VPN क्या होता है और कैसे काम करता है?

VPN क्या होता है (What is an VPN in Hindi)

आजकल इंटरनेट पर कुछ भी सुरक्षित नहीं है, हमारे ज्यादातर डाटा और काम ऑनलाइन होते है। आज COVID19 के इस दौर में लगभग हम सभी घर से ही सारा काम ऑनलाइन करते है और ऐसे में हमे कोई भी हैक करके कोई भी हमारे डाटा या नेटवर्क का गलत इस्तेमाल कर सकता है।

इसेमें VPN आपके नेटवर्क को सुरक्षित रखने, अपनी पहचान छुपाने और अपने डेटा को हैकर्स से बचाने का एक बहुत अच्छा तरीका है। VPN आपके नेटवर्क को एनक्रीपट कर देता है जिससे डेटा सुरक्षित रहता है।

VPN (वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क), ये भी वही सारे काम करता है जो प्रॉक्सी सर्वर करता है। लेकिन फिर भी दोनों में ज़मीन आसमान का अंतर है। वैसे तो VPN कई कामो में आता है, जैसे कि ब्लॉक वेबसाइट और कंटेंट को अनलॉक करना और उन्हें डाउनलोड करना, हैक और ट्रैक होने से बचाना, इत्यादि जैसे कई काम में आता है।

तो आइए आगे बढ़ते है और VPN के बारे में और अच्छे से जानते है।

VPN क्या होता है?

VPN का फुलफॉर्म Virtual Private Network है। यह एक ऐसा टूल है जो किसी भी तरह की रुकावट के बिना आपको इंटरनेट पर अपना काम करने देता है। एक एन्क्रिप्टेड और सुरक्षित टनल बना के कनेक्शन को पुनर्निर्देशित करके, आपके ब्राउज़िंग अनुभव और इंटरनेट सुरक्षा को कई तरह से बढ़ाता और बेहतर बनता है।

जब आप किसी पब्लिक नेटवर्क पर काम कर रहे होते है तब इसका इस्तेमाल ज्यादा फायदेमंद होता है। आइए इसे और अच्छे से समझते है।

VPN कैसे काम करता है?

आमतौर पर, ज्यादातर इंटरनेट ट्रैफ़िक अनएन्क्रिप्टेड होते है। जब कोई यूजर अपने ब्राउज़र से वेबसाइट सर्फ करता है तो यूजर का डिवाइस उसके इंटरनेट सेवा प्रदाता (ISP) से कनेक्ट करता और फिर ISP इंटरनेट से कनेक्ट होगा ताकि मुख्य वेबसाइट के सर्वर से कम्यूनिकेट कर सके।

जिससे हर एक रिक्यूएस्ट पर IP एड्रेस का पता चलता है और कोई भी आसानी से आपको ट्रैक कर सकता है।

VPN सर्विस का इस्तेमाल करके इंटरनेट से जुड़ने वाले यूजर के पास हाई लेवल की सुरक्षा और गोपनीयता होती है। एक VPN कनेक्शन में निम्नलिखित 4 चरण शामिल हैं:

  • VPN एन्क्रिप्टेड कनेक्शन का इस्तेमाल करके ISP से जुड़ता है।
  • ISP एन्क्रिप्टेड कनेक्शन को बनाए रखते हुए क्लाइंट को VPN सर्वर से जोड़ता है।
  • VPN सर्वर यूजर के डिवाइस से डेटा को डिक्रिप्ट करता है और फिर एक अनएन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन के रुप में वेब सर्वर को इंटरनेट से जोड़ता है।
  • VPN सर्वर क्लाइंट के साथ एक एन्क्रिप्टेड कनेक्शन बनाता है, जिसे ‘VPN टनल’ के रूप में जाना जाता है।

क्लाइंट और VPN सर्वर के बीच एक VPN टनल ISP से होकर गुजरती है, लेकिन सभी डेटा एन्क्रिप्ट होता है, इसलिए ISP यूजर की गतिविधि को नहीं देख पाता है। इंटरनेट के साथ VPN सर्वर का कम्युनिकेशन अनएन्क्रिप्टेड (unencrypted) होता है, लेकिन वेब सर्वर केवल VPN सर्वर के IP एड्रेस को ही देख पाता है क्युकि VPN यूजर का IP एड्रेस अपने IP के पीछे छुपा लेता है। जिससे यूजर की जानकारी सुरक्षित रहती है।

जब आप अपने कंप्यूटर या स्मार्टफोन या टैबलेट को किसी VPN से जोड़ते हैं, तो उस डिवाइस को यही लगता है की वो किसी दूसरी जगह (देश/शहर) पर है, जबकि वो VPN के दुवारा बनाया गया एक भ्रम होता है। उसके बाद आपके सभी नेटवर्क ट्रैफ़िक को VPN के जरिए सुरक्षित कनेक्शन पर भेजा दिया जाता है। 

उदहारण के लिए, मान लीजिए की आप दिल्ली रहते है और यूरोप में किसी वेबसाइट पर काम कर रहे है। तब आप जैसे ही VPN का इस्तेमाल करेंगे तो ये दिखाएगा की आप अमेरिका से है (यानि की आपकी लोकेशन बदल कर दिखाएगा)। फिर ISP, सरकार या जिस वेबसाइट पर काम कर रहे है उन सब को यही लगेगा की आप कही और से है। ISP और सरकार को लगेगा की आप अमेरिका कि किसी वेबसाइट पर काम कर रहे है, और उस वेबसाइट को ये लगेगा की अमेरिका से है।

इससे अगर कोई आपको ट्रैक करेगा तो उसे VPN सर्वर का ही IP एड्रेस मिलेगा जो किसी दूसरे देश का होगा और ट्रैक करने पर VPN सर्वर जिस जगह का है उसकी ही जानकारी दिखाएगा। जिससे आपका असल IP एड्रेस (आपकी पहचान) छुपी रहेगी।

इसी तरह अगर कोई कंटेंट ब्लॉक होता है तो वो उस विशेष IP पर ब्लॉक किया होता है। जैसे ही VPN, प्रॉक्सी या TOR ब्राउज़र का इस्तेमाल करके IP को बदल देंगे वो ब्लॉक कंटेंट आपके सिस्टम पर चालू हो जाएगा। 

कुछ कन्टेंट को देश के हिसाब से ब्लॉक किया हुआ होता है। जैसे की अमेरिका का टीवी शो आप इंडिया में नहीं देख सकते, अगर इंटरनेट के जरिये देखना भी चाहो तो वो नहीं चलेगा। क्युकि वो केवल अमेरिका की IP एड्रेस पर ही चलेगा, तो उसके लिए आपको अपनी IP को अमेरिका की IP में सेट करना होगा।

मैं इसके लिए VPN या फिर TOR का इस्तेमाल करने की सलाह दूंगा। दोनों ही काफी मजबूत सुरक्षा और गुमनाम सर्फिंग करने देते है।

VPN का इस्तेमाल क्यों करना चाहिए?

दूसरी इंटरनेट गोपनीयता सेवाओं के साथ, VPN को कभी-कभी अवैध या विनाशक गतिविधि के टूल के रूप में केटेगराइज़ड (categorized) किया जाता है। सच्चाई यह है कि VPN का उपयोग करने के कई वैलिड कारण हैं। जिनमे से कुछ सामन्य के बारे में नीच बताया गया है:

  • पब्लिक WiFi पर सुरक्षा: जो यूजर बिना VPN के पब्लिक WiFi नेटवर्क पर काम करते, वे खुद को ही जोखिम में डाल रहे होते हैं। उनका इंटरनेट ट्रैफ़िक अनएन्क्रिप्टेड होता है और उसी नेटवर्क पर दूसरे यूजर/हैकर आसानी से हैकिंग टूल का इस्तेमाल करके आपकी एक्टिविटी की निगरानी कर सकते हैं। ये हमलावरों के लिए लॉगिन क्रिडेंशियल (लॉगिन ID और पासवर्ड) और दूसरी संवेदनशील जानकारी चुराने का एक सामान्य तरीका है। अगर कोई यूजर किसी VPN का इस्तेमाल करके पब्लिक WiFi का इस्तेमाल करता है, तो हमलावर केवल एन्क्रिप्टेड डेटा ही देख पाएगा, जो किसी भी तरह की जानकारी को नहीं दिखाता।
  • रिमोट वर्क: कई बिज़नेस अपने कर्मचारियों को VPN का इस्तेमाल करके रिमोटली  काम करने देते हैं। रिमोट एक्सेस के जरिये कर्मचारी कंपनी के इंटरनल नेटवर्क पर काम कर सकते है साथ ही बिज़नेस को हमलावरों या जासूसी से बचाने के लिए एन्क्रिप्शन सुरक्षा भी देता है।
  • ब्लॉक कंटेंट और वेबसाइट का एक्सेस: कई बार सरकार, ISP, ऑफिस, स्कूल, कॉलेज और देश में कुछ कंटेंट और वेबसाइट को ब्लॉक कर दिया जाता है। इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाले लोग VPN का इस्तेमाल करके उस कंटेंट एक्सेस कर सकते हैं जिससे वो कंटेंट या वेबसाइट अनब्लॉक हो जाता है और इस्तेमाल कर सकते है, क्योंकि VPN एन्क्रिप्शन आपकी गतिविधि को सरकार, ISP और एडमिन की निगरानी से बचाता है।
  • लोकेशन गुमनामी: कुछ वेब सर्विस यूजर के लोकेशन के आधार पर कंटेंट को दिखाती है। VPN का इस्तेमाल यूजर के लोकेशन को अज्ञात बना देता है और इन प्रतिबंधों को हटा देता है, जिससे आप वो कंटेंट एक्सेस कर पाते है। जैसा की मैंने ऊपर अमेरिका के टीवी शो का उदाहरण दिया था।
  • ऑनलाइन गोपनीयता का अधिकार: जैसा की मैंने पहले ही बताया है की ISP (Internet Service Provider) और सरकार आपको ट्रैक करती रहती है। इसी तरह, कुछ वेबसाइटें भी अपने विज़िटर की गतिविधि (activity) को मॉनिटर करती है। VPN का इस्तेमाल करने से यूजर अपने डेटा और अपने आप को ट्रैक होने बचाता है और गुमनाम रूप से सर्फ करता है।

मुफ्त और भुगतान किये गए VPN के बीच में क्या अंतर है?

VPN भी दो प्रकार के होते है एक मुफ्त में मिल जाता है और दूसरा जिसके हमे पैसे देने होते है। मुफ्त के प्रोडक्ट में आमतौर पर कुछ लिंट छिपी हुई होती हैं, लेकिन ऐसा हमेशा नहीं होता। एक VPN (वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क) सर्विस के यूजर में कनेक्टिविटी, गति, विश्वसनीयता, गोपनीयता और गुमनामी की चाहता होती हैं।

मुफ्त VPN और पैसे दे कर इस्तेमाल होने वाले VPN सर्विस दोनों में काफी अंतर हैं। हर किसी को अपने ऑनलाइन कम्युनिकेशन के लिए गोपनीयता की आवश्यकता होती है तो मुफ्त VPN उसके लिए उपयोगी होता है।

लेकिन इसके अलावा भी इनमे काफी अंतर है, आइए इसे ओर अच्छे से समझते है।

मुफ्त VPN (Free VPN)

मुफ्त VPN सर्विस इस्तेमाल करने के फायदे

  • मुफ्त VPN सर्विस आपको इंटरनेट पर गुमनाम रूप से ब्राउज़िंग करने देता है। आपका IP एड्रेस कोई भी वेबसाइट देख नहीं पाएगी, VPN सर्विस के अलावा, जिससे आपको ऑनलाइन अधिक स्वतंत्रता, गोपनीयता और गुमनामी मिल जाएगी।
  • कई तरीकों से मुफ्त VPN सर्विस का आनंद लेना संभव है, विशेष रूप से एक मुफ्त VPN प्रोवाइडर के साथ साइन अप करना जो 30-दिन की मनी बैक गारंटी देता है, और फिर 30 दिनों के बाद आप अपने पैसे वापस मांगने के लिए क्लेम कर सकते है (इसे 100% फ्री हो जाएगा), या चाहे तो मुफ्त VPN भी डाउनलोड कर सकते है।
  • मुफ्त VPN सर्विस के लिए आमतौर पर यूजर को रजिस्टर नहीं करना होता है। दूसरे शब्दों में, मुफ्त VPN सर्विस का उपयोग करते समय आपकी प्राइवेसी और गुमनामी का पूरा ध्यान रखा जाता है।

मुफ्त VPN सर्विस इस्तेमाल करने के नुकसान

  • मुफ्त VPN सर्विस में काफी सारी लिमिट होती है जैसे की बैंडविड्थ लिमिट, लिमिटेड सर्वर का होना, इत्यादि। ये ग्राहकों को बैंडविड्थ और सर्वर को ओवरलोड करने से रोकने के लिए ऐसा करते हैं। दूसरे शब्दों में, VPN सर्विस से कनेक्ट होने पर आपके पास बहुत कम ऑप्शन होते है।
  • मुफ्त VPN सर्विस उनके स्वभाव से ही भीड़भाड़ वाली होती हैं। इसका मतलब है कि सर्वर और आपके द्वारा देखी जा रही वेबसाइटों से कनेक्ट होने में आमतौर पर बहुत अधिक समय लगता है। देर से खुलना, पेज का हैंग होना, और इसी तरह कई दूसरी समस्याओ का सामना करना पड़ सकता हैं। ज्यादातर मुफ्त VPN सर्विस आपकी ब्राउज़िंग स्पीड को धीमा कर देती है।
  • मुफ्त VPN सर्विस ग्राहकों से कोई पैसा नहीं लेती है इसलिए VPN कंपनी को विज्ञापनों से पैसा कामना पड़ता है। इसका मतलब है कि आपके ऑनलाइन कनेक्शन पर विज्ञापन दिखाए जाएंगे। यह मैलवेयर, एडवेयर, ट्रैकिंग, वायरस और दूसरी साइबर सुरक्षा के खतरों से जुड़ा हो सकता है।
  • मुफ्त VPN सर्विस असुरक्षित होती हैं। ये प्रोडक्ट यूजर को फ्री में प्रदान किए जाते हैं, इसलिए इन नेटवर्कों की सुरक्षा के लिए अधिक समय और प्रयास नहीं लगाया जाता है। मजबूत नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने में पैसा लगता है, और फ्री VPN सर्विस ऐसी नहीं होती हैं। कमजोर एन्क्रिप्शन होने से अक्सर सुरक्षा कमजोर होती है। सरकारी एजेंसियां, हैकर्स और दूसरे साइबर अपराधी आसानी से मुफ्त VPN नेटवर्क में घुसपैठ कर सकते हैं।
  • मुफ्त VPN सर्विस पिछले कुछ वर्षों में कई बॉटनेट हमलों से जुड़ी हुई होती हैं। 2015 में होला केस कुछ ऐसा ही था, तब से कोई भी होला VPN सर्विस पर भरोसा नहीं करता। ग्राहकों की बैंडविड्थ का उपयोग करके वेबसाइटों में घुसपैठ करने के लिए हैकर्स द्वारा इस फ्री VPN का गलत इस्तेमाल किया गया था।
  • मुफ्त VPN सर्विस कभी-कभी गलत इरादों वाली कंपनियों द्वारा भी ऑपरेट किया जा सकता हैं। जैसे की, वे आपके सभी ऑनलाइन कम्युनिकेशन को आसानी से ट्रैक, मॉनिटर और रिकॉर्ड कर सकते हैं और इसे तीसरे पक्ष को बेच देते हैं। याद रखें कि जो भी कम्पनियाँ मुफ्त VPN सर्विस देती है वो भी पैसे कामने के लिए है और वे अक्सर यूजर डेटा बेचकर पैसे कमाती है।
  • मुफ्त VPN सर्विस आपके ISP की तरह ही काम कर करती हैं। वे आपकी सभी जानकारी को ट्रैक कर सकती हैं और जरुरत पड़ने पर उन्हें बेच भी सकती है।

भुगतान किये गए VPN (Paid VPN)

भुगतान किये गए VPN सर्विस इस्तेमाल करने के फायदे

  • भुगतान की गई VPN सर्विस आमतौर पर यूजर को मजबूत नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर देती हैं जिसमें दुनिया भर के देशों में कई सर्वर शामिल होते हैं। इसका मतलब है कि आपके पास कई देशों में सुरक्षित सर्वरों का एक्सेस है। यह न केवल आपके ट्रैफ़िक को एन्क्रिप्टेड करता है, बल्कि यह आपकी ऑनलाइन ब्राउज़िंग गतिविधियों को भी स्पीड देता है क्योंकि मुफ्त VPN सेवाओं की तुलना में इसमें काफी कम भीड़ होती है।
  • भुगतान की गई VPN सर्विस अपने ग्राहकों से पैसे कमाती हैं। इसका मतलब है कि वे अपने नेटवर्क की सुरक्षा बढ़ाने के लिए जरुरी रिसोर्स का इस्तेमाल करते हैं। भुगतान की गई VPN सर्विस में आमतौर पर SSL (सिक्योर सॉकेट लेयर) एन्क्रिप्शन तकनीक के साथ ओपन सोर्स प्रोटोकॉल भी होता है। दूसरी भुगतान सेवाएं दूसरी एन्क्रिप्शन लेयर का उपयोग करती हैं जैसे कि IPsec और लेयर 2 टनल प्रोटोकॉल (L2TP)।
  • भुगतान की गई VPN सर्विस मल्टी-प्लेटफ़ॉर्म सपोर्ट, अक्सेसिब्लिटी, और बैंडविड्थ पर कोई लिमिट नहीं होती, और कई दूसरी सुविधाएँ होती है जो आपकी ऑनलाइन सुरक्षा को बढ़ावा देती है।
  • भुगतान की गई VPN सर्विस ग्राहकों को ईमेल, लाइव चैट, टेलीफोन या ऑनलाइन कांटेक्ट फ़ॉर्म के माध्यम से चौबीसों घंटे ग्राहक सहायता और सेवा प्रदान करती हैं। जबकि आपको आमतौर पर ग्राहक सहायता का उपयोग करने की आवश्यकता नहीं होगी, तकनीकी/कनेक्शन समस्याएँ होने पर आप इनसे सम्पर्क कर सकते है।

भुगतान किये गए VPN सर्विस इस्तेमाल करने के नुकसान

  • भुगतान की गई VPN सर्विस को इस्तेमाल करने के लिए यूजर इनके प्लान के हिसाब से मासिक, अर्ध-वार्षिक या वार्षिक पैसा देना होता है।
  • भुगतान की गई VPN सर्विस सभी भरोसेमंद नहीं होती हैं। उनमें से कुछ आपकी गतिविधियों के लॉग स्टोर कर लेती है और इसे तीसरे पक्ष को बेच देती है, या अगर जरुरी हो तो सरकारी अधिकारियों के साथ आपके लॉग शेयर कर देती है। PureVPN के मामले पर विचार करें, जिसने दावा किया था कि उसके पास ‘नो लॉग्स’ पालिसी है लेकिन वास्तव में 2017 में FBI को यूजर लॉग प्रदान करता है।
  • भुगतान की गई VPN सर्विस ‘नो लॉग्स’ पॉलिसी होने का दावा कर सकती हैं, लेकिन ग्राहकों के पास वो दावे सही है या नहीं ये पता करने का कोई तरीका नहीं है। यह सच है कि आपके कंप्यूटर और VPN सर्विस के बीच आपके ऑनलाइन कम्युनिकेशन VPN सर्विस प्रोवाइडर को 100% दिखाई देते हैं – भुगतान किया हो या भुगतान न किया हो। इसलिए यूजर के लिए वो VPN सर्विस चुनना जरुरी है जो भरोसेमंद हो और टेक्निकल एक्सपर्ट द्वारा उस VPN का रिव्यु किया क्या हो।
  • कई भुगतान की गई VPN सर्विस ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स, पनामा, ग्रेनेडा, वगैरह जैसे ‘डोडी’ क्षेत्राधिकार में स्थित हैं। इन क्षेत्रों में नियामक वातावरण सबसे अच्छा है, और कोई नहीं जानता कि इन कंपनियों का मालिक कौन है, और अगर आपको कंपनी के खिलाफ शिकायत है तो आपको अपना पैसा वापस पाने में मुश्किल हो सकती है।
  • सभी भुगतान की गई VPN सर्विस के लिए आपको अपनी जीव की जानकारी और पेमेंट जानकारी दर्ज करनी होती है। यह अपने आप में एक सुरक्षा जोखिम है।

अगर आप कभी कबार ही VPN जैसी सर्विस का इस्तेमाल करते है तो फ्री VPN उसके लिए सही रहेगा लेकिन आप अक्सर अपने पर्सनल काम के लिए VPN जैसी सर्विस का इस्तेमाल करते है तो मैं आपको पैसे दे कर VPN सर्विस का प्रो वर्जन इस्तेमाल करने ही सलाह दूंगा।

अगर फ्री सर्विस का इस्तेमाल करना चाहते है तो मैं TOR का इस्तेमाल करने की सलाह दूंगा। TOR 100% मुफ्त सर्विस है और में भी इसे ही सबसे ज्याद काम में लेता हु। हालाँकि मुझे रोजाना इसकी जरुरत नहीं पड़ती है मैं कभी कबार ही इसका इस्तेमाल करता हूँ।

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Dharmendra Author on Web Janakari

मेरा नाम धर्मेंद्र मीणा है, मुझे तकनीक (कंप्यूटर, लैपटॉप, स्मार्टफोन्स, सॉफ्टवेयर, इंटरनेट, इत्यादि) से सम्बन्धी नया सीखा अच्छा लगता है। जो भी में सीखता हु वो मुझे दुसरो के साथ शेयर करना अच्छा लगता है। इस ब्लॉग को शुरू करने का मेरा मकसद जानकारी को ज्यादा से ज्यादा लोगो तक हिंदी में पहुंचना है।

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