुछ ओर फीचर्स मिल जाएंगे।

प्रॉक्सी सर्वर के नुकसान:

  • जैसा की मेने बताया की ये कैश सिस्टम की वजह से डिटेल सेव करके रखता है। तो जाहिर सी बात है की प्रॉक्सी सर्विस प्रोवाइडर आपका पर्सनल डाटा, यूजरनाम और पासवर्ड देख सकते है। तो इसके लिए मैं आपको यही सलाह दूंगा की प्रॉक्सी वेबसाइट पर कोई भी यूजरनाम और पासवर्ड न डाले।
  • कई बार इसे गलत कामो के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। हैकर्स भी इसका इस्तेमाल करते है।
  • प्रॉक्सी वेबसाइट, VPN के मुकाबले धीरे काम करती है और साथ ही VPN और TOR ब्राउज़र के मुकाबले सिक्योरिटी काफी कमजोर होती है।
  • ज्यादातर प्रॉक्सी कनेक्शन एनक्रीपटेड नहीं होते है और केवल IP एड्रेस को ही ये छुपता है।
  • कई सारी प्रॉक्सी साइट आपको कंटेंट डाउनलोड नहीं करने देती है या फिर छोटी फाइल ही डाउनलोड हो पाती है बड़ी फाइल के लिए VPN सर्विस का इस्तेमाल करना पड़ता है।
  • ये केवल ब्राउज़र और एप्लीकेशन पर ही काम करती है।

मुफ़्त और भरोसेमंद प्रॉक्सी साइट की लिस्ट:

ज्यादातर ब्लॉक की गई वेबसाइटों को इस्तेमाल करने के लिए प्रॉक्सी साइट का इस्तेमाल किया जाता हैं। रोजाना कई प्रॉक्सी साइटें लॉन्च होती हैं और बंद होती है। नीचे सभी मुफ़्त और भरोसेमंद प्रॉक्सी साइट के बारे में बताया है जिन्हे मैंने खुद इस्तेमाल किया है।

1. HMA (HideMyAss)

HMA - मुफ़्त और भरोसेमंद प्रॉक्सी साइट

HideMyAss यूजर की जरुरत के हिसाब से प्रॉक्सी सर्विस मुफ्त और भुगतान दोनों वर्जन में देता है। सिंपल प्राइवेट ब्राउज़िंग के लिए मुफ्त वर्जन है और प्रो वर्जन में VPN सर्विस है जो कई टूल्स पर, गेम और एप्प पर भी काम करता है।

इसके अलवा ये आपको URL को एनक्रीपट, कूकीज और स्क्रिप्ट को डिसएबल करने का ऑप्शन भी देता है साथ ही साथ सर्वर भी अपने हिसाब से चुन सकते है।

2. Hidester

Hidester - मुफ़्त और भरोसेमंद प्रॉक्सी साइट

Hidester का इस्तेमाल करने के लिए सॉफ़्टवेयर या एप्लीकेशन इंस्टॉल करने की जरुरत नहीं है और यह आपके मोबाइल फोन सहित कई प्लेटफार्मों पर चल जाती है। हालाँकि इसमें दो ही सर्वर है अमेरिका और यूरोप लेकिन वो भी काफी शक्तिशाली है।

Hidester प्रॉक्सी के साथ ओर भी कई मुफ्त टूल भी देता है। जैसे की DNS Leak Test, पासवर्ड जनरेटर, इत्यादि।

3. Hide.me

Hide.me - मुफ़्त और भरोसेमंद प्रॉक्सी साइट

Hide.me प्रॉक्सी साइट पर अत्यधिक गोपनीयता बनाए रखती है क्योंकि यह आपकी ऑनलाइन गतिविधि को स्टोर नहीं करती है। यह एक मुफ्त सर्विस है और ये भी विज्ञापन नहीं दिखाता है। Chrome और FireFox ब्राउज़र का एक्सटेंशन भी उपलब्ध है, अगर चाहे तो उसका इस्तेमाल भी कर सकते है।

4. VPNBOOK

VPNBOOK - मुफ़्त और भरोसेमंद प्रॉक्सी साइट

VPNBOOK वैसे तो मुख्य रूप से VPN के लिए बनाई गई है लेकिन इस पर प्रॉक्सी सर्विस भी उपलब्ध है। इसमें यूरोप, US और UK के कई सर्वर हैं और इसकी सबसे अच्छी बात यह है की ये 100% मुफ़्त है क्युकी ये एक ओपन सोर्स है। 

यह वेबसाइटों को भी अनब्लॉक करता है और आसानी से एक्सेस कर सकते है क्योंकि इसमें कोई sign-up या रजिस्ट्रेशन की जरुरत नहीं होती है।

5. MegaProxy

MegaProxy - मुफ़्त और भरोसेमंद प्रॉक्सी साइट

मेगाप्रॉक्सी में कुछ यूनिक विशेषताएं हैं जो इसे अन्य प्रॉक्सी साइटों से अलग करती हैं। यह आपको सभी विज्ञापनों को रोकता और वेबसाइटों से कुकीज़ को ब्लॉक करता है।

इसमे कुछ लिमिटेशन है जैसे की आप कुछ पेज को ही ब्राउज कर सकते है और मीडिया फाइल को स्ट्रीम नहीं कर सकते। मतलब की कोई भी ऑडियो या वीडियो फाइल नहीं प्ले कर सकते।

इस लिमिटेशन को हटाने के लिए आपको इसे पैसे देने होंगे उसके बाद ही आप बाकि के फीचर काम में ले सकते है।

ये है 5 मुफ़्त और भरोसेमंद प्रॉक्सी साइट लेकिन। इसके अलावा और भी बहुत सारी प्रॉक्सी वेबसाइट है जब गूगल पर सर्च करेंगे तो और भी वेबसाइट मिलेगी लेकिन कौन सी भरोसेमंद है और कौन सी नहीं ये आपको पता करना होगा।

प्रॉक्सी सर्वर और VPN में क्या अंतर है?

VPN (वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क):

यह एन्क्रिप्शन, प्रमाणीकरण और अखंडता की सुरक्षा को उपयोग करने का एक टूल है, ताकि हम एक पब्लिक नेटवर्क को प्राइवेट नेटवर्क के रूप में इस्तेमाल कर सकें। ये यूजर को एक प्राइवेट नेटवर्क को रिमोटली एक्सेस करने में मदद करता है।

प्रॉक्सी सर्वर:

दरअसल, प्रॉक्सी सर्वर क्लाइंट के वास्तविक IP एड्रेस के बजाय अपना IP एड्रेस का उपयोग करता है (जिसका अर्थ है कि यह क्लाइंट के IP एड्रेस को छुपा देता है), ताकि ग्राहक का वास्तविक IP एड्रेस दिखाई ना दे सके।

VPN (वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क)प्रॉक्सी सर्वर
VPN आपके ट्रैफ़िक को एनक्रीपट करता है। VPN सर्विस आपको ISP, सरकारी ट्रैकिंगऔर हैकर्स से बचाता है। प्रॉक्सी ऐसा नहीं करते हैं।प्रॉक्सी सर्वर आपके ट्रैफ़िक को एन्क्रिप्ट नहीं करता है बल्कि IP एड्रेस को छुपता है। प्रॉक्सी सर्वर ट्रैकिंग को पूरी तरह से नहीं रोक पाता है, इसलिए उनका उपयोग कभी भी संवेदनशील जानकारी को संभालने के लिए नहीं किया जाता है।
VPN ऑपरेटिंग सिस्टम लेवल पर काम करता हैं और आपके सभी ट्रैफ़िक को रीरूट (मार्ग बदलता है) करता हैं। मतलब की ये आपके पुरे कंप्यूटर की हर एक एक्टिवतीय पर काम करता है।प्रॉक्सी एप्लीकेशन लेवल पर काम करती हैं और केवल स्पेशल एप्प या ब्राउज़र पर ही ट्रैफ़िक को रीरूट करती हैं। ये केवल एक एप्लीकेशन या ब्राउज़र पर ही काम करता है।
VPN कनेक्शन अधिक विश्वसनीय और मजबूत होते है और काफी तेज चलता है प्रॉक्सी के मुकाबले।प्रॉक्सी सर्वर कनेक्शन बार बार डिसकनेक्ट होता रहता है और धीरे भी चलता है VPN के मुकाबले।

लेकिन मैंने आपको यही सलहा दूंगा की अगर आप अपने पर्सनल मोबाइल, कंप्यूटर या लैपटॉप में इस तरह की सर्विस का इस्तेमाल करना कहते है तो VPN या फिर TOR ब्राउज़र का ही इस्तेमाल करे क्युकी ये प्रॉक्सी के मुकाबले काफी ज्यादा सुरक्षित होते है।

अगर आप आने स्कूल, कॉलेज, ऑफिस या किसी ऐसी जगह पर गुमनाम रूप से इंटरनेट सर्फ करना चाहते है या किसी ब्लॉक वेबसाइट को खोलना चाहते है तो प्रॉक्सी का इस्तेमाल करना सही रहे गा।

क्युकि हो सकता है की उस कंप्यूटर में कुछ भी इनस्टॉल करने के आपको एडमिन की परमिशन लेनी हो ओर इसी वजह से ऐसी जगहों पे प्रॉक्सी सही रहती है।

बांकी मैंने इस आर्टिकल में जिन वेबसाइट के बारे में आपको बताया है वो सभी मैंने खुद इस्तेमाल की हुई है। मैंने अपने सभी सभी आर्टिकल में उन्ही वेबसाइट या टूल के बारे में बताता हु जिन्हे मैंने खुद काम लिए है।

ये थी कुछ जरुरी बाते प्रॉक्सी साइट के बारे आशा करता हु ये जानकारी आपके काम की होंगी।

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Dharmendra Author on Web Janakari

मेरा नाम धर्मेंद्र मीणा है, मुझे तकनीक (कंप्यूटर, लैपटॉप, स्मार्टफोन्स, सॉफ्टवेयर, इंटरनेट, इत्यादि) से सम्बन्धी नया सीखा अच्छा लगता है। जो भी में सीखता हु वो मुझे दुसरो के साथ शेयर करना अच्छा लगता है। इस ब्लॉग को शुरू करने का मेरा मकसद जानकारी को ज्यादा से ज्यादा लोगो तक हिंदी में पहुंचना है।

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