TOR क्या है और कैसे इसका इस्तेमाल करे? – पूरी जानकारी

TOR (The Onion Router) क्या है और कैसे इसे इस्तेमाल करे?

आप में से कुछ लोगो ने TOR के बारे में सुना होगा और कुछ ने नहीं। TOR के बारे में बहुत ही कम लोग जानते है लेकिन ये बहुत ही काम की चीज़ है।

जैसा की आज का समय ऑनलाइन और डाटा का समय है। कुछ बटन दबाते ही पूरी दुनिया की जानकारी आपको मिल जाती है और अपनी जानकारी भी दुसरो तक पंहुचा सकते है।

जैसा की आए दिन आप सुनते ही रहते है की कभी फेसबुक तो कभी अमेज़न का डाटा लीक हो गया। जिससे करोड़ो यूजर की प्राइवेसी को खतरा हो सकता है। हैकर्स कहीं से भी किसी के भी अकाउंट को हैक करके उसकी जानकारी चुरा सकते है। 

साथ ही सरकार और दूसरी प्राइवेट कंपनी भी कई बार आपको ट्रैक करती है। अब सवाल यह उठता है की आखिर इन सबसे बचा केसा जाए। कैसे हम गुमनाम होकर सर्फ कर सकते या जानकरी दुसरो के साथ शेयर कर सकते है?

इसके जवाब में मैं यही कहूंगा की आप TOR या VPN का इस्तेमाल कर सकते है। लेकिन VPN में काफी सारी लिमिट होगी जो की TOR में बिलकुल भी नहीं मिलेगी।

TOR क्या है?

TOR (The Onion Router) एक प्रोग्राम है जिसे आप अपने कंप्यूटर पर चला सकते हैं जो आपको इंटरनेट पर सुरक्षित रखने में मदद करता है।

ये दुनिया भर में वालंटियर द्वारा चलाए जा रहे सर्वरों का एक डिस्ट्रिब्यूटेड नेटवर्क है जो आपकी कम्युनिकेशन कि रक्षा करता है: ये आपके इंटरनेट कनेक्शन में किसी को भी तांकझांक करने से रोकता है और आप जिन साइटों को सर्फ करते हैं उनको आपकी लोकेशन को जानने से रोकता है, जिससे आप गुमनाम रूप से अपना काम कर सके। वालंटियर के इन सर्वरों को टोर नेटवर्क कहा जाता है।

ज्यादातर लोग टोर का इस्तेमाल टोर ब्राउज़र के साथ करते है, जो कि FireFox का ब्राउज़र का ही एक वर्जन है, जो कई प्राइवेसी समस्याओं को ठीक करके बनाया गया है।

टोर प्रोजेक्ट एक गैर-लाभकारी संगठन है, जो टोर सॉफ्टवेयर का रखरखाव और विकास करता है। इसीलिए ये एक ओपन सोर्स है।

TOR का इतिहास

टोर प्रोजेक्ट की स्थापना दिसंबर 2006 में कंप्यूटर वैज्ञानिक Roger Dingledine, Nick Mathewson और पांच अन्य लोगों ने मिल कर कि थी। इलेक्ट्रॉनिक फ्रंटियर फाउंडेशन (EFF) ने अपने शुरुआती वर्षों में द टोर प्रोजेक्ट के फाइनेंसियल सुपोर्टरस के रूप में काम किया। टोर प्रोजेक्ट की अधिकतम फंडिंग USA की सरकार ने की है। ये Onion Routing की तकनीक का इस्तमाल करता है।

अक्टूबर 2014 में, द टोर प्रोजेक्ट ने अपनी पब्लिक छवि (विशेष रूप से “डार्क नेट” और “छिपी सेवाओं” के संबंध में) को बेहतर बनाने और टोर के तकनीकी पहलुओं के बारे में पत्रकारों को शिक्षित करने के लिए पब्लिक रिलेशन फर्म थॉमसन कम्युनिकेशंस को काम पर रखा था।

TOR कैसे काम करता है?

ये प्याज राउटिंग (Onion Routing) की तकनीक पर काम करता है जो यूजर की ऑनलाइन गतिविधियो  को गोपनीय रखता है। इसका इस्तेमाल TOR ब्राउज़र के जरिये ही किया जा सकता है। ये बिलकुल फ्री है क्युकि ये एक गैर-लाभकारी संगठन है, जिसका मुख्य उद्देश्य रिसर्च करना और प्राइवेसी टूल को डवलप करना है।

इसका इस्तेमाल ज्यादातर डार्क वेब और डीप वेब में किया जाता है। जहा पर 95% इंटरनेट का हिस्सा है। हम इंटरनेट का केवल 5% हिस्से को ही इस्तेमाल करते है बाकि के 95% इस्तेमाल करने के लिए हमे TOR ब्राउज़र की जरुरत पड़ती है।

TOR नेटवर्क आपके ट्रैफ़िक को एन्क्रिप्ट करके और नेटवर्क के अंदर अलग अलग TOR सर्वर में ले जाकर आपकी पहचान को छुपाता है। जिससे आपकी असली IP एड्रेस किसी को पता नहीं चल पाता है।

जब आप किसी सामान्य वेब ब्राउज़र (Google Chrome, Mozilla FireFox, Safari, Opera, इत्यादि) का उपयोग करके किसी वेबसाइट पर जाते हैं, तो आपका कंप्यूटर वेबसाइट के सर्वर के साथ डायरेक्ट कनेक्शन बनाता है।

जिससे कोई भी व्यक्ति आपका और आपके सर्वर दोनों का IP एड्रेस का पता लगा सकता है और आपकी गतिविधियों पर निगरानी रख सकता है, जैसे की ISP (इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर), सरकार या ऑफिस/कॉलेज का एडमिन या हैकर्स।

जब तक आप और सर्वर एन्क्रिप्टेड HTTPS का उपयोग करके कम्यूनिकेट कर रहे थे, तब तक घुसपैठ आपके संदेशों को नहीं पढ़ पाएगा। लेकिन HTTPS तो केवल वेबसाइट पर ही इस्तेमाल किया जाता है और उस एक वेबसाइट के लिए ही आपका कनेक्शन को एन्क्रिप्ट होगा और आपका IP एड्रेस तो फिर भी पता चल ही जाएगा जिससे ये भी पता चल जाएगा की आप कहा से और किस तरह की वेबसइट पर काम कर रहे है।

इसके विपरीत, जब आप टोर ब्राउज़र का इस्तेमाल करके किसी भी वेबसाइट पर जाते हैं, तो आपका कंप्यूटर कभी भी वेबसाइट के सर्वर से डायरेक्ट कनेक्ट नहीं होता है। इसके बजाय, टोर ब्राउज़र 3 टोर सर्वर का इस्तेमाल करता है और एक उलझाने वाला पाथ बनता है और फिर सारा डाटा उसी पाथ से जाता है।

ब्राउज़र आपके डेटा/रिक्यूएस्ट को इस पाथ के सबसे पहले सर्वर को भेजता है, और फिर पहला सर्वर डाटा को दूसरे सर्वर पर भेजता है, और दूसरा सर्वर उस डाटा को तीसरे सर्वर पर भेजता है, जो की आखरी सर्वर है। फिर तीसरा सर्वर डाटा को मुख्य वेबसाइट के सर्वर पर भेजता है। फिर वेबसाइट भी रिक्यूएस्ट के अनुसार डाटा को वापिस आखरी सर्वर (तीसरा सर्वर) पर भेजती है और फिर जिस क्रम में रिक्यूएस्ट आई थी उसी क्रम में वापिस जाती है।

वेबसाइट भी रिक्यूएस्ट के अनुसार डाटा को वापिस आखरी सर्वर (तीसरा सर्वर), फिर दूसरा सर्वर और आखिर में पहला सर्वर पर जाएगा, फिर TOR ब्राउज़र पर दिखाई देगा।

TOR Server Connection

उदाहरण के लिए, ऊपर के फोटो के अनुसार ब्राउज़र सबसे पहले जर्मनी के सर्वर पर रिक्यूएस्ट को भेजेगा, फिर यूक्रेन के सर्वर पर, और आखिर में ऑस्ट्रिया के सर्वर पर फिर आपकी रिक्यूएस्ट मुख्य वेबसाइट के सर्वर पर जाएगी। वेबसाइट भी उसी क्रम में डाटा को भेजेगी जिस क्रम उसे मिला है, यानि की पहले ऑस्ट्रिया के सर्वर पर जाएगा, फिर यूक्रेन के सर्वर पर, और अंत में जर्मनी के सर्वर पर और फिर टोर ब्राउज़र पर।

साथ ही ये पूरा सर्किट एन्क्रिप्टेड होता है जिससे तीनो ही सर्वर में से किसी को भी कुछ पता नहीं चलता की किस सर्वर पर क्या काम हो रहा है और ना ही कोई आसानी से ट्रैक कर सकता है क्युकी अगर कोई ट्रैक भी करता है तो उसे आखिरी सर्वर का ही IP एड्रेस मिलेगा। आपका असली IP एड्रेस छुपा हुआ होगा।

जिससे ट्रैक करने वाले को यही लगेगा की आप यूक्रेन देश से हो। इसी तरह से आप ब्लॉक की गई वेबसाइट को भी बड़ी ही आसानी से खोल सकते हो।

TOR प्रॉक्सी से कैसे अलग है?

प्रॉक्सी सर्विस प्रोवाइडर किसी एक लोकेशन में अपना सर्वर सेट कर देते है जो इंटरनेट से जुड़ा होता है और फिर आपका डाटा या ट्रैफिक उस सर्वर के जरिए भेजने देते है। यूजर उसके एक सर्वर से ही जुड़ता है और अंत में उसी सर्वर को छोड़ देता है।

प्रॉक्सी सर्विस प्रोवाइडर इसके लिए आप से शुल्क ले सकते है या सर्वर पर विज्ञापन दिखा कर लागत वसूल सकते है। प्रॉक्सी साइट कॉन्फ़िगर करने के लिए आपको कुछ भी इस्तेमाल नहीं करना होता है। आपको बस अपने ब्राउज़र पर प्रॉक्सी साइट को खोलना होता है और अपना काम करना शुरू कर सकते है।

अगर आप अपनी गोपनीयता और गुमनामी के लिए ऑनलाइन सुरक्षा नहीं चाहते हैं तो किसी भी प्रॉक्सी साइट का इस्तेमाल कर सकते है। इसमें से कुछ प्रॉक्सी सर्विस प्रोवाइडर अपनी साइट पर SSL का इस्तेमाल करते है आपको सुरक्षा देने के लिए।

प्रॉक्सी सर्विस प्रोवाइडर जानता है कि आप कौन हैं और आप इंटरनेट पर क्या ब्राउज़ करते हैं। वे आपके ट्रैफ़िक को देख सकते हैं क्योंकि यह उनके सर्वर से हो कर गुज़रता है। कुछ मामलों में, वे आपके एन्क्रिप्टेड ट्रैफ़िक के अंदर भी देख सकते हैं। 

वही TOR आपके ट्रैफ़िक को डेस्टिनेशन पर भेजने के लिए 3 अलग-अलग सर्वरों से भेजता है। क्योंकि तीनो सर्वर में से प्रत्येक के लिए एन्क्रिप्शन की एक अलग लेयर होती है।

कोई भी व्यक्ति जो आपका इंटरनेट कनेक्शन देख रहा है, वह उसे मॉडिफाई नहीं कर सकता है और ना ही पढ़ सकता है कि आप TOR नेटवर्क में क्या भेज रहे हैं। आपका ट्रैफ़िक टोर क्लाइंट (TOR ब्राउज़र) के बीच एन्क्रिप्ट किया गया होता है और ये तीनो सर्वर दुनिया में कोई से भी हो सकते है।

आप जब TOR सर्वर से जुड़ते है तो आपको सर्वर चुनने की जरुरत नहीं पड़ती है बल्कि ये खुद आपको किसी भी तीन सर्वर से रैंडमली जोड़ देता है, और फिर जब दोबारा किसी साइट से जुड़ते है तो अलग तीन सर्वर से हो कर गुजरते है। इसका मतलब हर बार सर्वर बदल जाता है।

हर बार सर्वर के बदल जाने से IP एड्रेस भी बदल जाएगा जिससे अगर कोई ट्रैक भी करना चाहेगा तो नहीं कर पाएगा। ऑनलाइन गतिविधियों को ट्रैक करने के लिए IP एड्रेस का पता होना जरुरी होता है और अगर किसी को IP एड्रेस पता चल भी जाएगा किसी भी एक सर्वर का तब भी जैसे ही आप दूसरी वेबसाइट खोलेंगे या पेज को रीफेरेंश करेंगे तो तीनो ही सर्वर बदल जाएंगे और उसके साथ ही उनके IP एड्रेस भी।

इसलिए TOR अभी तक सबसे ज्यादा सुरक्षा प्रदान करता है।

TOR के फायदे और नुकसान

TOR के फायदे:

  • ये ओपन सोर्स है इसलिए बिलकुल फ्री में मिल जाता है।
  • ये यूजर फ्रेंडली है जिससे इसे इस्तेमाल करना आसान हो जाता है।
  • आसानी से ब्लॉक की गई वेबसाइट को एक्सेस कर सकते है।
  • डार्क वेब (जिसे हम इंटरनेट का अंडरवर्ल्ड कहते है) का एक्सेस आसानी है कर सकते है।
  • TOR ब्राउज़र के जरिये आप इंटरनेट का 95% हिस्सा एक्सेस कर सकते है। जबकि नार्मल ब्राउज़र से हम इंटरनेट का केवल 5% ही एक्सेस कर पाते है।
  • जो वेबसाइट आपके नार्मल ब्राउज़र पर नहीं चलती वो सभी साइट TOR ब्राउज़र पर चल जाती है। जैसे की .onion डोमेन वाली वेबसाइट जो सिर्फ TOR ब्राउज़र पर ही चलती है। 
  • IP एड्रेस को छुपा कर आसानी से गुमनाम हो सर सर्फिंग कर सकती हो या कोई भी काम इंटनरेट पर गुमनाम रूप से कर सकते हो।
  • TOR हर बार 3 अलग अलग सर्वर का इस्तेमाल करता है जिससे सुरक्षा और भी मौजबुत हो जाती है। इसी वजह से कोई भी आपको ट्रैक नहीं कर पाता है।
  • TOR ब्राउज़र का डिफ़ॉल्ट सर्च इंजन DuckDuckGo है ये एक ऐसा सर्च इंजन है जो कभी आपको ट्रैक नहीं करता है।

TOR के नुकशान:

  • बड़ी फाइल को अपलोड या डाउनलोड नहीं कर सकते है।
  • इसका इस्तेमाल हैकर्स दुवारा काफी ज्यादा किया जाता है, गलत गतिविधियों को अंजाम देने के लिए। जैसे की बड़ी एजेंसी या आर्गेनाइजेशन को हैक करना या उन्हें ट्रैक करना और उनसे पैसे मांगना।
  • 3 सर्वर का इस्तेमाल एक साथ करने से इंटरनेट थोड़ा धीमा हो जाता है। उससे जो भी काम आप करेंगे वो देरी से होंगे। नार्मल ब्राउज़र के मुकाबले उनमें समय लगेगा।
  • काफी सारे प्लगइन काम नहीं करते है। TOR ब्राउज़र प्लगइन्स को ब्लॉक कर देता, जैसे की Flash, RealPlayer, Quicktime, इत्यादि क्युकि ये आपके असली IP एड्रेस का पता करके किसी को भी बता सकते है।

TOR ब्राउज़र को कैसे डाउनलोड करे?

TOR ब्राउज़र बिलकुल मुफ्त में मिल जाता है और इसके लिए आपको किसी भी तरह से पैसे देने की जरुरत नहीं है। जैसा की मैंने ऊपर बताया हुआ है ये एक ओपन सोर्स है।

TOR ब्राउज़र Windows, Mac OS, Linux और Android के लिए उपलब्ध है। अगर भविष्य में इसका कोई अपडेट भी आता है तो वो भी आपको मुफ्त में ही मिल जाएगा।

TOR ब्राउज़र एंड्राइड के लिए आप गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड कर सकते है। हालाँकि, ये अभी iOS के लिए उपलब्ध नहीं है। इस पर काम चल रहा है, जब ये iOS के लिए उपलब्ध हो जाएगा तो ये आईस्टोर पर मिल जाएगा। iOS के लिए अभी तक टोर का कोई ऑफिसियल वर्ज़न नहीं है, हालांकि ये Onion browser को इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं।

TOR ब्राउज़र को कैसे इस्तमाल करे?

TOR Browser (Surf Anonymously)
TOR Browser (Surf Anonymously)

सबसे पहले आपको इसे डाउनलोड करना होगा। उसके बात इसे भी बाकि सभी सॉफ्टवेयर की तरह से ही इनस्टॉल करना होगा। ये FireFox ब्राउज़र को मॉडिफाइड करके बनाया गया है।

इस बात का ध्यान रहे की TOR ब्राउज़र को इसकी ऑफिसियल वेबसाइट से ही डाउनलोड करे। अगर आप इसे कही किसी दूसरी वेबसाइट से डाउनलोड करते है तो हो सकता है की आपको इसका डुप्लीकेट या फिर कोई गलत ब्राउज़र मिल जाए जो आपकी कंप्यूटर या मोबाइल कि जानकारी चुरा सकता है या फिर आपको किसी तरह का नुकसान पंहुचा सकता है।

ऊपर दी गई डाउनलोड बटन पर क्लिक कर के इसे डाउनलोड कर सकते है। इनस्टॉल होने के बाद इसका आइकॉन आपको डेस्कटॉप और स्टार्ट मेनू में दिखाई देगा। निचे दिखाए गए आइकॉन की तरह ही दिखेगा।

TOR Icon
TOR डेस्कटॉप आइकॉन
TOR Icon on Start Menu
TOR स्टार्ट मेनू आइकॉन

फिर उसे ओपन करे ओर फिर Connect पर क्लिक करे जिससे ये ब्राउज़र अपने आप इसके सर्वर से कनेक्ट हो जाएगा। उसके बाद इसे बाकि सभी ब्राउज़र (Google Chrome, Mozilla Firefox, Opera, Safari, इत्यादि) की तरह ही काम में ले सकते है।

मगर ध्यान रहे की किसी भी तरह का addon या प्लगइन का इनस्टॉल नहीं करना है नहीं तो वो आपकी जानकारी को लीक कर सकता है। मैं आपको यही सलाह दूंगा की TOR ब्राउज़र पर अपनी कोई भी ID ना बनाए और नहीं किसी ID को लॉगिन करे।

ब्राउज़र को खोलने के बाद आप किसी भी ब्लॉक की गई वेबसाइट को खोल के आनंद उठा सकते है या अगर फिर भी मन में शंका हो तो अपना IP एड्रेस चेक कर सकते है वो आपको किसी दूसरे देश का ही दिखाई देगा।

TOR का इस्तेमाल किन लोगो को करना चाहिए?

टोर उन सभी के लिए उपयोगी है जो अपनी इंटरनेट गतिविधियों को विज्ञापनदाताओं, ISP और वेबसाइटों के हाथों से दूर रखना चाहते हैं। इसमें वे लोग शामिल हैं जो अपने देश में सेंसरशिप प्रतिबंधों को हटाना चाहता है, जो IP एड्रेस को छिपाना चाहते हैं, या वो लोग जो अपनी ब्राउज़िंग गतिविधियों छुपाना चाहते है।

टोर नेटवर्क उन वेबसाइटों को भी होस्ट करता है जो केवल टोर ब्राउज़र पर ही चलती हैं। दूसरे शब्दों में, आप डार्क वेब की दुनिया में प्रवेश कर चुके हैं, या ऐसी साइटें जो दूसरे ब्राउज़र पर नहीं चल सकती है और ना ही वो नार्मल किसी सर्च इंजन में मिलेगी।

आपको डार्क वेब पर मुफ्त पाठय पुस्तकों से लेकर नशीली दवाओं (ड्रग्स) तक सब कुछ मिल जाएगा, इसके अलावा हैकर को हायर कर सकते है, खून करने के लिए प्रोफेशनल किलर को हायर कर सकते है, इसके अलवा और भी बहुत कुछ है डार्क वेब पर मिल जाएगा वैध और अवैध दोनों ही। डार्क वेब का इस्तेमाल सावधानी से करे

TOR की पुरानी वेबसाइट

TOR की ऑफिसियल वेबसाइट

Orbot और TOR Browser में काया अंतर है?

Orbot और TOR Browser दोनों का अलग अलग उद्देश्यों को पूरा करने के लिए बनाया गया हैं। टोर ब्राउज़र डेस्कटॉप टोर ब्राउज़र की तरह ही है, लेकिन ये आपके मोबाइल डिवाइस पर ही काम करेगा। ये एक वन स्टॉप ब्राउज़र है जो टोर नेटवर्क का उपयोग करता है और आपको गुमनाम रखता है।

दूसरी ओर Orbot एक प्रॉक्सी है जो आपको टोर नेटवर्क का इस्तेमाल करके आपके दूसरे एप्लिकेशन (जैसेकि ई-मेल क्लाइंट, इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप, फेसबुक, इत्यादि) या पुरे फ़ोन को प्रॉक्सी (प्रॉक्सी सर्वर) से कनेक्ट कर देता है। जिससे आप अपने फ़ोन में जो भी काम करेंगे वो Orbot की मदद से टोर नेटवर्क के जरिये कर पाएंगे। Orbot का एक वर्ज़न Android के लिए TOR ब्राउज़र के अंदर भी है, और यही इसे TOR नेटवर्क से कनेक्ट करता है।

हालाँकि, जो TOR ब्राउज़र में जो Orbot वर्ज़न है उसका इस्तेमाल आप केवल TOR Browser में ही कर सकते है। आप टोर नेटवर्क का उपयोग कैसे करना चाहते हैं, ये आप पर निर्भर करता है, Orbot या TOR Browser में से आप किसी एक या दोनों का इस्तेमाल कर सकते है।

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Dharmendra Author on Web Janakari

मेरा नाम धर्मेंद्र मीणा है, मुझे तकनीक (कंप्यूटर, लैपटॉप, स्मार्टफोन्स, सॉफ्टवेयर, इंटरनेट, इत्यादि) से सम्बन्धी नया सीखा अच्छा लगता है। जो भी में सीखता हु वो मुझे दुसरो के साथ शेयर करना अच्छा लगता है। इस ब्लॉग को शुरू करने का मेरा मकसद जानकारी को ज्यादा से ज्यादा लोगो तक हिंदी में पहुंचना है।

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