विंडोज क्या होता है? लिनक्स और विंडोज में क्या अंतर है?

विंडोज क्या होता है - पूरी जानकारी (Microsoft Windows in Hindi)

विंडोज एक ऑपरेटिंग सिस्टम है जिसे माइक्रोसॉफ्ट ने बनाया है। माइक्रोसॉफ्ट एक कंपनी है जिसके कई सारे प्रोडक्ट है, जैसे कि Microsoft Teams, MS Office (Word, Excel, PowerPoint, इत्यादि), Outlook, OneNote, OneDrive, इत्यादि, विंडोज भी इन्ही में से एक है।

विंडोज माइक्रोसॉफ्ट द्वारा विकसित एक ग्राफिकल ऑपरेटिंग सिस्टम है। ये यूजर को फ़ाइलों को देखने, एडिट, क्रिएट और स्टोर करने, सॉफ़्टवेयर चलाने, गेम खेलने, वीडियो देखने और इंटरनेट से कनेक्ट करने का फीचर देती है। इसे पर्सनल और ऑफिसियल दोनों काम में लिया जा सकता है। माइक्रोसॉफ्ट ने 1.0 के रूप में पहला वर्जन लांच किया था।

Microsoft Windows को Windows के नाम से भी जाना जाता है। इसे 10 नवंबर 1983 को विंडोज के होम कंप्यूटिंग और प्रोफेशनल काम दोनों के लिए लांच किया गया था। बाद में, इसके कई वर्जन लांच कर दिए गए और अभी लेटेस्ट में Windows 11 है।

1993 में, विंडोज़ का पहला बिज़नेस वर्जन रिलीज़ किया गया था, जिसे विंडोज Windows NT 3.1 के नाम से जनते है। फिर इसने अगले वर्जन, Windows 3.5, 4/0 और Windows 2000 को लांच किया। 2001 में माइक्रोसॉफ्ट ने जब Windows XP को लांच किया, तो कंपनी ने पर्सनल और बिज़नेस के लिए कई वर्जन लांच किए।

इसे इंटेल और AMD प्रोसेसर जैसे x86 हार्डवेयर के आधार पर डिजाइन किया गया था। इसलिए ये अलग अलग ब्रांडों के हार्डवेयर पर चल सकता है, जैसे कि HP, Dell, ASUS, Sony, इत्यादि जिसमें घर में इस्तेमाल होने वाले PC भी शामिल हैं।

माइक्रोसॉफ्ट विंडोज का इतिहास

माइक्रोसॉफ्ट के फाउंडर ‘बिल गेट्स’ ने 10 नवंबर 1983 में माइक्रोसॉफ्ट विंडोज की घोषणा की और 1985 में विंडोज का पहला संस्करण जारी किया। हर बार विंडोज नए वर्जन के साथ लोगो में थोड़ा सा बदलाव करती है। नीचे टेबल में विंडोज के वर्जन 1 से 11 तक का इतिहास है।

Windows 1.0

माइक्रोसॉफ्ट ने विंडोज़ का पहला वर्जन 1.0 के से लांच किया था। इसे 20 नवंबर 1985 रिलीज़ किया था, और शुरुआत में इसकी कीमत $100.00 थी। ये पहली बार था जब माइक्रोसॉफ्ट के 16-बिट में ग्राफिकल यूजर इंटरफेस तैयार किया था।

Windows 2.0

दूसरा वर्जन, विंडोज 2.0, माइक्रोसॉफ्ट ने 9 दिसंबर 1987 को तैयार किया गया था और साथ ही उसी दिन विंडो 386 को भी लांच किया था। शुरुआत में, दोनों विंडोज़ की कीमत $100.00 थी।

यह नई सुविधाओं के साथ आया जैसे कि यह एक-दूसरे को ओवरलैप करना और maximize और minimize करना, zooming और iconizing का इस्तेमाल करना।

इसके अलावा, इसमें कंट्रोल पैनल फीचर भी शामिल है जहां एक ही स्थान पर कई सिस्टम सेटिंग्स और कॉन्फ़िगरेशन ऑप्शन उपलब्ध हैं। यहां तक कि माइक्रोसॉफ्ट वर्ड और एक्सेल का भी पहली बार विंडोज 2 में इस्तेमाल किया गया था।

Windows 286

इसे जून 1988 में जारी किया गया था और शुरुआत में इसकी कीमत $100.00 थी।

Windows 3.0

ये पहला विंडोज़ था जिसे हार्ड ड्राइव की जरूरत पड़ी थी। इसे Microsoft ने 22 मई 1990 को लॉन्च किया गया था। इसका पूरा वर्जन $149.95 में बेचा गया था, और अपडेटेड वर्जन $79.95 का था। इसके अलावा, विंडोज में मल्टीमीडिया का सपोर्ट 3 अक्टूबर 1991 में आया था।

ये विंडोज़ में MS-DOS प्रोग्राम को चलाने में भी सक्षम था जिसने कई प्रोग्रामो में मल्टीटास्किंग की भी अनुमति दी और साथ ही 256 colors को भी सपोर्ट किया, जिसने इंटरफ़ेस को रंगीन और एडवांस्ड बना दिया।

Windows 3.1

इसे अप्रैल 1992 में लॉन्च किया गया था, जब इसे तैयार किया जा रहा था, इसका कोड नाम स्पार्टा था। ये PC ग्राफिकल यूजर इंटरफेस के लिए आमतौर पर इस्तेमाल किया जाने वाला पहला ऑपरेटिंग सिस्टम था।

इसके लांच होने के बाद पहले दो महीनों में इसकी दस लाख से भी ज्यादा कॉपी बिक गई। इसने पहली बार TrueType fonts को इंट्रोडयूस किया। विंडोज 3.1 पर पहली बार Minesweeper गेम का भी इस्तेमाल किया गया था।

इसे चलाने के लिए केवल 1MB RAM की की जरूरत होती थी और इसने यूजर को पहली बार माउस की मदद से MS-DOS प्रोग्राम को कंट्रोल करने ऑप्शन दिया। इसके अलावा, ये CD-ROM पर डिस्ट्रीब्यूट होने वाला पहला ऑपरेटिंग सिस्टम था।

वर्जन 3.1 के कुछ दूसरी पीढ़ियां भी थी:

  • 1992 में, वर्कग्रुप्स 3.1 के लिए विंडोज लॉन्च किया गया था।
  • माइक्रोसॉफ्ट ने 27 जुलाई 1993 को विंडोज NT 3.1 लांच किया।
  • विंडोज 3.1 का एक अपडेटेड वर्जन, विंडोज 3.11, 31 दिसंबर 1993 को लांच किया गया था।
  • फरवरी 1994 में, वर्कग्रुप्स 3.11 के लिए विंडोज लॉन्च किया गया था।
  • 21 सितंबर 1994 को, विंडोज NT 5 लांच किया गया था।
  • अगला वर्जन विंडोज NT 3.51, 30 मई 1995 को लांच किया गया था।

Windows 95

जैसा कि नाम पता चलता है की, विंडोज 95 को 24 अगस्त 1995 को लॉन्च किया गया था, और इसके जारी होने के चार दिनों के अंदर दस लाख से अधिक कॉपी बिक चुकी थीं। इसने पहली बार स्टार्ट बटन और स्टार्ट मेन्यू फैसिलिटी शुरू की थी, जिसमें 32-bit एनवायरनमेंट, मल्टीटास्किंग और टास्कबार जैसी इम्पोर्टेन्ट फीचर शामिल हैं।

विंडोज 95 पर पहली बार इंटरनेट एक्सप्लोरर का भी इस्तेमाल किया गया था, लेकिन इसे डिफॉल्ट रूप से इंस्टॉल नहीं किया जा सका, इसके लिए विंडोज 95 प्लस पैक की जरूरत पड़ी थी। बाद में, विंडोज 95 में सुधार किया गया और इसमें डिफ़ॉल्ट रूप से IE (इंटरनेट एक्सप्लोरर) ब्राउज़र शामिल किया गया था।

Windows 95 Service Pack

इसे 24 फरवरी 1996 को पेश किया गया था।

Windows NT 4.0

29 जुलाई 1996 को विंडोज NT 4.0 लॉन्च किया गया था।

Windows CE

विंडोज CE का पहला वर्जन 0, नवंबर 1996 में लांच किया गया था। इसका अगला वर्जन 1 जुलाई 1998 में जारी किया गया था। इसका का तीसरा वर्जन, 3.0, 1999 में लांच किया गया था।

Windows 98

इसे विंडोज 95 के बाद बनाया गया था, और जून 1998 में पेश किया गया था। इसमें इंटरनेट एक्सप्लोरर 4, विंडोज एड्रेस बुक, आउटलुक एक्सप्रेस, माइक्रोसॉफ्ट चैट और नेटशो प्लेयर शामिल थे।

विंडोज 98 का ​​दूसरा वर्जन 5 मई 1999 को लांच किया गया था, इस वर्जन में नेटशो प्लेयर की जगह विंडोज मीडिया प्लेयर 6.2 दाल दिया गया था। ये विंडोज एक्सप्लोरर में एड्रेस बार और बैक/फॉरवर्ड नेविगेशन बटन और दूसरी सुविधाओं के साथ लांच किया गया था।

विंडोज 98 में विंडोज ड्राइवर मॉडल हार्डवेयर और एक्सेसरीज के लिए आया था, जिसने विंडोज के सभी भविष्य के वर्जन को सपोर्ट किया। इसके अलावा, इसमें USB माउस और USB हब के साथ USB पोर्ट दिया गया था।

Windows 2000

इसे 17 फरवरी 2000 में लांच किया गया था। मूल रूप से, ये माइक्रोसॉफ्ट बिजनेस-ओरिएंटेड सिस्टम विंडोज NT पर बेस्ड था। इसके अलावा, आटोमेटिक अपडेट फीचर पहली बार विंडोज 2000 पर देखा गया था और ये हाइबरनेशन को सपोर्ट करने वाला पहला ऑपरेटिंग सिस्टम था।

Windows ME

इसको सितंबर 2000 में बना गया था और ये आखिरी ऑपरेटिंग सिस्टम था, जो MS-DOS और विंडोज 9x लाइन पर आधारित था। इसमें कंस्यूमर के लिए कुछ उपयोगी सुविधाओं के साथ-साथ आटोमेटिक सिस्टम रिकवरी टूल भी दिया गया था।

इसके अलावा, पहली बार विंडोज ME पर एक इंटरनेट एक्सप्लोरर, विंडोज मूवी मेकर और विंडोज मीडिया प्लेयर 7 का इस्तेमाल किया गया था।

Windows XP

Windows XP को Windows का सबसे अच्छा वर्जन माना जाता था; इसे 25 अक्टूबर 2001 को लांच किया गया था। Windows XP का 64-बिट वर्जन 28 मार्च 2003 को लांच किया गया था। इसके अलावा, इसका कमर्शियल x64 वर्जन 24 अप्रैल 2005 को लांच किया गया था।

हरे रंग का Start बटन, नीले रंग का taskbar और Vista वॉलपेपर के साथ-साथ कई शैडोव और विज़ुअल इफ़ेक्ट को शामिल करके बदल दिया गया था।

ये कुछ महत्वपूर्ण विशेषताएं भी लाया, जैसे कि ClearType, जो LCD स्क्रीन पर कंटेंट को पढ़ने में मदद करता है, CD/DVD और दूसरे मीडिया से ऑटोप्ले फीचर, अलग अलग तरह के आटोमेटिक अपडेट और रिकवरी टूल।

इसके अलावा, इसका इस्तेमाल सबसे लंबे समय तक किया गया था, और जब इसे बंद कर दिया गया था, तब भी इसका इस्तेमाल कई PC पर किया गया था।

Windows Vista

इसे जनवरी 2007 में लांच किया गया था। इसे एक बेहतर लुक और फील यूजर इंटरफेस के साथ लाया गया था और इसमें ट्रांसपेरेंट एलिमेंट, सुरक्षा और सर्च ऑप्शन शामिल थे। विंडोज मीडिया प्लेयर 11 और इंटरनेट एक्सप्लोरर 7 को पहली बार विंडोज विस्टा पर प्रदर्शित किया गया, जिसमें एक एंटी-स्पाइवेयर प्रोग्राम विंडोज डिफेंडर भी शामिल था। इसे विंडोज DVD Maker, Speech Recognition और Photo Gallery जैसी कुछ उपयोगी सुविधाएँ भी जोड़ी गईं थी। इसके अलावा, यह DVD पर डिस्ट्रीब्यूट होने वाला पहला ऑपरेटिंग सिस्टम था।

Windows Server 2008

27 फरवरी 2008 में माइक्रोसॉफ्ट ने विंडोज सर्वर 2008 लांच किया।

Windows 7

इसे 22 अक्टूबर 2009 को विंडोज विस्टा के सामने आने वाली सभी समस्याओं को दूर करने के लिए लांच किया गया था। ये यूजर फ्रेंडली फीचर के साथ जारी किया गया था। ये पुराने सभी वर्जन की तुलना में ज्यादा मज़बूत, तेज और उपयोग में आसान था। इसके अलावा, विंडोज 7 पर पहली बार handwriting recognition सुविधा का उपयोग किया गया था।

IE माइक्रोसॉफ्ट विंडोज में डिफ़ॉल्ट ब्राउज़र था। यूजर ब्राउज़र को चुनने और इनस्टॉल करने का ऑप्शन भी दिया गया था।

Windows Server 2012

4 सितंबर 2012 में माइक्रोसॉफ्ट ने विंडोज सर्वर 2012 लांच किया गया था।

Windows 8

इसे Microsoft ने 26 अक्टूबर 2012 को लांच किया गया गया था। इसे नई सुविधाओं के साथ जारी किया गया था, जैसे कि तेज़ ऑपरेटिंग सिस्टम, USB 3.0 डिवाइस के लिए सपोर्ट और वेब स्टोर। वेब स्टोर एक ऐसा स्थान है जहां आप विभिन्न प्रकार के विंडोज़ एप्लिकेशन डाउनलोड कर सकते हैं। इसका फुल-स्क्रीन मोड पहली बार विंडोज 8 पर चलाया गया था।

Windows 8.1

इसे माइक्रोसॉफ्ट ने 17 अक्टूबर 2013 को लॉन्च किया गया था। इसे स्टार्ट बटन को फिर से लॉन्च किया गया था, जो विंडोज 8.1 के डेस्कटॉप व्यू से स्टार्ट स्क्रीन को दिखता था। इसके अलावा, और भी कई कमियों को हटाया था।

Windows 10

29 जुलाई 2015 को, माइक्रोसॉफ्ट ने विंडोज 10 की शुरुआत की। इसे कुछ नई सुविधाओं के साथ लांच किया गया था जैसे कि कीबोर्ड और माउस मोड और टैबलेट मोड सेलेक्ट करना, जो उन यूजर के लिए फायदेमंद था जो सरफेस प्रो 3 जैसे कंप्यूटर का इस्तेमाल करते हैं। ये कई डिवाइस के साथ-साथ नार्मल एप्लीकेशन सहित विंडोज टैबलेट और फोन के सभी विंडोज प्लेटफॉर्म के लिए डिजाइन किया गया था।

ये विंडोज 7 और विंडोज 8 का मिक्सचर है इसकी सबसे अच्छी बात ये है की नार्मल या पुराने वायरस इसमें काम नहीं करते है। हालाँकि नए वायरस या मैलवेयर के बारे में कह पाना थोड़ा मुस्खिल है।

Windows 11

इसे पहली बार अक्टूबर 2021 में लांच किया गया था। इसमें लुक पूरा ही बदल दिया और Start बटन भी बिच में कर दिया। ये लेटेस्ट वर्जन है।

माइक्रोसॉफ्ट ने अपने ऑपरेटिंग सिस्टम का नाम Windows क्यों रखा है?

जब Microsoft Windows को लांच नहीं किया गया था, तब सभी Microsoft यूजर MS-DOS ऑपरेटिंग सिस्टम का ही इस्तेमाल करते थे। Microsoft ने अपने ज्यादातर प्रोडक्ट को एक शब्द का नाम दिया है। इसे एक नए शब्द की जरूरत थी जो इसके नए GUI ऑपरेटिंग सिस्टम का रिप्रेजेंट करे। माइक्रोसॉफ्ट ने इसे विंडोज कहने का फैसला किया क्योंकि इसमें कई कार्य करने और एक साथ एप्लिकेशन चलाने की क्षमता है।

इसे विंडोज कहने के पीछे एक और कारण यह था कि आप विंडोज जैसे सामान्य नाम को ट्रेडमार्क नहीं कर सकते थे। इसका ऑफिसियल नाम माइक्रोसॉफ्ट विंडोज था, विंडोज का पहला वर्जन 1.0 1995 में पेश किया गया था।

विंडोज़ के एडिशन

माइक्रोसॉफ्ट ने विंडोज़ के कई एडिशन तैयार किए हैं, जो विंडोज़ XP से शुरू होते हैं। इन एडिशन में एक ही कोर ऑपरेटिंग सिस्टम है, लेकिन कुछ एडिशन में एडवांस्ड सुविधाएं भी शामिल हैं जिनकी प्राइस भी उसी के हिसाब से ज्यादा राखी गई है। विंडोज के दो सबसे कॉमन एडिशन हैं: 

  • Windows Home
  • Windows Professional

Windows Home

विंडोज होम विंडोज का बेसिक एडिशन है। इसे Windows Home Basic के नाम से भी जाना जाता है। इसमें विंडोज़ के सभी बेसिक फंशन मिल जाते है, जैसे वेब ब्राउज़िंग करना, इंटरनेट से कनेक्ट करना, वीडियो गेम खेलना, ऑफिस सॉफ्टवेयर का उपयोग करना, वीडियो देखना। इसके अलावा, यह कम खर्चीला है और कई नए कंप्यूटरों के साथ पहले से इंस्टॉल आता है।

Windows Professional

इसे Window Pro के नाम से भी जाना जाता है। ये विंडोज का एक एडवांस्ड एडिशन है, जो एडवांस्ड यूजर और छोटे बिज़नेस के लिए फायदेमंद है। इसमें विंडोज होम की सुविधा के साथ-साथ निम्नलिखित सभी सुविधाएं शामिल हैं:

  • Remote Desktop: विंडोज प्रोफेशनल एडिशन में यूजर रिमोट डेस्कटॉप कनेक्शन के ज़रिये किसी दूसरे कंप्यूटर से जुड़ सकता है, जिसमें इसके माउस, कीबोर्ड और उस कंप्यूटर के मॉनिटर को कंट्रोल और शेयर कर सकते है। इसके अलावा, हम रिमोट डेस्कटॉप कनेक्शन बनाने के लिए Teamviewer या दूसरे सॉफ्टवेयर या एप्लिकेशन का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
  • Trusted Boot: ये बूट लोडर को एन्क्रिप्ट करके सुरक्षा देता है और कंप्यूटर को रूटकिट से बचाता है। रूटकिट एक तरह का मैलवेयर है, ये सॉफ़्टवेयर टूल्स का एक ऐसा कलेक्शन होता है जो यूजर को अनऑथोराइज़ड तरीके से दूसरे कंप्यूटर में घुसने या उसे एक्सेस करने देता है।
  • Bitlocker: ये यूजर को AES (Advanced Encryption Standard) एल्गोरिथम का इस्तेमाल करके स्टोरेज ड्राइव को एन्क्रिप्ट करता है। ये सुविधा विंडोज 7 और विंडोज विस्टा (केवल Ultimate और Enterprise वर्जन) में मौजूद है, जिसमें विंडोज सर्वर 2008 भी शामिल है।

बिज़नेस लैपटॉप या कंप्यूटर पर बिटलॉकर सुविधा का उपयोग किया जाता हैं ताकि कंप्यूटर पर अपने डेटा को सुरक्षा रखा जा सके। अगर आपका कंप्यूटर चोरी हो गया हो, तब भी बिटलॉकर पासवर्ड को तोड़ना बहुत मुश्किल है। इसे सही पासवर्ड डालकर ही अनलॉक किया जा सकता है। इसके अलावा, अगर आप अपना बिटलॉकर पासवर्ड भूल जाते हैं, तो इसे रिकवर नहीं किया जा सकता है।

  • Windows Sandbox: सैंडबॉक्स कंप्यूटर, नेटवर्क या ऑनलाइन सर्विस पर सेट किया हुआ होता है जो यूजर के सिस्टम को बिना किसी परेशानी के कंप्यूटर सिक्योरिटी का इस्तेमाल या टेस्ट करने में सक्षम बनाता है। सिंपल भाषा में कहु तो उसे को experiment ये test करने के लिए एक वर्चुअल एनवायरनमेंट देता है।
  • Hyper-V: ये एक हाइपरवाइजर है, और 26 जून 2008 को माइक्रोसॉफ्ट कॉर्पोरेशन ने इसे बनाया था। इसे Windows Server Virtualization भी कहा जाता है। Hyper-V का इस्तेमाल x86 (64-bit) सर्वर के वर्चुअलाइजेशन, वर्चुअल मशीन चलाने और वर्चुअलबॉक्स जैसे थर्ड पार्टी सॉफ्टवेयर के लिए किया जाता है।
  • जिन सिस्टम में 128 GB या उससे ज्यादा की RAM है ये उसे सपोर्ट करता है।

विंडोज़ की विशेषताएं

Microsoft Windows में यूजर के काम को आसान बनाने के लिए बहुत सारी सुविधाएँ शामिल हैं। इसकी कुछ बेहतरीन विशेषताएं इस प्रकार हैं:

1. Control Panel: विंडोज एक कंट्रोल पैनल सुविधा देती है जिसमें कंप्यूटर पर रिसोर्सेज को कॉन्फ़िगर और मैनेज करने के लिए कई टूल दिए होते हैं। उदाहरण के लिए, यूजर audio, video, printer, mouse, keyboard, network connection, date and time, power saving options, user accounts, installed applications, इत्यादि के लिए सेटिंग्स बदल सकता हैं।

Control Panel
Control Panel

2. Cortana: Windows 10 ने Cortana नाम का एक फीचर लांच किया, जो वॉयस कमांड पर काम करता है। ये कई अलग अलग काम कर सकता है जैसे कि ये आपके सवालो का जवाब दे सकता है, आपके कंप्यूटर पर डेटा सर्च सकता है, ऑनलाइन शॉपिंग, रिमाइंडर सेट कर सकता है, और अपॉइंटमेंट इत्यादि कर सकता है। इसके अलावा, ये Google Assistant, Alexa, या Siri जैसी दूसरी वॉयस सर्विसेज की तरह काम करता है। विंडोज 10 में कॉर्टाना खोलने के लिए Windows Key + S दबाएं।

Cortana
Cortana

3. File Explorer: इसे Windows Explorer के नाम से भी जाना जाता है, जो आपकी फाइलों और फोल्डर को कंप्यूटर पर दिखता है। ये यूजर को हार्ड ड्राइव, SSD और दूसरे रिमूवेबल डिस्क जैसे कि पेन ड्राइव और CD/DVD पर डेटा को ब्राउज़ करने देता है, और आप डेटा को डिलीट, नाम बदलने, सर्च और मूव करने जैसे कामो को मैनेज कर सकते हो।

File Explorer
File Explorer (Windows Explorer)

4. Internet Browser: जैसा कि इंटरनेट ब्राउजर कुछ भी सर्च करने, वेब पेज देखने, ऑनलाइन शॉपिंग करने, ऑनलाइन गेम खेलने, ऑनलाइन वीडियो देखने इत्यादि के लिए बहुत इम्पोर्टेन्ट है। विंडोज में इंटरनेट ब्राउजर पहले से इंस्टॉल आता है। विंडोज 10 में, Edge Internet Browser डिफ़ॉल्ट ब्राउज़र है। इसके अलावा, इंटरनेट एक्सप्लोरर विंडोज एडिशन 95 से 8.1 तक माइक्रोसॉफ्ट विंडोज में डिफ़ॉल्ट ब्राउज़र था।

Microsoft Edge - Internet Browser in Windows
Microsoft Edge – Internet Browser

5. Microsoft Paint: ये नवंबर 1985 से, Microsoft Windows में पहले से इनस्टॉल आता है। ये एक सिंपल सॉफ्टवेयर है जो इमेज देखने और एडिट करने देता है। ये कई टूल है जो इमेज को create, crop, resize, और अलग फ़ाइल एक्सटेंशन के साथ इमेज को सेव करने देता है।

MS Paint
Microsoft Pain (MS-Paint)

6. Taskbar: विंडोज एक टास्कबार के साथ आता है जो अभी खुले है उन प्रोग्राम को दिखता है, ये यूजर को किसी भी प्रोग्राम एक्सेस करने देता है जप खुले हुए या चल रहे है। इसके अलावा, इसमें दाईं (राइट साइड) ओर नोटिफिकेशन एरिया है जो दिनांक और समय, बैटरी, नेटवर्क, वॉल्यूम और दूसरे बैकग्राउंड पर चलने वाले एप्लिकेशन दिखाता है।

Taskbar
Taskbar

7. Start Menu: माइक्रोसॉफ्ट विंडोज में टास्कबार के बाईं (लेफ्ट साइड) ओर एक स्टार्ट मेन्यू होता है। ये कंप्यूटर पर इनस्टॉल प्रोग्राम यूजर को दिखाता है। इसे केवल स्टार्ट मेन्यू बटन पर क्लिक करके या कीबोर्ड पर Windows Key दबाकर खोला जा सकता है।

Start Menu
Start Menu

8. Task Manager: विंडोज में टास्क मैनेजर फीचर शामिल होता है जो कंप्यूटर पर चल रहे एप्लिकेशन या प्रोग्राम का डिस्क्रिप्शन बताता है। आप ये भी चेक कर सकते हैं कि हर एक एप्लिकेशन कितने सिस्टम रिसोर्सेज, जैसे RAM, CPU, डिस्क I/O का इस्तेमाल किया जा रहा है।

Task Manager
Task Manager

9. Disk Cleanup: इसका इस्तेमाल टेम्पररी या अनावश्यक फ़ाइलों को हटा कर डिस्क स्पेस को खली करने की लिए किया जाता है। ये कंप्यूटर के परफॉरमेंस को बेहतर बनाने में भी मदद करती है और प्रोग्राम और डाक्यूमेंट्स को डाउनलोड करने पर उन्हें कुछ एक्स्ट्रा स्टोरेज स्पेस भी देती है। Disk Cleanup को खोलने के लिए, नीचे दिए गए स्टेप्स को फॉलो करें:

  • This PC या My Computer को खोले।
  • फिर, किसी भी डिस्क ड्राइव पर राइट-क्लिक करें और ड्रॉप-डाउन लिस्ट से Properties ऑप्शन चुनें।
  • अब, Disk Cleanup पर क्लिक करें।
Disk Cleanup
Disk Cleanup

लिनक्स और विंडोज में क्या अंतर है?

नीचे लिनक्स और विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम के बीच के मुख्य अंतर बताए गए है:

WindowsLinux
विंडोज यूजर को कमांड-लाइन (कमांड प्रांप्ट) का इस्तेमाल करने की देता है, लेकिन लिनक्स में वो कमांड काम नहीं करते है।

कमांड प्रांप्ट खोलने के लिए RUN डायलॉग बॉक्स पर क्लिक करें या शॉर्टकट Windows key + R का इस्तेमाल करें फिर RUN बॉक्स में CMD टाइप करें और एंटर बटन को दबाएं या OK पर क्लिक करें।
हालाँकि लिनक्स कमांड-लाइन एडमिनिस्ट्रेशन और डेली टास्क के लिए काफी ज्यादा सुविधाएँ देती है।
विंडोज़ ने पिछले कुछ सालो में अपने भरोसे को ओर मजबूत बनाया है, लेकिन फिर भी, ये लिनक्स की तुलना में कम विश्वसनीय है।विंडोज OS की तुलना में लिनक्स ज्यादा भरोसेमंद और सुरक्षित है। ये मुख्य रूप से सिस्टम सुरक्षा, प्रोसेस मैनेजमेंट और अप-टाइम पर फोकस करता है।
विंडोज का इस्तेमाल करना आसान है क्योंकि ये एक सिंपल यूजर इंटरफेस हिसाब से बनाया है। लेकिन इसे इनस्टॉल करने में काफी समय लगता है।हालांकि, लिनक्स में मुश्किल कामो को भी आसानी से किया जा सकता है, लेकिन इसकी इंस्टालेशन प्रोसेस थोड़ी मुश्किल है।
माइक्रोसॉफ्ट ने हाल के सालो में विंडोज़ में सुरक्षा सुविधाओं को बढ़ाया है। चूंकि इसका इस्तेमाल सबसे ज्यादा किया जाता है, इसलिए मालिसियस कोडर्स इसे ज्यादा टारगेट करते है।

इसके अलावा, अब सभी ऑपरेटिंग सिस्टम के बीच, माइक्रोसॉफ्ट विंडोज में मैलवेयर और वायरस आसानी से घुस जाते है और कंप्यूटर को नुकसान पहुंचाते है।
माइक्रोसॉफ्ट विंडोज की तुलना में लिनक्स ज्यादा सुरक्षित ऑपरेटिंग सिस्टम है। इसमें हमलावरों सुरक्षा आसानी से नहीं तोड़ पाते है, दूसरी सबसे बड़ी बात की इसके वायरस और मैलवेयर भी नहीं इसलिए इसमें हैक करना बहित ही मुश्किल होता है।

इसका इस्तेमाल कम किया जाता है इसलिए मालिसियस कोडर्स इसे टारगेट नहीं करते है और यही कारन है इसका वायरस और मैलवेयर बनाने में हमलावर अपना समय बर्बाद नहीं करते है।
ये यूजर को ऑनलाइन और पूरा सपोर्ट सिस्टम देती है, साथ ही बड़ी मात्रा में जनकारी के लिए पुस्तकें भी, जो सभी स्किल के लोगों को लोगो को मदद करती हैं।ऑनलाइन सपोर्ट के साथ, Linux को समझने में मदद करने के लिए कई सारी किताबे उपलब्ध हैं।
रेगुलर विंडोज अपडेट परेशान करता करता है। बार बार विंडोज अपडेट का अलर्ट कोई भी नहीं चाहता है।Linux यूजर को अपडेट पर पूरा कंट्रोल देता है। इसमें अपडेट सिस्टम को रीबूट किए बिना ही कम समय में हो जाता है।
लाइसेंस के अलावा माइक्रोसॉफ्ट विंडोज सॉफ्टवेयर को मॉडिफाई नहीं करने देता है (सोर्स कोड को एक्सेस नहीं कर सकते है)। इसके लिए विंडोज का अलग से डवलपर वर्जन खरीदना या लाइसेंस कीय लेनी होती है।लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम फ्री और ओपन सोर्स होता है। इसलिए ये फ्री लाइसेंस के साथ आता है जिससे कोई भी सोर्स कोड को एक्सेस करके उसे अपने अनुसार मॉडिफाई कर सकता है।

केवल इतना ही नहीं इसे मॉडिफाई करके अपना खुद का OS बना के उसे बेच भी सकते है।

विंडोज डिफेंडर क्या होता है?

विंडोज डिफेंडर माइक्रोसॉफ्ट विंडोज का एक एंटी-मैलवेयर है। इसे सबसे पहले विंडोज XP के लिए बनाया गया था। ये एक डाउनलोडेबल मुफ्त एंटी-स्पाइवेयर प्रोग्राम के रूप में लांच किया गया था, और बाद में इसे विंडोज विस्टा और विंडोज 7 के साथ पहले पहले से ही इनस्टॉल करके दिया जाने लगा। ये विंडोज 8 और उसके बाद के वर्जन में Microsoft Security Essentials की जगह पर एंटीवायरस प्रोग्राम आने लगा।

ये माइक्रोसॉफ्ट का खुद का एक एंटीवायरस है, जो अब सभी विंडोज में पहले से ही इनस्टॉल आता है। Windows 8 से पहले ये केवल स्पाइवेयर से ही प्रोटेक्ट करता था लेकिन अब ये स्पाइवेयर के साथ वायरस और मैलवेयर से भी प्रोटेक्ट करता है।

विंडोज इनसाइडर प्रोग्राम क्या होता है?

विंडोज इनसाइडर माइक्रोसॉफ्ट के तरफ से एक ओपन सॉफ्टवेयर टेस्टिंग प्रोग्राम है जो उन यूजर को इसका इस्तेमाल करने की अनुमति देता है जिनके पास विंडोज 11, विंडोज 10 या विंडोज सर्वर का वैलिड लाइसेंस है। यानी की अगर कोई भी सॉफ्टवेयर या ऑपरेटिंग सिस्टम पब्लिक के लिए लांच होने वाला होगा तो वो पहले डवलपर्स या इन लोगो के पास आ जाएगा ये टेस्ट करने के लिए उसमे कोई कमी तो नहीं है।

माइक्रोसॉफ्ट ने डेवलपर्स, एंटरप्राइज़ टेस्टर्स और वो लोग जो इसे टेस्ट करना चाहते है के लिए ये नई डेवलपर सुविधाओं को टेस्ट करने के लिए विंडोज इनसाइडर लांच किया जिससे माइक्रोसॉफ्ट को फीडबैक मिलता रहे और वो कमियों को ठीक कर सके।

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Dharmendra Author on Web Janakari

मेरा नाम धर्मेंद्र मीणा है, मुझे तकनीक (कंप्यूटर, लैपटॉप, स्मार्टफोन्स, सॉफ्टवेयर, इंटरनेट, इत्यादि) से सम्बन्धी नया सीखा अच्छा लगता है। जो भी में सीखता हु वो मुझे दुसरो के साथ शेयर करना अच्छा लगता है। इस ब्लॉग को शुरू करने का मेरा मकसद जानकारी को ज्यादा से ज्यादा लोगो तक हिंदी में पहुंचना है।

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